!! “कल्प भेंटवार्ता : “व्यक्तित्व परिचय : डॉ. ईशा भारद्वाज” !!
- कल्प भेंटवार्ता
- 10/04/2026
- लेख
- साक्षात्कार
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!! “कल्प भेंटवार्ता : “व्यक्तित्व परिचय : डॉ. ईशा भारद्वाज” !!
दिनाँक : ९/४/२०२६
!! “मेरा परिचय” !!
नाम :- डॉ. ईशा भारद्वाज
माता/पिता का नाम :- श्री मती मंजू शर्मा , श्री नरेंद्र पाल शर्मा जी
जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :- भरतपुर राजस्थान , 13 जुलाई 1987
पति का नाम :- श्री आर आर भारद्वाज
बच्चों के नाम :- ईरव , शार्विल
शिक्षा :- एम ए सोशियोलॉजी, एम ए इंग्लिश लिटरेचर, बी एड
व्यावसाय :- प्रधानाचार्य
वर्तमान निवास :- साहिबाबाद
आपकी मेल आई डी :- eeshabhardwaj@gmail.com
रुचि एवं विधाएँ : लेखन , गायन , नृत्य (कथक) अभिनय
आपकी कृतियाँ :- धन्यवाद ब्रह्मांड, मुझे फिर से बुलाना चाहता है (ग़ज़ल), एक ख़त लिखा ख़ुद के लिए, प्रियतम मेरे, मैंने कुछ लिखा
आपकी विशिष्ट कृतियाँ :- मैं बरसाने की बहू , भज मण्डप
आपकी प्रकाशित कृतियाँ :- मेरे मन की मैं
पुरूस्कार एवं विशिष्ट स्थान :- सरोजिनी नायडू अवार्ड फॉर वर्किंग वोमेन , कविशिरोमणि अवार्ड , महादेवी पुरस्कार, मिसेस इंडिया के एफ एल 2025
टेलीविज़न पर एक्टिवली एक्टिव
१. डी आई डी Zee TV पर
२. सबसे स्मार्ट कौन (स्टार प्लस)
३. दूरदर्शन के डीडी चैनल पर (काव्य पाठ)
४. हाल ही में सोनी टीवी के व्हील ऑफ फॉर्च्यून विद अक्षय कुमार
५. सुदर्शन चैनल पर काव्य पाठ
६. न्यूज 18 पर काव्य पाठ
७. न्यूज 18 पर पॉडकास्ट
८. ट्रू मीडिया के यूट्यूब चैनल पैट पॉडकास्ट
९. मारवा स्टूडियो के चैनल पर पॉडकास्ट
१०. साधना चैनल पर काव्य पाठ
!! “मेरी पसंद” !!
उत्सव :- दीपावली, होली , करवाचौथ
भोजन :- दाल बाटी चूरमा , डोसा
रंग :- गुलाबी, नीला, बैगनी
परिधान :- साडी, वेस्टर्न
स्थान एवं तीर्थ स्थान :- ऋषिकेश
लेखक/लेखिका :- मुंशी प्रेमचंद, स्वामी विवेकानंद
कवि/कवयित्री :- महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन
उपन्यास/कहानी/पुस्तक :- मैला आँचल ( मुंशी प्रेमचंद)
कविता/गीत/काव्य खंड :- कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ( हरिवंश राय बच्चन )
खेल :- बेडमिल्टन
फिल्में/धारावाहिक (यदि देखते हैं तो) :- पीरियड फिल्म्स
आपकी लिखी हुई आपकी सबसे प्रिय कृति :- मेरी लाडली जू
!! “कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न – डॉ. ईशा भारद्वाज जी के उत्तर” !!
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न १. डॉ. ईशा जी, आप अपने बचपन और भरतपुर से जुड़ी उन खास यादों के बारे में बताइए जो आपके हृदय के बेहद करीब हैं। साथ ही, हम यह भी जानना चाहेंगे कि एक संस्कारी बेटी के रूप में आपने अपने माता-पिता से मिले संस्कारों को अपने जीवन में किस तरह अपनाया और निभाया है?
ईशा जी :- मेरा बचपन भरतपुर की मिट्टी की खुशबू में बसा हुआ है। वहाँ की सादगी, अपनापन और पारिवारिक संस्कार मेरे जीवन की नींव हैं। माता-पिता ने मुझे केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाई—सम्मान, करुणा, और आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाया। आज भी मैं अपने हर निर्णय में उन्हीं संस्कारों की छाया महसूस करती हूँ और उन्हें अपने जीवन में पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करती हूँ।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न २. आपने समाजशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य जैसे विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की है—क्या आप बताएंगी कि इन दोनों ने आपके व्यक्तित्व और लेखन को कैसे आकार दिया?
