११ जनवरी, २०२२ को गोपीनाथ बाबा के आशीर्वाद से कल्पकथा के नाम से स्थापित हुई साहित्य संस्था अब अपने दो वर्ष पूरे कर रही है। भारत के प्रत्येक अंचल की संस्कृति, विलुप्त होती कला, और बच्चों के विकास को नई दिशा देने, हिन्दी भाषा के मूल स्वरुप को और भी अधिक विस्तार देते हुए प्रचार-प्रसार करने का उद्देश्य लिये कल्पकथा लोगों के बीच आई। पाँच सदस्यों द्वारा एक विचार के माध्यम से एक कार्यक्रम के रूप में आरम्भ हुई हरियाणा राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत कल्पकथा साहित्य संस्था अब समाज को नई दिशा देने के लिए उद्धत है।
साहित्य के उत्तम स्वरुप को सबके सामने लाना, साहित्य के माध्यम से अपनी संस्कृति के प्रति जागरुकता फैलाना, विलुप्त होती कला और ऐतिहासिक स्मृति चिन्हों को सहेजने का बीड़ा कल्पकथा साहित्य संस्था ने उठाया है।
कल्पकथा अनेक विधाओं में विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपने ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी जुटाती है। चित्रकारी प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों के बौद्धिक विकास को बढ़ाते हैं। साक्षात्कार के माध्यम से विशिष्ट व्यक्तित्व से परिचय कराते हैं। सम्वाद के माध्यम से लोगों को आपसी परिचय का अवसर प्रदान करते हैं। गद्य और पद्य लेखन में लेखन गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विशेष कक्षाएँ लगाई जाती हैं।