साप्ताहिक प्रतियोगिता
- मंगल कुमार जैन
- 10/12/2025
- काव्य
- @कल्पकथा
- 2 Comments
कल्पकथा
साप्ताहिक आमंत्रण विचारों की उर्वर उड़ान
विशेष
विषय: कल्पना
क्रमांक कल्प/ दिसंबर 2025/ब
कल्पना
कल्पना से नहीं होता है काम।
कल्पना से नहीं होता है नाम।
केवल कल्पना से ही नहीं होते,
इस धरती के सारे तीरथ धाम।।
है नहीं कुछ भी करना आसान।
बैठे-बैठे यूं ही नहीं बनते निशान।
कुछ न कुछ करते रहो उद्योग,
वरना भीड़ भी लगेगी सुनसान।।
सभी चाहते बढ़ाना अपनी शान।
लगता है सबको ये बहुत आसान।
केवल प्रश्न लेकर साहब बैठे हैं,
उड़ने के लिए रिक्त पड़ा वितान।।
उगाना चाहते हैं ये खेत में धान।
पर साफ चाहिए इन्हें पूरा मैदान।
करते नहीं कुछ भी उद्यम श्रीमान,
और इनको चाहिए हीरों की खान।।
✍️
मंगल कुमार जैन
उदयपुर राजस्थान
2 Comments to “साप्ताहिक प्रतियोगिता”
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पवनेश
राधे राधे आदरणीय 🙏
कल्पना शीर्षक से अति सुन्दर सृजन हेतु सादर बधाई 🙏🌹🙏
मंगल कुमार जैन
धन्यवाद आभार 🙏🌹