ईशा जी :- समाजशास्त्र ने मुझे समाज की गहराइयों को समझना सिखाया, वहीं अंग्रेजी साहित्य ने भावनाओं को अभिव्यक्त करने की कला दी। इन दोनों विषयों ने मिलकर मेरे व्यक्तित्व को संतुलित और संवेदनशील बनाया, जिससे मेरा लेखन भी यथार्थ और भावनाओं का सुंदर संगम बन पाया।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ३. ईशा जी, आप गौरवान्वित माँ, सहज गरिमामय पत्नी है, सार्वजनिक जीवन में प्रधानाचार्य होने के साथ-साथ लेखन, नृत्य और अभिनय में भी सक्रिय हैं—आप इन सभी भूमिकाओं को इतनी सुंदरता से कैसे संतुलित करती हैं?
ईशा जी :- मेरे लिए हर भूमिका एक आशीर्वाद है माँ होना, पत्नी होना, प्रधानाचार्य होना या एक कलाकार होना। मैं हर जिम्मेदारी को प्रेम और समर्पण से निभाती हूँ। समय प्रबंधन और आत्मअनुशासन मेरे जीवन के आधार हैं, और सबसे महत्वपूर्ण है परिवार का सहयोग, जो मुझे हर कदम पर सशक्त बनाता है।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ४. आपकी लेखन यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? क्या कोई विशेष घटना या व्यक्ति आपकी प्रेरणा बना?
ईशा जी :- मेरी लेखन यात्रा किसी एक क्षण से नहीं, बल्कि भावनाओं के निरंतर प्रवाह से शुरू हुई। बचपन से ही शब्दों से लगाव था, और जीवन के अनुभवों ने उसे दिशा दी। मेरे आसपास के लोग और घटनाएँ ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ५. आपकी ग़ज़ल “धन्यवाद ब्रह्मांड, मुझे फिर से बुलाना चाहता है” के पीछे की भावना क्या है? यह किन अनुभवों से प्रेरित है?
ईशा जी :- “धन्यवाद ब्रह्मांड, मुझे फिर से बुलाना चाहता है” मेरी आत्मा की एक पुकार है। यह ग़ज़ल जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्षों और पुनः उठ खड़े होने की शक्ति को दर्शाती है। यह उन क्षणों से प्रेरित है जब जीवन ने मुझे नए सिरे से खुद को पहचानने का अवसर दिया।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ६. “मैं बरसाने की बहू” जैसी विशिष्ट कृति का विचार आपके मन में कैसे आया? इसके पीछे क्या सोच रही?
ईशा जी :- “मैं बरसाने की बहू” मेरे हृदय की भक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव का परिणाम है। राधा कृष्ण की भूमि से मेरा आत्मिक संबंध है क्युकी मैं बरसाने की बहू हूँ और इसी भाव ने इस कृति को जन्म दिया। यह केवल एक रचना नहीं, बल्कि मेरी श्रद्धा की अभिव्यक्ति है।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ७. आपकी प्रकाशित कृति “मेरे मन की मैं” के बारे में हमारे श्रोताओं को क्या बताना चाहेंगी? यह पुस्तक किस तरह का संदेश देती है?
ईशा जी :- “मेरे मन की मैं” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि मेरे अंतर्मन की सजीव अभिव्यक्ति है। इसमें मेरे स्वयं के वे भाव समाहित हैं, जो आत्म-प्रेम से आरंभ होकर सम्पूर्ण सृष्टि से जुड़ जाते हैं। मेरा मानना है कि जब हम स्वयं से प्रेम करना सीख जाते हैं, तब प्रकृति भी हमें प्रेम करने लगती है और ब्रह्मांड भी हमारे साथ स्नेह का संबंध स्थापित कर लेता है ,इन्हीं गहरे भावों को मैंने इस पुस्तक में शब्दों के माध्यम से उकेरा है।
इसमें विविध प्रकार की रचनाएँ हैं : छंद, कविताएँ, और भावनाओं से ओत प्रोत अभिव्यक्तियाँ। मेरी आराध्या राधा रानी के प्रति भक्ति, कृष्ण प्रेम, पति के प्रति स्नेह, और जीवन के विविध रूपों में प्रेम की उत्कटता इन सभी का समावेश इस कृति में हुआ है। साथ ही, यह पुस्तक आत्मविश्वास को जागृत करने और भीतर की शक्ति को पहचानने का एक माध्यम भी है।
मैं हृदय से यह मानती हूँ कि यदि मेरी इस पुस्तक के माध्यम से किसी एक व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है, तो वह मेरे लिए अत्यंत बड़ा सौभाग्य होगा। इसी पवित्र भावना के साथ मैंने “मेरे मन की मैं” की रचना की है, जो वर्तमान मे Amazon पर उपलब्ध है।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ८. आपको सरोजिनी नायडू अवार्ड, कवि शिरोमणि अवार्ड और महादेवी पुरस्कार जैसे सम्मान मिले—इन उपलब्धियों को आप अपने जीवन में कैसे देखती हैं?
