!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती चन्द्रा नेमा” !!
आज के परिवेश में सब प्रकार की रचनाकार है किसी की रचना मर्मस्पर्शी हृदय को छू जाती है किसी की रचना में सिर्फ शब्दों का जोड़-तोड़ होता है मैं तुकबंदी की पक्षी घर नहीं हूं सबकी अपनी-अपनी सोच है मर्म स्पर्शी रचनाएं होनी चाहिए किंतु फिर भी हिंदी हिंदू और हिंदुस्तानी से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।
✍🏻 श्रीमती चन्द्रा नेमा
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय – श्रीमती पूजा अग्रवाल” !!
“मुझे सृजनात्मक कार्यों में विशेष आनंद मिलता है। कला और शिल्प के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करना, तथा अपने उद्यम के माध्यम से लोगों के जीवन में सुंदरता जोड़ना मेरी प्रेरणा है।
सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहकर समाज के प्रति अपना योगदान देना मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है।”
✍🏻 श्रीमती पूजा अग्रवाल
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती रंजीता सहाय अशेष” !!
मेरी एक बहुत प्यारी दोस्त है — किरण। वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है, हर पल मेरे साथ खड़ी रही। यह यात्रा उसके बिना पूरी हो ही नहीं सकती। सम्मान मिलते ही मन में आता है कि आज किरण को बताऊँगी।
✍🏻 श्रीमती रंजीता सहाय अशेष
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मणिका वर्मा !!
कविता मेरी आवाज़ भी है और मेरी आराधना भी। जब तक कहने को कुछ बाकी है, अभिव्यक्ति है। जब सब कहकर चुप हो जाती हूँ, साधना शुरू होती है। कविता लिखना मेरे लिए किसी साधना से कम नहीं है। कविताओं के माध्यम से मन को अभिव्यक्त करने के बाद मन पूरी तरह से सध जाता है और मन के भीतर का मौन मुखरित हो जाता है।
✍🏻 श्रीमती मणिका वर्मा
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!! “कल्प भेंटवार्ता : “व्यक्तित्व परिचय : डॉ. ईशा भारद्वाज” !!
तकनीक और सोशल मीडिया ने हिन्दी साहित्य को एक नया मंच दिया है। इससे लेखकों को अपनी रचनाएँ व्यापक स्तर पर साझा करने का अवसर मिला है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी एक नया आयाम जोड़ रही है, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ ही साहित्य की आत्मा हैं।
✍🏻 डाॅ. ईशा भारद्वाज
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : ज्योतिषाचार्य पं. श्री जितेंद्र शास्त्री !!
ज्योतिष के क्षेत्र में भी मेरी शुरुआत जिज्ञासा से हुई, जो धीरे-धीरे साधना में परिवर्तित हो गई। मैंने अनुभव किया कि ज्योतिष केवल गणना या भविष्य बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ हमारे पास आते हैं। यहाँ मैंने स्पष्टता, उत्तरदायित्व और नैतिक दृष्टिकोण का महत्व समझा।
✍🏻 पं. श्री जितेन्द्र शास्त्री
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!! कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : एक संध्या साहित्यकार श्री सूर्यपाल नामदेव “चंचल” जी के साथ !!
सृष्टि का उद्गम ही नारी अस्तित्व पर आधारित है। नारीहीन समाज की परिकल्पना आधारहीन है। दूसरा पक्ष यह भी है कि इसी समाज में नारी शोषण समानांतर विद्यमान है। मानव समाज पाषाण युग से आधुनिक युग को प्राप्त कर चुका है। प्रचंड विकासशील युग में आज भी नारी पूर्णतः स्वतंत्रता को प्राप्त करने में सहज नहीं जान पड़ती।
✍🏻 श्री सूर्यपाल नामदेव “चंचल”
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!! “कल्प भेंटवार्ता” – आदरणीय अमित पंडा जी के साथ !!
ऐसे समय में कलम की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कलम को “छन्नी” बनना होगा—जो अच्छाइयों को ग्रहण करे और बुराइयों को छानकर अलग कर दे। यदि हम ऐसा कर पाए, तो हमारा समाज आधुनिक भी रहेगा और सुसंस्कृत भी।
✍🏻 अमित पंडा “अमिट रोशनाई”
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!! कल्प भेंटवार्ता : श्री प्रदीप मिश्रा “अजनबी” जी के साथ !!
हमारा मानना है कि सामान्यतः साहित्य, समाज को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। मार्गदर्शक की भूमिका में तो कोई कोई प्रबुद्ध लेखक अपने नवोन्मेषी विचारों से हो जाता है और ऐसे लेखक का लेखन साहित्य होना आवश्यक नहीं है।
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!! व्यक्तित्व परिचय : कल्प भेंटवार्ता :एक संध्या साहित्यकार के साथ : श्रीमती सीमा शर्मा “मंजरी” !!
काव्य के क्षेत्र में एक क्रांति अवश्य आई है। करोना काल उसका साक्षी है। नारी शक्ति ने अपनी लेखनी के द्वारा एक पहचान बनाई है। स्त्री विमर्श से नारी अभिव्यक्ति के सशक्तिकरण का एक युग शुरु हुआ है। पर इसके साथ साथ स्वाभाविक नारीत्व और संस्कार के स्तर का क्षय भी हुआ है। जिसको संभालना हम नारियों की ही जिम्मेदारी है। हमें सशक्त होना है ना कि पुरुष का प्रतिद्वन्दी।
✍🏻 सीमा शर्मा “मंजरी”
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