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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : वसुन्धरा रजक !!

!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : वसुन्धरा रजक !! 

 

 !! “मेरा परिचय” !! 

 

नाम :- वसुंधरा कुमारी

 

माता/पिता का नाम :- श्री गुलाब शंकर

 

जन्म स्थान :- प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

 

शिक्षा :- बी.एससी.

 

व्यवसाय :- कवयित्री, लेखिका एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाकार

 

वर्तमान निवास :- प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

 

ई-मेल :- vasur3298@gmail.com

 

 

 

 !! मेरी साहित्यिक यात्रा !! 

 

साहित्यिक यात्रा :-

वसुंधरा कुमारी हिंदी की कवयित्री एवं लेखिका हैं। पिछले लगभग चार वर्षों से साहित्य-सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, स्त्री-सशक्तिकरण, ग्रामीण महिलाओं की स्वास्थ्य-जागरूकता, सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव, पर्यावरण, शिक्षा, नदियों तथा मानवीय संवेदनाओं जैसे विषय प्रमुखता से उभरते हैं। उनकी लेखनी समाज के उन वर्गों की आवाज़ बनने का प्रयास करती है, जिनकी समस्याएँ अक्सर मुख्यधारा से दूर रह जाती हैं।

 

प्रकाशित कृतियाँ :-

• अधूरे सपने — हिंदी काव्य-कृति, 2023

• विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं साहित्यिक मंचों पर कविताएँ एवं रचनाएँ प्रकाशित/प्रस्तुत।

 

साझा संकलन :-

• शब्दों की महक

• काव्यलेख

• शब्द प्रवाह

• नव उदय

• कविता कानन

• अन्य साझा साहित्यिक संकलन

 

आगामी कृति :-

• नदियों की पुकार

• अधूरी उम्मीदें

• पुरुष का दर्द

• 21वीं सदी की निर्मला

• नीम-सी भावनाएँ

 

 

 

 !! सम्मान एवं उपलब्धियाँ !! 

 

• नव उदय साहित्य सम्मान

• भारत भाग्य विधाता स्मारिका सम्मान 2024

• कल्प कथा साहित्य सम्मान

• डॉ. आंबेडकर उत्थान परिषद पंचम सर्व समाज नारी गौरव सम्मान 2025

• प्रेरणा राष्ट्रभाषा सम्मान 2025

• दिल्ली इंटरनेशनल नारी रत्न सम्मान 2026

• मंडा प्रकाशन सम्मान, दिल्ली

• बुक क्लिनिक साहित्य सम्मान

• दूरदर्शन पर साहित्यिक प्रस्तुति/उपस्थिति

 

 

 

 !! सामाजिक सरोकार !! 

 

सामाजिक कार्य/दायित्व :-

ग्रामीण महिलाओं में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति जागरूकता, बालिकाओं की शिक्षा, दिव्यांग बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण, नदी एवं जल-संरक्षण, सामाजिक समानता तथा युवाओं को रचनात्मक दिशा देने जैसे विषयों पर साहित्य और सामाजिक पहल के माध्यम से कार्य करने का प्रयास।

 

 

 

 !! मेरी पसंद !! 

 

उत्सव :- दीपावली

भोजन :- दाल चावल

रंग :- सावली 

परिधान :- भारतीय पारंपरिक परिधान

स्थान :- प्रकृति के निकट शांत एवं साहित्यिक वातावरण

लेखक/लेखिका :- मुंशी प्रेमचन्द 

खेल :- खो – खो

धारावाहिक :- गांगा माई को बेटियां 

फिल्में :- board 2

संगीत :- मधुर एवं भावपूर्ण संगीत

 

 !! मेरे व्यक्तित्व की झलक !! 

 

जीवन का मूल मंत्र :-

“संघर्ष चाहे जितना हो, अपने सपनों और संवेदनाओं को मरने नहीं देना चाहिए।”

 

प्रिय व्यक्तित्व :- राधा दीदी

 

जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि :-

अपनी संवेदनाओं और विचारों को शब्द देकर समाज के सामने रखने का अवसर मिलना तथा साहित्य के माध्यम से लोगों तक पहुँचना।

 

जीवन से मिली सीख :-

“परिस्थितियाँ मनुष्य की राह कठिन कर सकती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प, निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास मंज़िल का रास्ता खोल देते हैं।”

 

सामाजिक कार्य :-

साहित्य के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं वंचित वर्गों की समस्याओं को आवाज़ देना।

 

भविष्य के स्वप्न एवं संकल्प :-

ऐसा साहित्य रचना जो समाज की वास्तविक समस्याओं को सामने लाए और लोगों में संवेदना, जागरूकता तथा सकारात्मक परिवर्तन की भावना पैदा करे। साथ ही “सृष्टि कल्याण” के माध्यम से शिक्षा, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, दिव्यांग बच्चों और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने का संकल्प।

 

 

 

 

!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : वसुन्धरा रजक जी के उत्तर !! 

