
“भरत और हनुमान मिलाप”
भरत और हनुमान मिलाप
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भरत और हनुमान मिलाप
Continue Readingनारी सृजन की शक्ति है नारी ही सृजन करती है तेरी,मेरी, सबकी दुनिया नारी से ही तो बनती है नारी के रुप अनेकों हैं वो जननी, तो कभी भगिनी है नारी सुख-दुख की साथी है वो कभी तो जीवन-संगी है वो कभी तो पुत्रवधू बनकर परिवार का पोषण करती है वो नारी ही कल्याणी …
Continue Readingइस मन और मानव- जीवन को दे आकार वो शिक्षक है जीवन कच्ची मिट्टी सा है शिल्पकार वो शिक्षक है जिनके ज्ञान की एक बूंद से लाखों जीवन तृप्त हुए अविरल निष्कंटक बहता है ज्ञान का सागर शिक्षक है । – मिलनसार कवि (मिलन उपाध्याय) Favorite
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