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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : वसुन्धरा रजक !!

यह विचार मेरे जीवन और लेखन दोनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे अनुसार नहीं होतीं, लेकिन अपने सपनों को जीवित रखना हमारे हाथ में होता है। मेरे लेखन में संघर्ष के साथ उम्मीद दिखाई देती है। मैं मानती हूँ कि रास्ता कठिन हो सकता है, समय लग सकता है, लेकिन अगर हम अपनी संवेदनशीलता और अपने सपनों को बचाकर रखते हैं तो आगे बढ़ने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

“संघर्ष चाहे जितना हो, अपने सपनों और संवेदनाओं को मरने नहीं देना चाहिए।”
✍🏻 वसुन्धरा रजक

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : डॉ. अर्चना मिश्रा” !!

जीवन अमूल्य हैं। इसको सकारात्मक रूप से सही दिशा में ले जाय। सबसे पहले अपने स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें यही आपकी वास्तविक पूंजी हैं।
समय का सदुपयोय करे। समय में ठहराव नहीं है
अपने आप को प्रकृति से जोड़े रखे।
जीव जंतु, मानव के प्रति करुणा दया का भाव जीवन में रखे।
✍🏻 डाॅ. अर्चना मिश्रा

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : डॉ. मीनाक्षी दुबे” !!

मेरे लिए हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति, चिंतन, सृजन और संभावनाओं की भाषा है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान मेरा विशेष प्रयास रहता है कि शिक्षक विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति आत्मविश्वास और रुचि विकसित करें तथा उन्हें यह समझाएँ कि हिंदी केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वे अपने लिए अनेक शैक्षिक, रचनात्मक और व्यावसायिक अवसरों के द्वार खोल सकते हैं।
✍🏻 डॉ. मीनाक्षी दुबे

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री शशि धर कुमार !!

मेरे विचार से साहित्यकार को समाज का न्यायाधीश बनने से पहले उसका सजग साक्षी बनना चाहिए।

समाज में जो घट रहा है, उसे देखना, महसूस करना और ईमानदारी से शब्द देना साहित्यकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साहित्य को किसी एक विचारधारा का प्रचार-पत्र बनने के बजाय मनुष्य की गरिमा और संवेदना का पक्षधर होना चाहिए।
✍🏻 शशिधर कुमार

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री सुजीत कुमार पाण्डेय !!

हरिवंशराय बच्चन जी की कविता में मुझे जीवन का व्यापक दर्शन दिखाई देता है। उनकी मधुशाला केवल मदिरा और मधुशाला की प्रतीकात्मक दुनिया नहीं है, बल्कि जीवन के सुख-दुःख, संघर्ष, आशा, निराशा और मनुष्य की जिजीविषा का काव्यात्मक रूपक भी है।
✍🏻 श्री सुजीत कुमार पाण्डेय

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : डॉ. श्रीमती सरिता गुप्ता !!

वर्तमान समय में हिंदी साहित्य की अगर हम बात करें तो उसका भविष्य बहुत उज्ज्वल है क्योंकि हम अंग्रेजी भाषा को पढ़ते हैं ,लिखते हैं ,बोलते हैं जो आज के समय की मांग भी है और जरुरत भी। लेकिन यह भी सत्य है कि जो सुकून हिंदी बोलने और सुनने से मिलता है वह‌ आत्मीयता विदेशी भाषा में कहांँ? वैसे आज दिन प्रतिदिन हिंदी का वर्चस्व बढ़ रहा है ।

✍🏻 डाॅ. सरिता गुप्ता

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण” !!

विद्यार्थीयों का मार्गदर्शन करना संस्कार और अच्छे साहित्य को पढ़ने के लिए पुस्तक से ज्ञान अर्जित करो तभी आप एक अच्छे मानव बन सकते हो। ये उद्देश्य हमारा रहा है।
✍🏻 श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण”

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती सराेज सिंह “सूरज” !!

प्रकृति से प्रेम और सौंदर्यबोध, परिष्कृत साहित्यिक भाषा, करुणा और राष्ट्र प्रेम इन्हीं महान लेखकों की रचनाएँ पढ़ कर ही विकसित हुए हैं। जो हमारी लेखनी में उतरे हैं हम उन लेखकों की बराबरी तो नहीं कर सकते लेकिन उनका प्रभाव अवश्य है।
✍🏻 श्रीमती सरोज सिंह “सूरज”

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती श्रीमती नीरजा “नीरू” !!

यदि मुझे अपनी साहित्यिक यात्रा को एक शब्द में व्यक्त करना होगा तो वो है “नदी” यदि “नदी” शब्द को लिया जाए, तो मेरी साहित्यिक यात्रा की अभिव्यक्ति को एक बेहद खूबसूरत, गतिशील और गहरा आयाम मिलता है। इस यात्रा को “नदी” के रूप में देखने के मुख्य कारण हैं पहला निरंतर प्रवाह:नदी कभी रुकती नहीं है, वह हमेशा आगे बढ़ती रहती है। इसी तरह, मेरी भाषाई और साहित्यिक यात्रा भी निरंतर गतिशील है।
✍🏻 श्रीमती नीरजा “नीरू”

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मीप्रिया” !!

कला और शब्द केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं बल्कि समाज के उत्थान और आत्म-परिष्कार का माध्यम हैं। अपनी संस्कृति और संस्कार के प्रति समर्पण, मानवता की सेवा, अनुभूतियों का विस्तार और जीवन को सत्य, प्रेम व समरसता की राह पर चलना तथा जीवन में संघर्ष करते हुए निरंतरता बनाऍं रखना ही मेरी साहित्य-साधना का सार है।
✍🏻 श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मीप्रिया”

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