“मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला”
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला,
रण में उतरूँ, धर्म निभाऊँ, यह प्रण मैंने तोला।
राष्ट्र धर्म पर शीश झुकाऊं, मानवता हित हाथ बढ़ाऊं,
माँ की ममता, देश की मिट्टी, दोनों का है बोल़ा।।
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला।
आँखों में अरमान तिरंगे, होठों पर जयकार रहे,
सीने में इतिहास धधकता, हाथों में तलवार रहे।
रण भेरी श्रृंगार बने जब, मातृभूमि आधार रहे,
कायरता के अंधियारे में साहस की पतवार रहे।।,
बसंती क्रांति का चोला, शौर्य से शांति का चोला,
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला।
हाथों में गीता, आँख तिरंगा, मन में गूँजे राम,
धर्म-पथिक मैं अडिग खड़ा हूँ, नहीं डिगे सम्मान।
मरकर भी जो जिए देश हित, वह सच्चा इंसान,
जिसने जीवन होम किया है, है वह अमर महान।।
बसंती धर्म का चोला, अहिंसा सत्य का चोला,
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला।
आज नहीं तो कल हो उजाला, यह विश्वास अटल है,
यहां युवा में सिंह है सोया, जाग उठा उज्जवल है।
आँच भारती आन पर आई कण कण हुआ प्रबल है,
वीर प्रसूता पुण्य भूमि का गौरव केसरिया आँचल है।।
बसंती शौर्य चोला, मान सम्मान का चोला,
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला।
सदियों तक जो कथा कहेगा, वह होगा बलिदान,
मृत्यु नहीं, वह महायात्रा, अमरत्व की है पहचान।
जब संकट में आए भारत, गूँजे यही यश गान,
हाथ तिरंगा रखकर जिसने सफल किया यमदान।।
बसंती वंदन चोला, भारती नमन को चोला,
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला।
बसंती! है बासंती! बसंती! है बासंती!
बलिदानी चोला, वीर पहचान है चोला॥
मैने पहना बसंती चोला, माई पहना बसंती चोला।
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