!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती प्रियंका माथुर” !!
मेरी दृष्टि से देखा जाए तो साहित्य का वास्तविक उद्देश्य पाठक की मनोस्थिति पर निर्भर करता है उसकी रूचि पर निर्भर करता है। जिन पाठकों को मनोरंजन चाहिए वे साहित्य में मनोरंजन तलाश लेते हैं और जिन्हें समाज में परिवर्तन चाहिए वे साहित्य को उसी दृष्टि से पढ़ेंगे।
✍🏻 श्रीमती प्रियंका माथुर
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री कुमार धनंजय सुमन” !!
आध्यात्मिक चेतना मेरी लेखनी को मर्यादा, करुणा और आत्मप्रकाश देती है। भारतीय संस्कृति मुझे लोकमंगल की दिशा दिखाती है। मैं धर्म को विभाजन नहीं, मानवीय मूल्यों का प्रकाश मानता हूँ। यही भाव मेरी रचनाओं में सहज रूप से उतर आता है।
✍🏻 कुमार धनंजय सुमन
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मुक्ता शर्मा” !!
स्वतंत्रता-पूर्व के साहित्य का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनमानस के भीतर राष्ट्रीय चेतना का जागरण करना व सामाजिक कुरीतियों व विसंगतियों पर प्रहार करना था। ऐसे साथ-साथ प्रकृति प्रेम भी मुख्य विषय था।
स्वतंत्रता के पश्चात का अधिकांश साहित्य विभाजन के दंश विकास के सुझावों सामाजिक समरसता व भविष्य की नवीन संभावनाओं पर आधारित था।
✍🏻 मुक्ता शर्मा
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती कल्याणी गुप्ता कृति” !!
प्रत्येक मस्तिष्क में तर्कशीलता और रचनात्मकता के दो अलग भाग होते हैं। बांया और दायां भाग इन्हें कंट्रोल करता है। यदि किसी व्यक्ति में तर्कशीलता और कल्पना इन दोनों का सामंजस्य हो जाता है तो दिमाग अधिक क्षमता से दोनों क्षेत्रों में कार्य करने लगता है।
✍🏻 कल्याणी गुप्ता “कृति”
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!! “कल्प भेंटवार्ता” : व्यक्तित्व परिचय : श्री रमापति मौर्य” !!
वर्तमान समय में हिंदी साहित्य के सामने बाजारवाद, तकनीकी प्रभाव और मानवीय संवेदनाओं का क्षरण जैसी चुनौतियाँ हैं। वहीं सोशल मीडिया, वैश्विक मंचों पर अनुवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ने नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं।
✍🏻 श्री रमापति मौर्य जी
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!! “व्यक्तित्व परिचय : कल्प भेंटवार्ता : श्रीमती रश्मि पांडे”शुभि” !!
पहले नारी आदर्श, त्याग या फिर अबला के रूप को लेकर लेखन किया जाता था। परन्तु अब परिस्थितियाँ बदल गईं है। आज महिलाएँ अपने अनुभव, सुख दुःख, संघर्ष को अपनी रचनाओं में समाहित कर रही हैं। रूढ़िवादी मान्यताओं पर तीखे प्रहार करती हैं। अब नारी को सिर्फ पत्नी या माँ के रूप में नहीं अपितु एक स्वतंत्र नागरिक, आत्मनिर्भर के रूप में भी चित्रण किया जा रहा है।
✍🏻 श्रीमती रश्मि पाण्डेय “शुभि”
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : कुमारी अनिशा जैन” !!
सादा भोजन सादा जीवन जीने की प्रेरणा देती है। गुलाबी रंग प्रेम, नीला रंग श्री राम की सर्वव्यापकता और पीला रंग उनके पीताम्बर का प्रतीक है।
✍🏻 अनिशा जैन
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती चन्द्रा नेमा” !!
आज के परिवेश में सब प्रकार की रचनाकार है किसी की रचना मर्मस्पर्शी हृदय को छू जाती है किसी की रचना में सिर्फ शब्दों का जोड़-तोड़ होता है मैं तुकबंदी की पक्षी घर नहीं हूं सबकी अपनी-अपनी सोच है मर्म स्पर्शी रचनाएं होनी चाहिए किंतु फिर भी हिंदी हिंदू और हिंदुस्तानी से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।
✍🏻 श्रीमती चन्द्रा नेमा
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय – श्रीमती पूजा अग्रवाल” !!
“मुझे सृजनात्मक कार्यों में विशेष आनंद मिलता है। कला और शिल्प के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करना, तथा अपने उद्यम के माध्यम से लोगों के जीवन में सुंदरता जोड़ना मेरी प्रेरणा है।
सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहकर समाज के प्रति अपना योगदान देना मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है।”
✍🏻 श्रीमती पूजा अग्रवाल
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती रंजीता सहाय अशेष” !!
मेरी एक बहुत प्यारी दोस्त है — किरण। वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है, हर पल मेरे साथ खड़ी रही। यह यात्रा उसके बिना पूरी हो ही नहीं सकती। सम्मान मिलते ही मन में आता है कि आज किरण को बताऊँगी।
✍🏻 श्रीमती रंजीता सहाय अशेष
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