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जय गणतंत्र

 

जय गौरवभूमि जय भारतमाता, नित शत शत नमन हमारा है।

हिमगिरि से सिंधु तक फैला, अनुपम यह धाम है प्यारा है॥

 

स्वर्णिम गौरव गाथा तेरी, वसुधा पर अमिट है अंकित है।

वेदों, उपनिषद, गीता का ज्ञान, जिसमें सम्पूर्ण समाहित है॥

 

जिस पर अर्पित हुए युवा दल, कर रक्त तिलक बलिदान हुए।

ऋषि धरा पुण्य पावन वसुधा, अचला पर अटल प्रमाण हुए।।

 

हँस-हँस कर फाँसी के फंदे चूमें, सर्वस्व समर्पित कर जाते।

लाखों जीवन आहुति देकर, स्वातंत्र्य यज्ञ कर मुस्काते॥

 

ध्वज तिरंगा शान हमारी है, शौर्य, शांति, समृद्धि का द्योतक है।

है चक्र अशोक धर्म-चक्र, न्याय की गति का यह सूचक है॥

 

केसरिया तेज पावनता श्वेत, अवनि हरित जो शस्य-श्यामला है।

लहराएँ तिरंगा भर गर्व सदा, मानों ध्वज स्वयं ही सागरमाथा है॥

 

संविधान श्रेष्ठ है महाग्रंथ, निर्माताओं की बुद्धि का कौशल है।

सबको समता, सबको न्याय, सबके हित सबका ही बल हैं॥

 

मौलिक अधिकारों का आधार, मौलिक कर्तव्यों का कर्तव्यग्रंथ।

देवालय गणराज्य का यह, जन मानस का गौरव है लोकतंत्र॥

 

गणतंत्र ये जनता का है राज, संप्रभु मानवता का हितधारी है।

सबको अधिकार बराबर का, सबकी सम हिस्सेदारी है॥

 

राष्ट्रपति, प्रधान, सभा, सदन, सब जनता के जन सेवक हैं।

न्यायपालिका रक्षक धर्म की है, शासन प्रजा हित प्रस्तुत है॥

 

एकीकृत संघ राष्ट्र अपना, भेद विभेद किसी में न करता।

न धर्म जाति न रंग भेद, सांस्कृतिक विविधता रंग भरता॥

 

एकत्व अनेकता में है यहाँ, भाषा बोली वेश रीति भले न्यारी है।

फिर भी तन-मन-धन भारत है, यही पहचान हमारी प्यारी है॥

 

नारी शक्ति आज समर्थ यहाँ, कंधे से कंधा मिलाकर चलती है।

राष्ट्रनिर्माण के पथ पर वह, नित नवल कीर्तिमान गढ़ती है॥

 

युवा शक्ति देश का है भविष्य, तकनीक विज्ञान में उत्तम है।

अंतरिक्ष नापते मेधा से, खगोल भौतिकी में सर्वोत्तम है॥

 

कृषक अन्नदाता है यहाँ, विपणन, निर्माण, की रीति पुरानी है।

श्रम वित्त ज्ञान सेवा का संयोजन, गणतंत्र की अमर कहानी है॥

 

शिक्षा स्वास्थ्य विकास रोजगार, कर्मठ, कौशल से सब पाएँ।

सब साथ रहें, सब साथ चलें, यह मूलमंत्र सब अपनाऐं।।

 

सावधान रहें शत्रु से सदा, देशभक्ति के कवच को धारणकर।

राष्ट्रद्रोही शक्ति को कुचलें, मर्यादित विधान को अपनाकर॥

 

गणतंत्रोत्सव पावन पर्व है यह, आशा उत्साह समर्पण का दिन है।

समता, शुचिता, सद्भाव बनाए रखें, हर भारतवासी का प्रण है॥

 

प्रगति के पथ पर अग्रसर है राष्ट्र, फिर विश्व गुरु बनने की ओर चले।

सत्य, अहिंसा, धर्मनिष्ठ, वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश जो दे॥

 

यह कामना प्रभु से करते हम, गणतंत्र का यश चिरकाल रहे।

भारत माता का मस्तक ऊँचा, स्वर्णिम भविष्य की ओर चले॥

पवनेश

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