शिक्षक ( विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक – कल्प/अगस्त/२०२५/अ)
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Milan Upadhyay
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05/09/2025
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काव्य
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काव्य
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इस मन और मानव- जीवन को दे आकार वो शिक्षक है जीवन कच्ची मिट्टी सा है शिल्पकार वो शिक्षक है जिनके ज्ञान की एक बूंद से लाखों जीवन तृप्त हुए अविरल निष्कंटक बहता है ज्ञान का सागर शिक्षक है । – मिलनसार कवि (मिलन उपाध्याय) Favorite
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मातरम्
*शिवालयों से शंखनाद हुआ है गुरुवाणी गुरुद्वारे से ।**कानों ने अजान सुनी फिर गूंज उठा हर चौबारे से ।।**मातरम्, मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम् ।।* तोड़ पुरानी जंजीरों को आज नया इतिहास लिखें,गर्म लहू की धाराओं से राष्ट्रभूमि का श्रृंगार करें ।मिट्टी से उपजे मिट्टी को ही बलिहार करें,देश की खातिर मिट जाने का कर ले तू आचरण ।। *मातरम् …
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रक्षा बंधन
बहन करे भाई का अभिनंदनभाई हो जब नतमस्तक वंदनरिश्तों की बगिया में प्रेमपुष्प खिल जातेकसमें वादे रक्षा प्रेम के रक्षाबंधन कहलाते बहना ने आशाओं में भाई के सपने गढ़े हैंबहना की रक्षा खातिर भाई हर मुश्किल से लड़े हैबहन मां और भाई कभी बाप बन जातेकसमें वादे रक्षा प्रेम के रक्षाबंधन कहलाते ऋतु चार महीने बारह बहना को रहता इंतजारखर्चे …
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मनभावन सावन
🌿 सावन मनभावन – 🌿 1. मेघा गरजें बिजली चमके, मनवा का सुख बढ़ जाए रे। 2. हरियाली से भू धर सजती, झूला झूले लुभाए रे॥ 3. कोयल बोले आम्र तरु ऊपर, बृज की छवि मुस्काए रे। 4. सखियाँ संग सजन के सपने, मन मृग झट हरषाए रे॥ 5. नदियाँ लहरें नाचे झूमें, वर्षा जल सुख लाए रे। 6. थिरकें …
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घर सावन में बेटियाँ आती हैं
विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जुलाई/२०२५/अ” !! विषय :- !! “सावन और बेटी” !! विधा :- काव्य भाषा :- हिन्दी शीर्षक: ” घर सावन में बेटियाँ आती है” धूप से तपते आँगन में ज्यों पहली बारिश आती है.. घर सावन में बेटियाँ आती है… झूम के मेघ बरसता हो.. चाहे दुर्गम रस्ता हो… अपनी उतावली पर अक्सर …
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