!! “कल्प भेंटवार्ता” – श्रीमती एकता सिंह जी के साथ !!
- कल्प भेंटवार्ता
- 19/02/2026
- लेख
- साक्षात्कार
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🌺 !! “कल्प भेंटवार्ता” – श्रीमती एकता सिंह जी के साथ !! 🌺
!! “व्यक्तित्व परिचय” !!
!! “मेरा परिचय” !!
नाम :- श्रीमती एकता सिंह जी, पश्चिम विहार (दिल्ली)
माता-मंजू चौहान
पिता का नाम :-नरेंद्र पाल चौहान
जन्म स्थान-उत्तरप्रदेश
एवं जन्म तिथि :- 29/05/77
पति-सतेंदर पाल सिंह
बच्चों के नाम :-
बेटी-मानवी सिंह
बेटा-वेदांत सिंह
शिक्षा :-एम.मनोविज्ञान और हिंदी
व्यावसाय :- शिक्षिका
वर्तमान निवास :-दिल्ली(पश्चिम विहार)
आपकी मेल आई डी :-
ektasingh 19971977@gmail.com
आपकी कृतियाँ :-
पहला ख़त,माँ का आँचल,दर्दे ए इश्क़,संस्कार,प्रेम जाल,कसौटी जिंदगी की,मंगलसूत्र,दुख का अधिकार,नई उम्मीद,फूलवाला,दर्द का रिश्ता,टूटा पेड़,समाज की रेखा,दिल तो पागल है,
आपकी विशिष्ट कृतियाँ :-ससकती रातें-14000 लोगो ने पढ़ा।
प्रेम जाल-4000 लोगो ने पढ़ा।
आपकी प्रकाशित कृतियाँ :-मेरा कहनियो का संग्रह—३३ कहानियाँ प्रकाशित “पहला कदम” (२१ दिसंबर २५)लोकार्पण
साँझा संग्रह में कहानियाँ और कविताएँ प्रकाशित होती रहती हैं।
पुरूस्कार एवं विशिष्ट स्थान :-
टेनन्यूज़.इन,रश्मिरथी,रेडियो नोएडा एफएम 10.74,नारायणी अकादमी,बज़्म ए राब्ता,तुलसी काव्य कुंभ,ट्रू मीडिया,
– *LAJA TALKS में वक्ता*: Ekta Singh ने 20 जनवरी, 2024 को LAJA TALKS में वक्ता के रूप में भाग लिया।
– प्रेरणादायक कहानी “GEM OF INDIA” के रूप में 2022 में डॉ. शिवांगी मलेटिया द्वारा साझा की गई।
– *नेतृत्व भूमिका*: Ekta Singh जनवरी 2025 में महिला काव्य मंच की उपाध्यक्ष बनीं।
– *राष्ट्रीय प्रवक्ता*: वह कला मनस्वी मंच की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।
– *महिला सशक्तिकरण*: Ekta Singh महिला सशक्तिकरण में योगदान दे रही हैं।
– *सस्टेनेबल एग्रीकल्चर*: वह कृषि को पेस्टिसाइड-मुक्त बनाने पर काम कर रही हैं।
– *आयुर्वेदिक परामर्शदाता*: Ekta Singh पिछले पाँच वर्षों से आयुर्वेदिक परामर्शदाता हैं।
-KFL-Mrs. Timeless beauty और Mrs India 2nd Runner Up Classic 21 जून 2025 का खिताब जीता है।
!! “मेरी पसंद” !!
उत्सव :- दिवाली
भोजन :- आलू-पूरी,दही भल्ले,गुलाब जामुन
रंग :- नीला और पीला
परिधान :- साड़ी और सूट,जीन और टॉप
स्थान एवं तीर्थस्थान :- स्थान—जयपुर,उदयपुर,और गोवा
तीर्थ स्थान-जगन्नाथ मंदिर ओडिशा
लेखक/लेखिका :-
प्रेमचंद्र
कवि-हरिवंश राय बच्चन
उपन्यास-गोदान कहानी-गिल्लू
कविता-— मौत से ठन गई ठन गई!
मौत से ठन गई!