 

प्रश्न १. प्रयागराज जैसी साहित्यिक और सांस्कृतिक धरती पर जन्म और पालन-पोषण ने आपके व्यक्तित्व और आपकी रचनात्मक सोच को किस प्रकार प्रभावित किया?

 

वसुन्धरा जी :- 

प्रयागराज की साहित्यिक और सांस्कृतिक भूमि ने मेरे व्यक्तित्व को बहुत गहराई से प्रभावित किया है। यहाँ की साहित्यिक परंपरा, गंगा-यमुना की संस्कृति और आसपास का ग्रामीण जीवन मेरे अनुभवों का हिस्सा रहे हैं। मैंने अपने आसपास लोगों के संघर्ष, सामाजिक असमानता और ग्रामीण महिलाओं की समस्याओं को देखा है। इन्हीं अनुभवों ने मेरी संवेदनशीलता को आकार दिया और मेरी रचनात्मक सोच को समाज से जोड़ दिया।

 

 

 

प्रश्न २. आपने बी.एससी. की शिक्षा प्राप्त की और फिर साहित्य को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। विज्ञान और साहित्य के इस समन्वय ने आपकी सोच को किस प्रकार विस्तार दिया?

 

वसुन्धरा जी :- 

विज्ञान ने मुझे तर्क, तथ्य और चीजों को गहराई से देखने की दृष्टि दी, जबकि साहित्य ने मुझे उन्हीं चीजों को मानवीय संवेदना के साथ समझना सिखाया। मेरे लिए विज्ञान और साहित्य दो अलग दिशाएँ नहीं हैं। विज्ञान समस्या को समझने की दृष्टि देता है और साहित्य उस समस्या से जुड़े मानवीय भावों को व्यक्त करने का माध्यम बनता है। इस समन्वय ने मेरी सोच को अधिक व्यापक बनाया है।

 

 

 

प्रश्न ३. आपने लगभग चार वर्ष पूर्व साहित्य-सृजन की शुरुआत की। वह कौन-सा भाव, अनुभव या प्रेरणा थी, जिसने पहली बार आपको कलम उठाने के लिए प्रेरित किया?

 

वसुन्धरा जी :- 

मेरे लिए लेखन की शुरुआत किसी एक घटना से नहीं हुई। आसपास के जीवन को देखते हुए मन में अनेक भाव और प्रश्न पैदा होते थे। लोगों का संघर्ष, महिलाओं की परिस्थितियाँ, अधूरे सपने और समाज की असमानताएँ मुझे भीतर से प्रभावित करती थीं। मुझे लगा कि इन भावनाओं को अपने भीतर रखने के बजाय शब्द देना चाहिए। इसी सोच ने मुझे पहली बार कलम उठाने के लिए प्रेरित किया।

 

 

 

प्रश्न ४. आपकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, स्त्री-सशक्तिकरण और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं। इन विषयों से आपका विशेष जुड़ाव किस प्रकार बना?

 

वसुन्धरा जी :- 

इन विषयों से मेरा जुड़ाव अपने आसपास के जीवन को करीब से देखने के कारण बना। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, जागरूकता और आत्मनिर्भरता से जुड़ी कई चुनौतियाँ हैं। मैंने महसूस किया कि इन विषयों पर केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि संवेदनशील लेखन भी जरूरी है। इसलिए मेरी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, स्त्री और मानवीय संवेदनाएँ स्वाभाविक रूप से आती हैं।

 

 

 

प्रश्न ५. आपकी पहली काव्य-कृति ‘अधूरे सपने’ वर्ष 2023 में प्रकाशित हुई। इस कृति के शीर्षक और रचनाओं के पीछे कौन-सी भावभूमि रही?

 

वसुन्धरा जी :-

‘अधूरे सपने’ मेरे लिए बहुत भावनात्मक कृति है। इसके पीछे उन लोगों के सपनों की भावभूमि है जो परिस्थितियों, आर्थिक कठिनाइयों या सामाजिक बंधनों के कारण पूरे नहीं हो पाते। मैंने उन सपनों की पीड़ा को शब्द देने की कोशिश की है। लेकिन मेरे लिए अधूरा सपना केवल निराशा नहीं है, बल्कि दोबारा प्रयास करने और आगे बढ़ने की उम्मीद भी है।

 

 

 

प्रश्न ६. आपकी लेखनी सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर विषयों को भी स्वर देती है। एक रचनाकार के रूप में इन विषयों को उठाना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा?

