गीत — “श्याम स्वरूप अनूप सुदर्शन”
🌺 गीत — “श्याम स्वरूप अनूप सुदर्शन” 🌺
प्रेम श्याम का बरस रहा है, पी ले नयन उघारे,
मोर मुकुट की छवि में दिखते, तीन लोक है सारे।
कण कण में श्याम, क्षण क्षण में श्याम,
अश्रु में श्याम, मुस्कान श्याम,
मन का द्वार जो खोलेगा, वो ही दर्शन पायेगा —
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
नीति भेद नहीं करती, जो देता है वो पाता है,
कर्म सुधा तन मन से भरे जो, उसको पार लगाता है।
रख सच्चा भाव, हृदय निर्मल,
श्याम सहारा अडिग, अटल,
संकट में जो नाम जपेगा, पार उतरकर जायेगा—
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा।
सेवा व्यर्थ नहीं जाती, यह खाटू धाम बताता है,
हारे को हैं श्याम सहारे, वो बाँह थामकर लाता है।
वो फूल गुलाब के भाव भरे,
वो इत्र सुगंधि साध धरे,
मन का सरोवर करे जो निर्मल, वो ही मोती पायेगा —
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा।
सुन ले तू ओ मन श्रद्धा की, खाटू की नगरी बोली,
प्रेम कसौटी वह कसता है, हारे के मन की होली।
विश्वास जो उस पर रखता है,
हर पीर वही सुख चखता है,
पत्थर में भी फूल खिलेगा, जब वो तुझे बुलाएगा—
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा।
धन्य हुआ वो क्षत्रज वीर, जिसने शीश चढ़ाया है,
विजय न माँगी दान दिया, पर हित शीश लुटाया है।
अमर हुआ वो प्रेम अधूरा,
हारे का सहारा नाम है पूरा,
जो हारे को गले लगाये, वही श्याम कहलाएगा —
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा।
हमने बहुत करीब से देखीं, खाटू की गलियाँ प्यारी,
श्वास – श्वास में श्याम बसे हैं, दृष्टि – दृष्टि है बलिहारी।
जो बाँट सका मुस्कान कहीं,
वह तीन बाण का एक सही,
मन की हर एक आस में भर ले, वो ही प्रभु को पाएगा —
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा,
मन की आँखें खोल रे प्राणी, तुझे श्याम मिल जाएगा।
Leave A Comment
You must be logged in to post a comment.