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।
खेल :-बैडमिंटन,फुटबॉल
फिल्में-वीरज़ारा ,आनंद पीकू,नीरजा धारावाहिक-वागले की दुनिया,बड़े अच्छे लगते हैं।
आपकी लिखी हुई आपकी सबसे प्रिय कृति :-इश्क़ वाला गुलाब
!! “कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : प्रबुद्ध साहित्यकार श्रीमती एकता सिंह जी के उत्तर” !!
प्रश्न 01. उत्तरप्रदेश की सांस्कृतिक धरती पर जन्म लेकर दिल्ली के बौद्धिक परिवेश तक की आपकी जीवन-यात्रा अत्यंत प्रेरक है। माता श्रीमती मंजू चौहान एवं पिता श्री नरेंद्र पाल चौहान से प्राप्त संस्कारों ने आपके व्यक्तित्व और लेखन को किस प्रकार आकार दिया?
एकता जी :- मैं ख़ुद को खुशक़िस्मत मानती हूँ कि मैंने उत्तरप्रदेश में जन्म लिया मेरे माँ और पिता दोनों आर्मी परिवार से हैं। इसी कारण शुरू से ही अनुशासित माहौल रहा। दादी और माँ की कहानी सुने बिना नींद कभी आई नहीं। इसी कारण कहानी और कविता का रिश्ता बचपन से जुड़ गया था। रिश्तों का जुड़ाव पापा ने ही सिखाया।
प्रश्न 02. एक शिक्षिका, पत्नी और माँ के रूप में आप अनेक भूमिकाएँ निभा रही हैं। पति श्री सतेंदर पाल सिंह तथा संतान मानवी सिंह और वेदांत सिंह का आपके रचनात्मक जीवन में क्या योगदान रहा है?
एकता जी :- मेरे पति सतेंद्र का हमेशा बहुत सहयोग रहा है। लेकिन मानवी और वेदांत ने मेरे जिंदगी को सार्थक बनाया है। मेरे बच्चे मेरे साथ हर क्षेत्र में ढाल बन कर साथ रहते हैं। मुझे अपने बच्चों पर गर्व है।
प्रश्न 03. परिवार, पेशा और सृजन—इन तीनों के मध्य संतुलन साधते हुए आपने अपने आत्मविश्वास और संवेदनशीलता को किस प्रकार सुरक्षित रखा?
एकता जी :- हम स्त्रियों को विशेषशक्ति जन्मजात प्राप्त होती है। उसी के कारण मैंने अपने जीवन काल में ख़ुद कभी कमज़ोर नहीं पड़ने दिया। उस ईश्वरीय शक्ति पर विश्वास कर सारे सफ़र तय करती रही।
प्रश्न 04. एकता जी, आप अनेकता में एकता के परिचायक लघु भारत नगर, द्वापरयुगीन हस्तिनापुर, देश की राजधानी दिल्ली से हैं, हम इस नगर को आपके शब्दों में देखना चाहते हैं।
एकता जी :- मेरी नज़र में दिल्ली वो जगह है जहाँ लोग आने का सपना देखते हैं जहाँ सपने जन्म लेते हैं और फिर एक दिन कड़ी धूप, मेहनत से सपने हकीकत में बदल जाते हैं। ये पंचमेल भाषाओ का नगर है यहाँ सभी जाति के लोग यहाँ रहते हैं।इस भागती-दौड़ती मेट्रो सिटी में कोई भूखा नहीं सोता। ज़िंदगी थम जाती है पर ये नगर दिन रात बिना रुके चलता रहता है।
प्रश्न 05. दीपावली आपके प्रिय उत्सवों में है। क्या इस आलोक-पर्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा आपके साहित्य में भी उजास भरती है?