 

वसुन्धरा जी :-

ये बहुत संवेदनशील विषय हैं, इसलिए इनके बारे में लिखते समय जिम्मेदारी का ध्यान रखना पड़ता है। मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय को दोष देना नहीं, बल्कि असमानता और भेदभाव से जुड़ी मानवीय पीड़ा को सामने लाना है। मेरा मानना है कि साहित्य समाज को आईना दिखाने के साथ-साथ हमें दूसरे मनुष्य की पीड़ा समझने की संवेदना भी दे सकता है। इसी भावना से मैं इन विषयों को अपनी लेखनी में स्थान देती हूँ।

 

 

 

प्रश्न ७. आपकी आगामी कृतियों में ‘नदियों की पुकार’, ‘अधूरी उम्मीदें’ और ‘21वीं सदी की निर्मला’ जैसे अलग-अलग विषय दिखाई देते हैं। इन रचनाओं के माध्यम से आप पाठकों तक कौन-से विचार और प्रश्न पहुँचाना चाहती हैं?

 

वसुन्धरा जी :-

इन तीनों रचनाओं के विषय अलग हैं, लेकिन इनके केंद्र में समाज और मनुष्य हैं। ‘नदियों की पुकार’ के माध्यम से मैं नदियों, जल और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को सामने रखना चाहती हूँ। ‘अधूरी उम्मीदें’ अधूरे सपनों और संघर्षों की बात करती है। ‘21वीं सदी की निर्मला’ के माध्यम से मैं आज की स्त्री की परिस्थितियों, अधिकारों और सामाजिक प्रश्नों पर विचार करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि मेरी रचनाएँ पाठक को कुछ जरूरी प्रश्नों पर सोचने के लिए प्रेरित करें।

 

 

 

प्रश्न ८. आपकी रचनाएँ ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य, बालिका शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक समानता जैसे विषयों से जुड़ी हैं। क्या आपके लिए साहित्य केवल अभिव्यक्ति है या सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी?

 

वसुन्धरा जी :-

मेरे लिए साहित्य अभिव्यक्ति भी है और सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी। मैं मानती हूँ कि एक कविता या कहानी अकेले समाज नहीं बदल सकती, लेकिन वह किसी व्यक्ति की सोच में बदलाव की शुरुआत जरूर कर सकती है। यदि मेरी रचना किसी महिला को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करे, किसी परिवार को बालिका शिक्षा के लिए प्रेरित करे या किसी युवा को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाए, तो मैं अपने लेखन को सार्थक मानूँगी।

 

 

 

प्रश्न ९. आपको ‘दिल्ली इंटरनेशनल नारी रत्न सम्मान 2026’ सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। इन सम्मानों ने आपकी साहित्यिक यात्रा को किस प्रकार प्रेरित किया?

 

वसुन्धरा जी :-

सम्मान मेरे लिए उत्साह और जिम्मेदारी दोनों लेकर आते हैं। जब किसी रचनाकार के काम को पहचान मिलती है तो आगे और बेहतर करने का विश्वास बढ़ता है। मेरे लिए ये सम्मान मंजिल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा हैं। इनसे मुझे यह महसूस हुआ कि सामाजिक सरोकारों से जुड़ी मेरी लेखनी को पाठकों और साहित्यिक समाज तक पहुँचाने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

 

 

 

प्रश्न १०. आपने अपने जीवन का मूल मंत्र बताया है—“संघर्ष चाहे जितना हो, अपने सपनों और संवेदनाओं को मरने नहीं देना चाहिए।” यह विचार आपके जीवन और लेखन में किस रूप में दिखाई देता है?

 

वसुन्धरा जी :-

यह विचार मेरे जीवन और लेखन दोनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे अनुसार नहीं होतीं, लेकिन अपने सपनों को जीवित रखना हमारे हाथ में होता है। मेरे लेखन में संघर्ष के साथ उम्मीद दिखाई देती है। मैं मानती हूँ कि रास्ता कठिन हो सकता है, समय लग सकता है, लेकिन अगर हम अपनी संवेदनशीलता और अपने सपनों को बचाकर रखते हैं तो आगे बढ़ने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

 

 

 

प्रश्न ११. आपने समाज के उन वर्गों की आवाज़ बनने का प्रयास किया है, जिनकी समस्याएँ अक्सर मुख्यधारा से दूर रह जाती हैं। इन अनुभवों ने आपकी संवेदनशीलता और लेखनी को किस प्रकार प्रभावित किया?

 

वसुन्धरा जी :-

इन अनुभवों ने मुझे यह समझाया कि समाज में हर व्यक्ति की अपनी कहानी और अपनी पीड़ा होती है। ग्रामीण महिलाएँ, बच्चे, दिव्यांगजन और आर्थिक रूप से कमजोर लोग कई बार अपनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से सामने नहीं रख पाते। इन परिस्थितियों को समझने की कोशिश ने मेरी संवेदनशीलता को और गहरा किया है। मैं अपनी कलम के माध्यम से उनकी बात को सम्मान और संवेदना के साथ सामने रखने का प्रयास करती हूँ।

 

 

 

प्रश्न १२. पर्यावरण संरक्षण, नदियों एवं जल-संरक्षण और प्लास्टिक के प्रति जागरूकता जैसे विषयों को लेकर आपका साहित्यिक और सामाजिक सरोकार किस दिशा में आगे बढ़ रहा है?

