पगली
- Suryapal Namdev
- 25/11/2025
- काव्य
- करुणा, हिन्दी काव्य
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काव्य , पगली, कविता
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काव्य , पगली, कविता
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गोस्वामी तुलसीदास जी आल्हा शैली
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पौने का होना ( पूरे से कुछ कम ) जीवन में जो कुछ मिला,पौना ही रह गया,दी सांस अगर , जीना था, सौ वर्ष मगर,पौना ही रह गया, सोचा था खेलेंगे मन भर,मां ने जो लगाई आवाज़खेल अधूरा ही रह गया,पढ़ पढ़ कर काटी रात सभीआया निष्कर्ष तोपौना ही रह गया, पाया तो रिश्तों में कुछ न ,लोगों को खोना …
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