!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण” !!
विद्यार्थीयों का मार्गदर्शन करना संस्कार और अच्छे साहित्य को पढ़ने के लिए पुस्तक से ज्ञान अर्जित करो तभी आप एक अच्छे मानव बन सकते हो। ये उद्देश्य हमारा रहा है।
✍🏻 श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण”
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती सराेज सिंह “सूरज” !!
प्रकृति से प्रेम और सौंदर्यबोध, परिष्कृत साहित्यिक भाषा, करुणा और राष्ट्र प्रेम इन्हीं महान लेखकों की रचनाएँ पढ़ कर ही विकसित हुए हैं। जो हमारी लेखनी में उतरे हैं हम उन लेखकों की बराबरी तो नहीं कर सकते लेकिन उनका प्रभाव अवश्य है।
✍🏻 श्रीमती सरोज सिंह “सूरज”
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती श्रीमती नीरजा “नीरू” !!
यदि मुझे अपनी साहित्यिक यात्रा को एक शब्द में व्यक्त करना होगा तो वो है “नदी” यदि “नदी” शब्द को लिया जाए, तो मेरी साहित्यिक यात्रा की अभिव्यक्ति को एक बेहद खूबसूरत, गतिशील और गहरा आयाम मिलता है। इस यात्रा को “नदी” के रूप में देखने के मुख्य कारण हैं पहला निरंतर प्रवाह:नदी कभी रुकती नहीं है, वह हमेशा आगे बढ़ती रहती है। इसी तरह, मेरी भाषाई और साहित्यिक यात्रा भी निरंतर गतिशील है।
✍🏻 श्रीमती नीरजा “नीरू”
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मीप्रिया” !!
कला और शब्द केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं बल्कि समाज के उत्थान और आत्म-परिष्कार का माध्यम हैं। अपनी संस्कृति और संस्कार के प्रति समर्पण, मानवता की सेवा, अनुभूतियों का विस्तार और जीवन को सत्य, प्रेम व समरसता की राह पर चलना तथा जीवन में संघर्ष करते हुए निरंतरता बनाऍं रखना ही मेरी साहित्य-साधना का सार है।
✍🏻 श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मीप्रिया”
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती प्रियंका माथुर” !!
मेरी दृष्टि से देखा जाए तो साहित्य का वास्तविक उद्देश्य पाठक की मनोस्थिति पर निर्भर करता है उसकी रूचि पर निर्भर करता है। जिन पाठकों को मनोरंजन चाहिए वे साहित्य में मनोरंजन तलाश लेते हैं और जिन्हें समाज में परिवर्तन चाहिए वे साहित्य को उसी दृष्टि से पढ़ेंगे।
✍🏻 श्रीमती प्रियंका माथुर
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री कुमार धनंजय सुमन” !!
आध्यात्मिक चेतना मेरी लेखनी को मर्यादा, करुणा और आत्मप्रकाश देती है। भारतीय संस्कृति मुझे लोकमंगल की दिशा दिखाती है। मैं धर्म को विभाजन नहीं, मानवीय मूल्यों का प्रकाश मानता हूँ। यही भाव मेरी रचनाओं में सहज रूप से उतर आता है।
✍🏻 कुमार धनंजय सुमन
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मुक्ता शर्मा” !!
स्वतंत्रता-पूर्व के साहित्य का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनमानस के भीतर राष्ट्रीय चेतना का जागरण करना व सामाजिक कुरीतियों व विसंगतियों पर प्रहार करना था। ऐसे साथ-साथ प्रकृति प्रेम भी मुख्य विषय था।
स्वतंत्रता के पश्चात का अधिकांश साहित्य विभाजन के दंश विकास के सुझावों सामाजिक समरसता व भविष्य की नवीन संभावनाओं पर आधारित था।
✍🏻 मुक्ता शर्मा
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती कल्याणी गुप्ता कृति” !!
प्रत्येक मस्तिष्क में तर्कशीलता और रचनात्मकता के दो अलग भाग होते हैं। बांया और दायां भाग इन्हें कंट्रोल करता है। यदि किसी व्यक्ति में तर्कशीलता और कल्पना इन दोनों का सामंजस्य हो जाता है तो दिमाग अधिक क्षमता से दोनों क्षेत्रों में कार्य करने लगता है।
✍🏻 कल्याणी गुप्ता “कृति”
Continue Reading
!! “कल्प भेंटवार्ता” : व्यक्तित्व परिचय : श्री रमापति मौर्य” !!
वर्तमान समय में हिंदी साहित्य के सामने बाजारवाद, तकनीकी प्रभाव और मानवीय संवेदनाओं का क्षरण जैसी चुनौतियाँ हैं। वहीं सोशल मीडिया, वैश्विक मंचों पर अनुवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ने नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं।
✍🏻 श्री रमापति मौर्य जी
Continue Reading
!! “व्यक्तित्व परिचय : कल्प भेंटवार्ता : श्रीमती रश्मि पांडे”शुभि” !!
पहले नारी आदर्श, त्याग या फिर अबला के रूप को लेकर लेखन किया जाता था। परन्तु अब परिस्थितियाँ बदल गईं है। आज महिलाएँ अपने अनुभव, सुख दुःख, संघर्ष को अपनी रचनाओं में समाहित कर रही हैं। रूढ़िवादी मान्यताओं पर तीखे प्रहार करती हैं। अब नारी को सिर्फ पत्नी या माँ के रूप में नहीं अपितु एक स्वतंत्र नागरिक, आत्मनिर्भर के रूप में भी चित्रण किया जा रहा है।
✍🏻 श्रीमती रश्मि पाण्डेय “शुभि”
Continue Reading