!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : डॉ. अर्चना मिश्रा” !!
- कल्प भेंटवार्ता
- 03/10/2026
- लेख
- साक्षात्कार
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : डॉ. अर्चना मिश्रा” !!
!! “मेरा परिचय” !!
नाम :- डॉ. अर्चना मिश्रा
माता/पिता का नाम :- स्वर्गीय राजेश्वरी दीक्षित / श्री G. C. Dixit
जन्म स्थान :- ग्वालियर
पति का नाम :- डॉ. पी. के. मिश्रा
बच्चों के नाम :- प्रिशा, वर्चस्व
शिक्षा :- BHMS (होम्योपैथी), M.Phil. (माइक्रोबायोलॉजी), B.Ed.
व्यवसाय :- चिकित्सक — होम्योपैथी प्रैक्टिस
वर्तमान निवास :- प्रयागराज
ई-मेल :- drarchanamishra873@gmail.com
!! “मेरी साहित्यिक यात्रा” !!
साहित्यिक यात्रा :- वर्ष 2020 से लेखन प्रारंभ किया। शुरुआत फेसबुक पर अपनी रचनाएँ साझा करने से हुई। इसके बाद इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के माध्यम से रचनालय में साहित्यिक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर मिला। आकाशवाणी प्रयाग, लखनऊ दूरदर्शन और आजतक पर भी कार्यक्रम प्रस्तुत किए। दिल्ली में आयोजित ओपन माइक कार्यक्रमों में भी निरंतर सहभागिता रहती है।
प्रकाशित कृति :- ‘अंतर्नाद’ — Amazon एवं Flipkart पर उपलब्ध।
साझा संकलन :- ‘अभ्युदय’, ‘इंकलाब भारत’, ‘नवउदय’ आदि।
आगामी कृति :- ‘घर ही तो हैं’
!! “सम्मान एवं उपलब्धियाँ” !!
नारी रत्न सम्मान — अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
नवउदय सम्मान
इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन सम्मान-पत्र
साहित्य सेवा सम्मान-पत्र
मांडा पब्लिकेशन प्रशंसा-पत्र
हिन्दीवामा सम्मान-पत्र
!! “सामाजिक सरोकार” !!
अथर्वन फाउंडेशन में एग्जीक्यूटिव पद पर कार्यरत। संस्था का उद्देश्य प्रकृति को हरा-भरा बनाना तथा प्लास्टिक उत्पादों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
!! “मेरी पसंद” !!
उत्सव :- दीपावली
भोजन :- उत्तर भारतीय
रंग :- हरा
परिधान :- साड़ी
स्थान :- पूर्वोत्तर भारत
लेखक/लेखिका :- मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा
खेल :- क्रिकेट
धारावाहिक :- कसौटी ज़िंदगी की, बालिका वधू, रामायण
फिल्में :- पड़ोसन, 3 Idiots
संगीत :- भजन एवं प्रेरणादायक गीत
!! “मेरे व्यक्तित्व की झलक” !!
जीवन का मूल मंत्र :- स्वयं को पहचानना, अपनी शक्ति को समझना और जीवन को सार्थक बनाना।
प्रिय व्यक्तित्व :- मेरे पति डॉ. पी. के. मिश्रा, जो हर समय मेरे साथ रहते हैं और मेरे छोटे-बड़े कार्यों में सहयोग करते हैं।
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि :- नारी रत्न सम्मान
जीवन से मिली सीख :- जीवन अमूल्य है; इसलिए जीवन में जितना सार्थक कार्य कर सकें, उतना बेहतर है।
सामाजिक कार्य :- पर्यावरण संरक्षण एवं प्लास्टिक उत्पादों के प्रति जागरूकता के लिए कार्य।
भविष्य के स्वप्न एवं संकल्प :- अधिक से अधिक अच्छी पुस्तकें पढ़ना और सामाजिक कार्यों में सक्रिय सहभागिता करना।
!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : डॉ. अर्चना मिश्रा जी के उत्तर !!
प्रश्न १ — ग्वालियर से प्रयागराज तक की आपकी जीवन-यात्रा ने आपके व्यक्तित्व और विचारों को किस प्रकार आकार दिया?
