🇮🇳 “!! कल्प संवादकुंज – तिंरगा राष्ट्रगौरव का वाहक !!” 🇮🇳
- पवनेश
- 20/07/2024
- लेख
- प्रतियोगिता
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कल्प संवादकुंज – तिंरगा – राष्ट्रगौरव का वाहक
राधे राधे सभी को,
कल्प संवादकुंज के वर्तमान विषय तिरंगा राष्ट्र गौरव का वाहक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। अपने विचारों की शुरुआत करते हुए हम बताना चाहते हैं कि हमारा राष्ट्र ध्वज तिरंगा हमारे देश की पहचान, गौरव और स्वतंत्रता का प्रतीक है। तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं है, बल्कि यह हमारी स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं, शहीदों की बलिदानों और राष्ट्र की अखंडता का वाहक है। यह हमारे देश के अद्वितीय सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक धरोहरों का प्रतीक है।
मित्रों,
पहली बार 22 जुलाई 1947 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। तिरंगे का वर्तमान स्वरूप महानुभाव पिंगली वेंकय्या द्वारा डिजाइन किया गया था। इस ध्वज में तीन क्षैतिज पट्टियां हैं ऊपर भगवा, उसके नीचे अर्थात् मध्य में सफेद, और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टियां स्थित होती हैं ध्वज के मध्य में एक नीले रंग का अशोक चक्र है इसमें 24 तीलियाँ हैं जो जीवन के सतत प्रवाह का प्रतीक हैं।
दोस्तों,
हमारे तिरंगे में स्थित तीनों रंग क्रमशः बलिदान, शांति, और समृद्धि, के प्रतीक बताए जाते हैं साथ ही भगवा रंग को त्याग, श्वेत रंग को सत्य, और हरा रंग हरियाली अर्थात् खेती का प्रतिनिधत्तव करते हैं। कुल मिलाकर तिरंगा देश की सेना, आम जनमानस, और भारतीय समाज की रीढ़ यानि किसान को भी परोक्ष रूप से प्रतिनिधि है।
साथियों,
तिरंगे के बीच में स्थित नीले रंग का अशोक चक्र, अशोक स्तंभ से लिया गया है। यह चक्र धर्म, कानून और नैतिकता का प्रतीक है। चक्र की 24 तीलियाँ दिन के 24 घंटों का प्रतिनिधित्व करती हैं और यह दर्शाती हैं कि समय कभी नहीं रुकता, और हमें भी निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
भाईयों,
हमारा राष्ट्र ध्वज भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में एकता, और समग्र क्रांति, का मूल चिन्ह बनकर उभरा था। हमारे क्रांतिकारी, बलिदानी, और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, ने इस राष्ट्र ध्वज के सम्मान में आंदोलन को यज्ञ और जीवन को आहुति बनाकर ध्वज के गौरव में वृद्धि की है।
बहिनों,
तिरंगे के प्रति सम्मान और आदर हमारे संविधान और कानूनों द्वारा सुनिश्चित किया गया है। ध्वज को फहराने, संजोने और संभालने के कड़े नियम हैं, जिनका पालन हर भारतीय को करना चाहिए। ध्वज को कभी भी जमीन पर नहीं गिराना चाहिए और न ही इसे अपमानजनक ढंग से इस्तेमाल करना चाहिए। राष्ट्रध्वज को सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है, और रात में केवल विशेष अवसरों पर ही फहराया जा सकता है।
बन्धुओं और भगिनियों,
हमारे लिए तिरंगे का महत्व समझना बेहद जरूरी है। यह ध्वज हमारी स्वतंत्रता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। इसके प्रति सम्मान और गर्व की भावना हर भारतीय के दिल में होनी चाहिए। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से तिरंगे के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना आवश्यक है।
अपने विचारों को विराम देते हुए हम यही कहना चाहते हैं कि तिरंगे का सम्मान और आदर हर भारतीय का कर्तव्य है, और हमें इसे गर्व के साथ फहराना चाहिए। तिरंगा न केवल हमारे देश की पहचान है, बल्कि यह हमारी आत्मा और भारतीयता का प्रतीक है। भारत माता की जय, वन्दे मातरम्, जय हिन्द,
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Jaya sharma
देश का गौरव तिरंगा
प्रत्येक देश ,राज्य,धर्म,विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं को एक दूसरे से भिन्न करने के लिए ध्वज का विशेष महत्व है । हमारी प्राचीन सभ्यताओं में भी ध्वज को वरीयता प्रदान की गई है । सभी समूह,संस्थाओं ,धर्म संप्रदायों ,क्रीडा स्पर्धाओं के लिए निर्धारित ध्वज को,समूह के सभी सदस्यों द्वारा पूर्ण सम्मान देना अनिवार्य होता है ।
ध्वज की रक्षा करना हर सदस्य के नैतिक कर्तव्य में समाहित होता है ,हमारी संस्कृति विविधताओं में एकता का सूत्र लिए हुए सदैव जन जन द्वारा सम्मानित है ,हमारे प्राचीन ग्रंथो में भी ध्वज को पूर्ण सम्मान प्रदान किया गया है ।
हमारे देश पर बाहर से आए आक्रांताओं ने हम पर शासन करते हुए हमारे ध्वज और हमारे समूह को बहुत नुकसान पहुंचाया,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ध्वज की अस्मिता को लेकर भी सेनानी अत्यधिक जागरूक और सजग थे ।
प्राचीन काल से हर संस्कृति में एक विधान रहा कि जहां जहां विजेता अपनी सेना के साथ आगे बढ़ता ,उतने उतने हिस्से को अपने ध्वज के अधीन कर देता ।
इसी नीति का पालन करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों की रणनीति में शामिल था कि वह अंग्रेजों के अधीनस्थ दफ्तरों और प्रतिष्ठानों पर स्वयं अधिकार कर वहां पर अपना ध्वज स्थापित करें । इस ध्वजारोहण का उद्देश्य आम लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना को भी स्थापित करना होता था ।
भारतवर्ष के राष्ट्रीय ध्वज में तीन समान पटि्टयां है जिसमें सबसे ऊपर केसरिया रंग की पट्टी हमारे देश की ताकत और साहस को उद्घोषित करती है ,शांति और सत्य का संकेत देती हुई बीच में धर्म चक्र के साथ श्वेत पट्टी है ,देश के शुभ विकास और प्रगति को सबसे नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी दर्शाती है । भारत की संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप अपनाया भारत में पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के ग्रीन पार्क में फहराया गया था। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज देशवासियों की आशाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
भारतीय राष्ट्रीय तिरंगा हमारे गौरव का प्रतीक है तिरंगे की रक्षा के खातिर हमारे वीर सैनिकों ने बिना किसी घबराहट के अपने प्राणों की आहुति भी देती ।
पिंगली वेंकैया हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रचनाकार है और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी उनका अतुल्य योगदान रहा। भारत के राष्ट्रीय ध्वज संविधान सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को बहुत सम्मान के साथ अपनाया गया था।
जया शर्मा प्रियंवदा