
🌷!! “सागर मंथन” !! 🌷
- Radha Shri Sharma
- 05/03/2025
- गीत
- कविता
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श्री धन अद्भुत पा सरित्पति बढ़ रहा मान गुमान
चौदह रत्न निकाल मेट्या प्रभु रत्नाकर का मान
सागर मन्थन किया सागर मन्थन…. (2)
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श्री धन अद्भुत पा सरित्पति बढ़ रहा मान गुमान
चौदह रत्न निकाल मेट्या प्रभु रत्नाकर का मान
सागर मन्थन किया सागर मन्थन…. (2)
विरह गीत श्याम सुंदर मेरे.. मैंने तेरे लिए खुद को इतना .. सजाय हुआ है ये काजल ,ये चूड़ी , ये गजरा मैने मैहदी लगाया हुआ है .. श्याम सुंदर मेरे.. मैंने तेरे लिए मेरी साँसों मे तू , मेरी धड़कन मे तू मेरी बहती आस्को की बूंदों मे तू मैंने आँखों को समुंदर बनाया हुआ है श्याम सुंदर मेरे.. …
Continue Readingयह काव्य रचना स्वरचित है जो की आज की प्रतियोगिता हेतु प्रस्तुत है |
विषय : माता जानकी
दिनांक 13/05/2024

एक दीप जलाऊँ ऐसा, जग तिमिर नाश जो कर दे, तमस मिटा अज्ञान की मन ज्ञान प्रकाश जो भर दे।। एक दीप जलाऊँ ऐसा…. आशाओं का खोज सवेरा, खुशियों का दिवस दिखाऊँ। निर्धनता की मिटा लकीरें, साधन समृद्धि फैलाऊँ। दुख की निशा की मिटा कर मन में सुख दिवाकर जो भर दे। एक दीप जलाऊँ ऐसा …… नव …
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