 

वसुन्धरा जी :-

पर्यावरण मेरे लिए केवल साहित्य का विषय नहीं, बल्कि हमारे भविष्य का प्रश्न है। नदियाँ हमारे जीवन और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनका संरक्षण बहुत जरूरी है। मैं ‘नदियों की पुकार’ जैसी रचनाओं के माध्यम से इन विषयों को साहित्य में उठाना चाहती हूँ। आगे चलकर लेखन के साथ जागरूकता के छोटे-छोटे सामाजिक प्रयासों से जल-संरक्षण, स्वच्छता और प्लास्टिक के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी काम करना चाहती हूँ।

 

 

 

प्रश्न १३. आप ‘सृष्टि कल्याण’ के माध्यम से शिक्षा, महिला एवं युवा सशक्तिकरण और दिव्यांग बच्चों के लिए कार्य करने का संकल्प रखती हैं। इस पहल के पीछे आपकी मूल सोच क्या है?

 

वसुन्धरा जी :-

‘सृष्टि कल्याण’ मेरे लिए एक सामाजिक संकल्प है। मेरी इच्छा है कि शिक्षा, जागरूकता और अवसर उन लोगों तक भी पहुँचें जो किसी कारण से उनसे वंचित रह जाते हैं। मैं महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने, बच्चों और दिव्यांग बच्चों के लिए सहयोग का वातावरण बनाने तथा समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहती हूँ। अभी यह शुरुआत है, लेकिन मेरा सपना है कि आगे चलकर ‘सृष्टि कल्याण’ एक सार्थक सामाजिक पहल बने।

 

 

 

प्रश्न १४. आपके प्रिय साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद हैं। प्रेमचंद की सामाजिक दृष्टि से आपकी लेखनी ने क्या ग्रहण किया है और आज के रचनाकारों के लिए उनकी प्रासंगिकता आप किस रूप में देखती हैं?

 

वसुन्धरा जी :- 

प्रेमचंद जी मुझे इसलिए प्रिय हैं क्योंकि उन्होंने साहित्य को आम मनुष्य और समाज के वास्तविक जीवन से जोड़ा। उन्होंने ग्रामीण जीवन, गरीबी, स्त्री और सामाजिक समस्याओं को अपनी रचनाओं का हिस्सा बनाया। उनकी रचनाओं से मुझे यह प्रेरणा मिलती है कि साहित्य समाज से जुड़ा होना चाहिए। आज भी हमारे आसपास अनेक सामाजिक प्रश्न हैं, इसलिए प्रेमचंद की दृष्टि आज के रचनाकारों के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।

 

 

 

प्रश्न १५. अंत में, वसुंधरा जी, आने वाले समय में साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में किन नए सपनों को साकार करना चाहती हैं और हमारे श्रोताओं तथा नवोदित रचनाकारों को क्या संदेश देना चाहेंगी?

 

वसुन्धरा जी :-  

आने वाले समय में मैं साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत करना चाहती हूँ और ऐसी रचनाएँ लिखना चाहती हूँ जो समाज के जरूरी प्रश्नों को सामने लाएँ। अपनी आगामी कृतियों को पूरा करने के साथ मैं ‘सृष्टि कल्याण’ के माध्यम से शिक्षा, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, दिव्यांग बच्चों और पर्यावरण के क्षेत्र में भी काम करना चाहती हूँ।

 

नवोदित रचनाकारों से मैं कहना चाहूँगी कि अपनी आवाज़ को पहचानें और अपनी परिस्थितियों से हार न मानें। लेखन केवल प्रसिद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और मनुष्य को समझने का माध्यम भी है। इसलिए ईमानदारी से लिखिए, लगातार सीखते रहिए और अपने सपनों को जीवित रखिए। संघर्ष चाहे जितना हो, अपने सपनों और संवेदनाओं को मरने नहीं देना चाहिए।

 

 

✍🏻 वार्ता : वसुन्धरा रजक 

 

 

 

कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय नवोदित साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं प्रयागराज, उप्र की विदुषी लेखिका वसुन्धरा रजक जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇

 

 

https://www.youtube.com/live/REEBkkRfhuo?si=NLmSe442r8-Qhb8U

 

 

इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी। 

 

मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये। 

राधे राधे 🙏 🪷 🙏 

 

✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️ 

 

✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन 

 

🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी 

 

कल्प भेंटवार्ता

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