
अमलतास – शशि धर कुमार
- Shashi Dhar Kumar
- 19/05/2025
- कवित्त
- अमलतास, कविता, हास्य
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अमलतास जी खड़े हुए थे सोसाइटी के गेट पे,
झूल रहे थे फूलों संग, जैसे नेता डेट पे।
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अमलतास जी खड़े हुए थे सोसाइटी के गेट पे,
झूल रहे थे फूलों संग, जैसे नेता डेट पे।
📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/मई/२०२५/स” !! 📜
📚 विषय :- !! “हास्य-व्यंग्य” !! 📚
⏰ समयावधि :- दिनाँक १९/०५/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २३/०५/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