“जय भगवान परशुराम”
जय परशुराम जमदग्निनन्दन रेणुकासुत भृगुवंशी राम।
क्षत्रियान्तक महावीर तपस्वी
तेजस्वी ब्रह्म धनुर्धर श्याम।।
शिवप्रिय ब्रह्मचारी धर्मपालक सत्यव्रती शस्त्रधारी अजेय।
तेजस्वी महायशस्वी विष्णुरूप चिरंजीवी परशुधर हे अभये।।
क्रोधरूप भक्तवत्सल वेदविद तपोधन ब्राह्मणश्रेष्ठ महान।
क्षत्रियदमन रुद्रांश पराक्रमी शत्रुनाशक धर्मज्ञ सुजान।।
ब्रह्मज्ञ लोकहितकारी जगद्गुरु शरणागतवत्सल महातपस्वी ज्ञान।
योगी सिद्धिदाता पुण्यात्मा वेदपारंगत महाबली श्री शौर्यवान।।
अचल निष्कलंक निरहंकारी लोकनाथ विश्वविख्यात पुण्यश्लोक।
आदित्यतेजस्वी शास्त्रविद धर्मसंस्थापक परब्रह्म दिव्य आलोक।।
संन्यासी आत्मज्ञ शान्त उदार निर्भय सत्यसंकल्प तेजोराशि।
कालरूप विनयशील करुणासागर निर्लोभी निरामय सुखवासी।।
अनन्त महात्मा त्रिकालज्ञ वेदान्ती तपोनिष्ठ अजर अमर विभु।
ब्रह्मनिष्ठ शुद्धात्मा लोकपूज्य शौर्यसागर धर्मवीर प्रभु।।
सत्पुरुष योगेश्वर ज्ञानदाता तपस्विराज दिग्विजयी परमात्मा।
विश्वात्मा निर्गुण सगुण आत्मस्वरूप मोक्षदाता पुण्यदाता आत्मा।।
शास्त्रज्ञ धर्मरक्षक तपोनिधि शत्रुघ्न दीनबन्धु भक्तरक्षक।
धर्मप्रचारक महायोगी ब्रह्मर्षि विश्वगुरु तपोमूर्ति सुशोभक।।
परमवीर ज्ञानमूर्ति धर्ममूर्ति सत्यरूप सनातन अवतारी।
हरिभक्त ब्रह्मविद श्रीपरशुराम कृपा करहु भवभय हारी।।
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