एकता जी :- दीपावली पे घर में दिए रोशन करते हैं उसी तरह मैं ख़ुद को एक दिया मानती हूँ मेरी रोशनी से सब जगह प्रकाश हो।मेरी रोशनी रूपी कलम से जो लिखू वो प्रेरणा स्वरूप हो।
प्रश्न 06. आप महिला सशक्तिकरण, पेस्टिसाइड-मुक्त कृषि एवं आयुर्वेदिक परामर्श जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़ी हैं। इन सामाजिक सरोकारों का आपकी वैचारिक दृष्टि और रचनात्मकता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
एकता जी :- इस क्षेत्र से जुड़ने का मेरा उद्देश्य हर महिला का स्वावलंबी बनना है जिसके माध्यम से घर और परिवार के साथ साथ दिन कुछ घंटे काम सिख कर पैसा कमा सकती हैं। आयुर्वेदिक दवाओं प्रचार कर विदेशी दवाओं से दूर रखने की कोशिश कर रही हूँ l जहरमुक्त खेती अभियान के अंतर्गत किसानो कों आर्गेनिक खाद की जानकारी देते हैं ।जब महिलाये एक साथ मिलकर अपना योगदान देगी तो देश प्रगति अवश्य करेगा।
प्रश्न 07. जयपुर, उदयपुर और गोवा जैसे स्थानों तथा जगन्नाथ मंदिर जैसे तीर्थ से आपका आत्मिक जुड़ाव रहा है। क्या यात्राएँ आपके लेखन को नई संवेदनाएँ प्रदान करती हैं?
एकता जी :- जयपुर और उदयपुर राजाओ महाराजाओं की भूमि है। जहाँ का इतिहास बहुत पुराना है। गोवा ख़ूबसूरत जगह है जहाँ पर समुंदर की लहरें बहुत अलग कहानी कह रही होती हैं। जगन्नाथपुरी तो स्वर्ग है जहाँ साक्षात कृष्ण दर्शन होते हैं। मंदिर के कोने कोने में रहस्यमयी कहानी छुपी है
प्रश्न 08. एम. मनोविज्ञान और हिन्दी की शैक्षिक पृष्ठभूमि ने आपके कथा-साहित्य को किस प्रकार गहराई दी? लेखन की ओर आपका प्रथम कदम कब और कैसे बढ़ा?
एकता जी :- मनोविज्ञान मन की बातो का ज्ञान और भावनाओं का संतुलन सिखाया। हिंदी भाषा के माध्यम से शब्द कोष, व्याकरण और साहित्य का ज्ञान हुआ। इसी के माध्यम से मैं लेखिका,कहानीकार और कवित्री बनी। बचपन से ही मैं जो लिखती वो पन्ने बंद डायरी में ताला लगा कर छुपे रहते थे।उन्हें उजागर होने में बरसो लग गए। 2020 में वो डायरी खुल गई।और फिर वो सिलसिला मेरी एक नई पहचान बन गया।
प्रश्न 09. आपकी विशिष्ट कृतियाँ “सिसकती रातें” और “प्रेम जाल” पाठकों में चर्चित रही हैं। इन रचनाओं के मूल भाव और सामाजिक संकेतों पर प्रकाश डालना चाहेंगी?
एकता जी :- सिसकती रातें एक ऐसी सच्ची कहानी है जो कि दर्शाती है आज का युवा किस तरह से अपने संस्कार भूलते जा रहें हैं। प्रेम जाल एक उपन्यास है जो कि प्रेम की एक नई परिभाषा बताता है।
प्रश्न 10. आपकी प्रकाशित कृति “पहला कदम” में तेतीस कहानियाँ संकलित हैं। इस संग्रह की रचनाओं में कौन-सा केंद्रीय भाव या जीवन-दर्शन परिलक्षित होता है? साथ ही आपकी प्रिय रचना “इश्क़ वाला गुलाब” के भाव-संसार के विषय में भी कुछ बताइए।
एकता जी :- मेरी पहली पुस्तक “नया क़दम”अधिकतर कहानियाँ स्त्रियों पर केंद्रित है। छोटी-छोटी कहानियाँ का संग्रह है जिसमें हर कहानी एक प्रेरणा और सवाल लिए हुए है। ”इश्क़ वाला गुलाब” एक पिता और पुत्र की एक मार्मिक कहानी है। यह मैंने बहुत से मंच पर पढ़ी और सभी को बहुत ज़्यादा पसंद आई।
प्रश्न 11. आपने परंपरागत साहित्य से लेकर समकालीन मंचीय गतिविधियों तक सक्रिय भूमिका निभाई है। क्या आपको लगता है कि वर्तमान साहित्यिक परिवेश पूर्ववर्ती कालखंडों की तुलना में अधिक संवादशील हुआ है?