ईशा जी :- मेरे लिए सरोजिनी नायडू अवॉर्ड और कवि शिरोमणि अवॉर्ड प्राप्त करना अत्यंत गौरवपूर्ण और सुखद अनुभव रहा है। सरोजिनी नायडू अवॉर्ड विशेष रूप से उन कार्यशील महिलाओं को प्रदान किया जाता है, जो अपने व्यावसायिक जीवन के साथ साथ विभिन्न सह पाठयक्रम एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इस सम्मान के लिए विश्वभर से केवल लगभग सौ महिलाओं का चयन किया जाता है ऐसे में उनमें मेरा नाम सम्मिलित होना मेरे लिए अत्यंत गर्व और कृतज्ञता का विषय है।
वहीं कवि शिरोमणि अवॉर्ड मेरे लिए एक अमूल्य रत्न के समान है। यह सम्मान मेरी काव्य यात्रा, मेरी भावनाओं और मेरे शब्दों की साधना का साक्षात् प्रमाण है। इस प्रकार का रत्न मेरे साहित्यिक जीवन में जुड़ना मेरे लिए केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है कि मैं अपनी लेखनी को और अधिक निखारूँ और समाज को सार्थक अभिव्यक्ति दे सकूँ।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ९. आपने डीआईडी, सोनी टी वी, न्यूज 18 और अन्य मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है—इन अनुभवों में से कोई एक खास पल हमारे साथ साझा करेंगी? (निवेदन है रोमन लिपि के स्थान पर देवनागरी लिपि का प्रयोग करें)
ईशा जी :- डीआईडी, सोनी टीवी और न्यूज़ 18 जैसे मंचों पर अपनी प्रस्तुति देना मेरे लिए अत्यंत गर्व का क्षण रहा। एक विशेष पल वह था मेरे लिए वह क्षण अत्यंत विशेष और अविस्मरणीय रहा जब मुझे अक्षय कुमार जी से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। उनकी मुस्कान ने मुझे अपने जीवनसाथी की मुस्कुराहट की याद दिला दी वही अपनापन, वही सहजता। उस मंच पर अपनी कविता प्रस्तुत करना मेरे लिए गर्व और भावनाओं से भरा अनुभव था। पूरा शो एक तरह से मेरी कविताओं से सुसज्जित रहा है। मैं सभी से आग्रह करूँगी कि आप इसे अवश्य देखें ::व्हील ऑफ़ फ़ॉर्च्यून (सोनी टीवी) का तीसरा एपिसोड।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न १०. कत्थक नृत्य, गायन और अभिनय जैसी कलाओं ने आपके लेखन को किस तरह प्रभावित और समृद्ध किया है?
ईशा जी :- कत्थक, गायन और अभिनय ने मेरे लेखन को जीवंत बना दिया है। इन कलाओं ने मुझे भावों की गहराई और अभिव्यक्ति की विविधता सिखाई, जिससे मेरे शब्दों में भी लय, नृत्य और संवेदना का समावेश हो गया।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न ११. आपके पसंदीदा लेखक मुंशी प्रेमचंद और स्वामी विवेकानंद हैं—इनसे आपने क्या सबसे बड़ा जीवन-पाठ सीखा?
ईशा जी :- मुंशी प्रेमचंद से मैंने यथार्थ और सादगी सीखी, वहीं स्वामी विवेकानंद से आत्मविश्वास और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा मिली। इन दोनों महान विभूतियों ने मेरे सोचने और लिखने के दृष्टिकोण को गहराई दी।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न १२. ईशा जी, अगर तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो अतीत और वर्तमान में स्त्री विषयक लेखन में अपेक्षाकृत अधिक परिवर्तन हुआ है, आप इस परिवर्तन को कैसे देखती हैं और क्यों?
ईशा जी :- अतीत और वर्तमान के स्त्री लेखन में बहुत परिवर्तन आया है। आज की स्त्री अधिक मुखर, आत्मनिर्भर और जागरूक है। वह अपने अधिकारों और अस्तित्व को लेकर सजग है, जो साहित्य में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह परिवर्तन समाज की प्रगति का प्रतीक है।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न १३. ईशा जी, वर्तमान समय में तकनीकी, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, का जीवन के हर क्षेत्र में प्रभाव पड़ा है, आप हिन्दी साहित्य में इस बदलाव को किस दृष्टिकोण से देखती है
ईशा जी :- तकनीकी और सोशल मीडिया ने हिन्दी साहित्य को एक नया मंच दिया है। इससे लेखकों को अपनी रचनाएँ व्यापक स्तर पर साझा करने का अवसर मिला है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी एक नया आयाम जोड़ रही है, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ ही साहित्य की आत्मा हैं।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न १४. आपकी सबसे प्रिय कृति “मेरी लाडली जू” है—इससे आपका भावनात्मक जुड़ाव कैसा है?