अर्चना जी :- ग्वालियर से प्रयागराज के बीच सफ़र में दो शहर और हैं जो मेरे जीवन का ठहराव हैं जबलपुर और लखनऊ । जबलपुर जहां मेरी शिक्षा हुई।और लखनउ जहां शादी हुई।एक शहर से दूसरे शहर का परिवेश, परिस्थित अलग होती हैं जो सीखने सोचने कर दायरा बढ़ा देती हैं। ग्वालियर ने मेरे व्यक्तित्व की नींव रखी जबलपुर बौद्धिक स्तर को बढ़ाया तो प्रयाग ने व्यवहारिक, आध्यात्मिक रूप से संवृद्ध किया। कहा जाय तो प्रयाग जो कि साहित्य का प्रमुख केंद्र हैं मेरे पठन पाठन को नई दिशा दी जिससे मेरे विचारों में चेतना आई।
प्रश्न २ — आप चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ी हैं। एक चिकित्सक और साहित्यकार—इन दोनों भूमिकाओं का आपके जीवन में कैसा सुंदर समन्वय रहा है?
अर्चना जी :- चिकित्सा और साहित्य दोनों मानव जीवन से जुड़े हुए हैं ये दोनों क्षेत्र मानव संवेदना और सुख दुःख से जुड़े हैं डॉक्टर के रूप में जहां शारीरिक कष्ट का निवारण का अवसर है हैं तो वही लेखन मन की भावनाओं और मानवीय संवेदना हैं संवेदनाओं को शब्दों के माध्यम से से व्यक्त करना। अपनी बात को बखूबी रखना सिखाता हैं मेरी पाठ्य का मूलमंत्र भी संवेदनाओं से प्रेरित ही चेतन मन मरीज की भावनात्मक स्थिति को समझता है चिकित्सा का क्षेत्र बहुत व्यस्त तनाव और धैर्य भरा हैं और साहित्य मन विचार को सशक्त करता है।
प्रश्न ३ — आपने वर्ष 2020 में लेखन प्रारंभ किया। वह कौन-सा भाव या अनुभव था, जिसने पहली बार आपको कलम उठाने के लिए प्रेरित किया?
अर्चना जी :- वर्ष 2020 कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा था सभी घरों में अकेले स्वयं में थे। हर समय डर मेरे husband की करोना में ड्यूटी।इस दौरान सिर्फ मन की भावनाओं उथल पुथल करती थी कल क्या होगा दूसरे से बात करने के लिए digital माध्यम। पहली बार लिखने के लिए लोग कलम उठाते है मैने उंगलियों का इस्तेमाल किया विचारों को दोस्तों के साथ साझा किया और digital ही मेरी भावनाओं को प्रकट करने के लिए सकारात्मक और सशक्त माध्यम बना।
प्रश्न ४ — फेसबुक से शुरू हुई आपकी साहित्यिक यात्रा रचनालय, आकाशवाणी प्रयाग, लखनऊ दूरदर्शन और आजतक जैसे मंचों तक पहुँची। इस सफर का कौन-सा पड़ाव आपके लिए विशेष रहा और क्यों?
अर्चना जी :- फेसबुक से प्रतिष्ठित मंच तक का सफर बड़ा ही रोचक और शानदार रहा हर पड़ाव पर कुछ न कुछ सीखने मिला। कई साहित्य से जुड़े लोगो से मिलना संभव हुआ। साहित्यिक विधाओं का पता चला।
और सच कहे तो आत्मविश्वास में दिन पर दिन बढ़ोतरी हुई। स्वयं पर भरोसा बढ़ता गया।
प्रश्न ५ — आपकी पहली प्रकाशित कृति ‘अंतर्नाद’ है। इस शीर्षक के पीछे छिपे भाव और आपकी रचना-यात्रा से इसका क्या संबंध है?
अर्चना जी :- अंतर्नाद का मूल अर्थ अंतः और नाद हैं जिसका मतलब अंदर की आवाज है । यह मेरी पहली कृति हैं जिसमें मैने इकलौती संतान की वेदना लिखी हैं एवं उसका सामाजिक दायरा कितना सीमित हो जाता। तो ये मेरे अंतर्मन की आवाज थी जो मैने लिखा और शब्दों में समाहित किया।
प्रश्न ६ — आपकी पसंदीदा लेखिकाओं में महादेवी वर्मा और लेखक मैथिलीशरण गुप्त शामिल हैं। इन साहित्यकारों से आपकी लेखनी ने क्या ग्रहण किया है?
अर्चना जी :- राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी की यशोधरा काव्य “सखी वो मुझसे कह कर जाते” ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया उनका लिखा मुझे बहुत पसंद हैं। और महादेवी वर्मा जी की रचनाओं में गहरी संवेदना करुणा और जीव जंतु के प्रति आत्मीय भाव था। जिसमें गिलहरी बहुत प्रेरित करती हैं।
प्रश्न ७ — आप ओपन माइक जैसे मंचों पर भी लगातार सहभागिता करती हैं। मंचीय प्रस्तुति और पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने में आपको क्या अंतर महसूस होता है?
