भक्त तेरा संकट में है, अब पार लगाओ ना
- पवनेश
- 06/10/2025
- काव्य
- कविता, हिन्दी कविता
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भक्त तेरा संकट में है, अब पार लगाओ ना
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भक्त तेरा संकट में है, अब पार लगाओ ना
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अमलतास जी खड़े हुए थे सोसाइटी के गेट पे,
झूल रहे थे फूलों संग, जैसे नेता डेट पे।

घटना सबकी जानी सुनी है, किस से छुपा छुपाया।
धू धू कर जल उठी होलिका, हँसता प्रह्लाद घर आया।
सुनो सखा शिक्षा देती ये सुमधुर भक्त कहानी।
हरि प्रिय का जो अहित किया तो निज काल बुलाया।।

श्री धन अद्भुत पा सरित्पति बढ़ रहा मान गुमान
चौदह रत्न निकाल मेट्या प्रभु रत्नाकर का मान
सागर मन्थन किया सागर मन्थन…. (2)

सरदार वल्लभ भाई पटेल
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विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– कल्प/नवम्बर/२०२४/द विषय :- !! “मेरे प्रिय कवि” !! विधा: लेख शीर्षक : मेरे प्रिय कवि ” निराला “ हिन्दी कविता की बात की जाए तो साहित्य का छायावादी युग एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। छायावादी कविता के एक प्रमुख स्तंभ ” महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला “मेरे प्रिय कवियों में से एक है। अपनी साहित्य साधना …
Continue Readingसाहस और आत्मविश्वास के बल पर हर विपत्ति को पार किया जा सकता है।
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र
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सौंधी माटी
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