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कार्तिक मास में नदियों का महत्व

सनातन धर्म में कार्तिक मास ही अपने आप में बहुत महत्व रखता है। बहुत ही पुण्य व फलदायी मास माना जाता है। कहा जाता है भगवान श्री विष्णु चार मास शयन के पश्चात इसी मास में योगनिद्रा से जागते हैं। वे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को क्षीर सागर में शयन करने जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। उनके शयन के बाद कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी के बाद ही हर शुभ काम होते हैं।

कार्तिक मास नदियों में स्नान कर भगवान विष्णु और मां तुलसी की पूजा का विधान है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्य फल देता है। कार्तिक पूर्णिमा को स्नान दान की पूर्णिमा भी कहा जाता है और इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना ही अमोघ फल देता है। ये पूरा मास ही त्यौहारों से भरा होता है।

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नवरात्रि पर्व: आध्यात्मिक दृष्टिकोण

नवरात्रि पर्व:आध्यात्मिक दृष्टिकोण  या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः || नवरात्रि का पावन पर्व प्रारंभ हो गया है। हमारी संस्कृति के सुंदरतम त्योहारों में से एक नवरात्रि पर्व जो कि शक्ति की आराधना और उपासना को समर्पित है। हमारी सनातन संस्कृति में 33 कोटि देवी देवता कहे गए हैं जिसमे ईश्वर के नारी स्वरूप को …

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