अर्चना जी :- ओपन माइक में वक्ता और श्रोता आमने सामने होते हैं वक्ता का भाव आवाज श्रोता के समक्ष होता है जबकि बुक में ऐसा नहीं हैं इसमें श्रोता की तालिया सराहना की प्रतिक्रिया सामने होती हैं जो एक ऊर्जा देती हैं इसका समय स्थान निर्धारित होता हैं जबकि बुक पाठक का अनुभव उसकी चॉइस पर है लेकिन पुस्तक लंबे समय तक अपना प्रभाव रखती है। प्रतिक्रिया भी देर से आती है पर स्थाई होती हैं। बुक पीढ़ी दर पीढ़ी चलती हैं ईवन सदियों..!!!!!
प्रश्न ८ — आपको ‘नारी रत्न सम्मान’ सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें से कौन-सा सम्मान आपके लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है और क्यों?
अर्चना जी :- सभी सम्मान अहम भूमिका रखते है लेकिन दिल्ली में मिला नारी रत्न अवार्ड मिलने पर खुशी हुई।
प्रश्न ९ — आपने जीवन का मूल मंत्र स्वयं को पहचानना और अपनी आंतरिक शक्ति को समझना बताया है। यह विचार आपके जीवन और लेखन में किस रूप में दिखाई देता है?
अर्चना जी :- इस अवस्था तक आते आते यही हैं हैं कि हम स्वयं में पूर्ण है ईश्वर के द्वारा बनाई वो कृति जो सोच से परे हैं इसलिए मेरा मानना तो यही हैं खुद को पहचाने। अहंकार से परे रहे जितना जीवन में चेतना है उसका भरपूर उपयोग करे सामाजिक स्तर पर।
प्रश्न १० — आपके अनुसार जीवन अमूल्य है। इस विचार ने आपके जीवन के निर्णयों और आपके कार्यों को किस प्रकार प्रभावित किया है?
अर्चना जी :- जीवन अमूल्य हैं। इसको सकारात्मक रूप से सही दिशा में ले जाय। सबसे पहले अपने स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें यही आपकी वास्तविक पूंजी हैं।
समय का सदुपयोय करे। समय में ठहराव नहीं है
अपने आप को प्रकृति से जोड़े रखे।
जीव जंतु, मानव के प्रति करुणा दया का भाव जीवन में रखे।
प्रश्न ११ — आप अथर्वन फाउंडेशन से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक के प्रति जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। साहित्य और सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर चलना कितना आवश्यक है?
अर्चना जी :- साहित्य और समाज दोनो एक दूसरे के पूरक हैं साहित्य समाज को दर्पण दिखाता हैं तथा सही दिशा प्रदान करता हैं। साहित्य जागरूक करने में मदद करता हैं
जन चेतना को हृदय तक उतारता है। सामाजिक तौर पर लोगो में परिवर्तन ला सकता हैं। प्लास्टिक जैसे दुष्प्रभाव को बताने में मदद करता हैं प्रकृत्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहे। एवम् संरक्षित रहे।atharwan foundation लगातार इसके लिए प्रयासरत हैं और दिन पर दिन जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं जो समाज और राष्ट्र के हित में है।
प्रश्न १२ — एक महिला, चिकित्सक, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में आपकी अलग-अलग भूमिकाओं ने आपको जीवन के कौन-से अनुभव दिए, जिन्हें आप अपनी रचनाओं में उतारती हैं?
अर्चना जी :- एक महिला चिकित्सक के दृष्टि से लोगों की शारीरिक पीड़ा, महिलाओं की सहज समस्या, देखते ही पता लग जाता हैं ये ठीक नहीं इसका vital force disturb हैं उसकी वेदना जो समझ सकती हु
सामाजिक रूप से समाज में स्थिति
समाज के दर्द। और प्रकृति तो अलग ही subject है जिस पर कोई भी गर्व कर सकता हैं ओर अपनी चेतना को जागृत कर सकता हैं
✍🏻 वार्ता : डाॅ. अर्चना मिश्रा
कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं प्रयागराज, उप्र की विदुषी कवयित्री डॉ. अर्चना मिश्रा जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇
https://www.youtube.com/live/SlLfybltO_Q?si=O5eMN3xq-jCYC903
इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये।
राधे राधे 🙏 🪷 🙏
✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️
✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी
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