ईशा जी :- “मेरी लाडली जू” मेरी आत्मा के सबसे कोमल और पवित्र भावों की अभिव्यक्ति है। इस रचना के माध्यम से मेरा यह भाव प्रकट होता है कि मैं पूर्णतः राधा रानी के चरणों में समर्पित हूँ, उनकी भक्ति में लीन हूँ। यह कृति मेरे और मेरी आराध्या के बीच उस दिव्य संबंध को दर्शाती है, जो शब्दों से कहीं अधिक गहरा और आत्मिक है।
कल्प भेंटवार्ता प्रश्न १५. ईशा जी, आप आज के साहित्यकारों और हमारे श्रोताओं के लिए क्या संदेश साझा करना चाहेंगी?
ईशा जी :- मैं अपने सभी आदरणीय साहित्यकारों और प्रिय श्रोताओं को नमन करते हुए यही कहना चाहूँगी कि हम सभी अपने-अपने क्षेत्र में अद्भुत और उत्कृष्ट सृजन कर रहे हैं। हर साहित्यकार की अपनी एक विशिष्ट पहचान और अभिव्यक्ति होती है, और मैं हृदय से उन सभी का सम्मान करती हूँ।
मैं केवल अपनी बात कह सकती हूँ कि हमारे लेखन में स्वयं से प्रेम, भक्तिभाव और संस्कारों की गहराई अवश्य झलकनी चाहिए। क्योंकि हमारा साहित्य केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनता है। हमें अपने शब्दों के माध्यम से ऐसे संस्कार देने हैं, जो भविष्य को सशक्त और संवेदनशील बना सकें।
मेरे प्रिय श्रोताओं से मैं यही कहना चाहूँगी कि जीवन में स्वयं पर विश्वास रखिए, ईश्वर और ब्रह्मांड के आशीर्वाद को अनुभव कीजिए, और सदैव आगे बढ़ते रहिए। प्रेरणा जहाँ से भी मिले, उसे स्वीकार कीजिए और अपने जीवन को प्रेम, भक्ति और सकारात्मकता से भर दीजिए।
अंततः, मेरा यही मानना है कि जब हमारा मन, हमारी लेखनी और हमारे संस्कार एक सकारात्मक दिशा में चलते हैं, तब हम न केवल अपने जीवन को, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों को भी एक सुंदर दिशा दे पाते हैं।
मैं अपने सभी आदरणीय साहित्यकारों, हितैषियों और प्रिय श्रोताओं को नमन करते हुए यही कहना चाहूँगी कि हम सभी अपने-अपने क्षेत्र में अद्भुत और उत्कृष्ट सृजन कर रहे हैं। हर साहित्यकार की अपनी एक विशिष्ट पहचान और अभिव्यक्ति होती है, और मैं हृदय से उन सभी का सम्मान करती हूँ।
मैं केवल अपनी बात कह सकती हूँ कि हमारे लेखन में स्वयं से प्रेम, भक्तिभाव और संस्कारों की गहराई अवश्य झलकनी चाहिए। क्योंकि हमारा साहित्य केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनता है। हमें अपने शब्दों के माध्यम से ऐसे संस्कार देने हैं, जो भविष्य को सशक्त और संवेदनशील बना सकें।
मेरे प्रिय श्रोताओं से मैं यही कहना चाहूँगी कि जीवन में स्वयं पर विश्वास रखिए, ईश्वर और ब्रह्मांड के आशीर्वाद को अनुभव कीजिए, और सदैव आगे बढ़ते रहिए। प्रेरणा जहाँ से भी मिले, उसे स्वीकार कीजिए और अपने जीवन को प्रेम, भक्ति और सकारात्मकता से भर दीजिए।
अंततः, मेरा यही मानना है कि जब हमारा मन, हमारी लेखनी और हमारे संस्कार एक सकारात्मक दिशा में चलते हैं, तब हम न केवल अपने जीवन को, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों को भी एक सुंदर दिशा दे पाते हैं।
✍🏻 वार्ता : डाॅ श्रीमती ईशा भारद्वाज
कल्प भेंटवार्ता में आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं साहित्याकाश में ध्वजारोहण कर चुकी वरिष्ठ कवयित्री डाॅ. श्रीमती ईशा भारद्वाज जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇
https://www.youtube.com/live/gh5ZIYxutUg?si=eGRTK6Er79f-qIPz
इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये।
राधे राधे 🙏 🪷 🙏
✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️
✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी
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