एकता जी :- व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर के माध्यम से लोगों तक संदेश पहुँचाने में सहायक है। जूम ऐप, गूगल मीट के माध्यम से एक जगह से दूसरे स्थान तक का सफर मिनिटों में आसानी से तय हो जाता है। २०२० के आंकड़े बताते हैं कि लाखों लोगों ने कवि और कवयित्री के रूप में अपनी भावनाएं कविता और कहानी से व्यक्त की। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग ख़ुद को जान पाये।
प्रश्न 12. मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान तथा महादेवी वर्मा की कहानी गिल्लू जैसे साहित्य से आपको क्या प्रेरणा मिली? क्या इन रचनाओं की संवेदना आपके कथालेखन में भी दिखाई देती है?
एकता जी :- मुंशी प्रेमचंद के गोदान और महादेवी वर्मा की गिल्लू कहानी, दोनों में एक समानता है, वो पशु के प्रति प्रेम की भावना है। इन बेज़ुबान जानवरों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। इन दोनों की लेखनी मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक है। इनकी लेखनी साधारण बातों को माला में पिरो देना। मेरी एक कहानी “पुलिस में शिकायत” पशु प्रेम पर आधारित है।
प्रश्न 13. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता “मौत से ठन गई” आपको विशेष प्रिय है। जीवन-संघर्ष की यह जिजीविषा आपके निजी और साहित्यिक जीवन में किस प्रकार प्रतिध्वनित होती है?
एकता जी :- “मौत से ठन गई” मेरे लिए विशेष है क्यूँकि २०२४ में मैंने परिवार से दो लोगो को एक साथ खोया। उसके बाद मौत का खेल समझ आ गया। मौत दोस्त लगने लगी। तब से मैंने जिंदगी को एसे जीना शुरू किया है जैसे हर पल, हर दिन आख़िरी दिन है मैंने इस पर एक कविता लिखी है।
प्रश्न 14. आधुनिक हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श एक महत्वपूर्ण धारा बन चुका है। एक लेखिका के रूप में आप स्त्री-अनुभवों और संवेदनाओं को किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना उचित समझती हैं?
एकता जी :- आज की स्त्री को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर होना बहुत ज़रूरी है। देश को आज़ाद हुए बरसों हो गए लेकिन स्त्रिया आज भी ग़ुलाम हैं। देश को आज़ाद मैं तब मानूँगी जब रात के अंधेरे में भी हमारी बेटिया बेख़ौफ़ निकल पायेगी।
प्रश्न 15. डिजिटल युग में साहित्य की पहुँच विस्तृत हुई है, किंतु संवेदनशीलता के क्षरण की भी चर्चा होती है। इस परिवर्तन को आप अवसर के रूप में देखती हैं या चुनौती के रूप में?
एकता जी :- समय के साथ साहित्य का रूप भी बदल रहा है। इस नए रूप को हमने स्वीकारा है।ज़िन्दगी में चुनौतियाँ को स्वीकार कर हम अपनी पहचान बना सकते हैं तभी नए-नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
प्रश्न 16. एक शिक्षिका, साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में आप युवा पीढ़ी—विशेषतः बालिकाओं—को आत्मनिर्भरता, संस्कृति और सृजनशीलता के संदर्भ में क्या संदेश देना चाहेंगी?
एकता जी :- मैं बालिकाओ को यह संदेश देना चाहूँगी कि वह पहले तो अपनी शिक्षा पूरी करें। फिर अपने पैरो पर खड़ी होकर ख़ुद को आत्मनिर्भर बनाये। एक शिक्षित बालिका ही आने वाले समय को बदल सकती है।
✍🏻 वार्ता : श्रीमती एकता सिंह
कल्प भेंटवार्ता में आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं विशिष्ट लेखिका श्रीमती एकता सिंह जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇
https://www.youtube.com/live/p6B9it_2K1o?si=9GlgaFwEdCSE45bV
इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये।
राधे राधे 🙏 🪷 🙏
✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️
✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
🦚 आयोजक : कल्प प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी
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