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!! व्यक्तित्व परिचय : बाल साहित्यकार पाखी जैन !!

🦚 !! व्यक्तित्व परिचय : बाल साहित्यकार पाखी जैन !! 🦚

 

नाम : पाखी जैन 

पिता : श्री मंगल कुमार जैन 

माता : श्रीमती अर्चना जैन 

जन्म तिथि : 22 नवम्बर, 2011

उम्र : 13 वर्ष  

विद्यार्थी : कक्षा 8

 

निवास : 1-घ-3, बीओबी के सामने 

हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, हिरण मगरी, सेक्टर 4, उदयपुर (राजस्थान) 

पिन कोड-313002

मोबाईल : 9928496264

मेल : archanajain434@gmail.com

 

  

रुचि : लेखन कार्य कविता, कहानी लिखना कविताओं की पुस्तकें पढ़ना,अभिनय, चित्रकारी ।

 

प्रकाशन : 1 शिक्षा विभाग,राजस्थान सरकार की लोकप्रिय शैक्षिक पत्रिका “शिविरा” में,ई पत्रिका प्रतिध्वनि मासिक में, लोकप्रिय 

बच्चों का देश मासिक में,

बालप्रहरी त्रैमासिक जैसी पत्रिकाओं में स्वरचित रचना प्रकाशित। 

पुरस्कार :

1.लेकसिटी जूनियर2018 अवार्ड विजेता 

3.REAL FACE of UDAIPUR 2019 participation 

4.रंग दे लेक सिटी कंपटीशन पार्टिसिपेशन 

5.बजाज कैपिटल कंपटीशन अप्रिशिएसन सर्टिफिकेट 

6 डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन उदयपुर 2017 DRAWING COMPITITION पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट 

8.ज्ञान शिक्षा संस्कार शिविर प्रमाण पत्र 

9.रेगुलर स्कूल लेवल कंपटीशन पार्टिसिपेशन एंड पोजिशन  

 10 .प्रतिध्वनि साहित्य परिवार नई दिल्ली द्वारा मातृभाषा सम्मान प्रमाण पत्र 

 

13. लोक कला मंडल द्वारा आयोजित नाट्य कार्यशाला में पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट 

14. राजस्थान साहित्य अकादमी एवं युगधारा द्वारा आयोजित युवा साहित्य महोत्सव में श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान2025 प्राप्त

15. अन्तर्राष्ट्रीय बाल कवि खोज प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त 

16. वूमेन रिकॅग्निशन अवार्ड से सम्मानित 

17. विज्ञान समिति उदयपुर द्वारा महादेवी वर्मा उदीयमान रचनाकार सम्मान 2023 से सम्मानित 

18. फास्टर भारतीय सोसायटी ईंटालीखेड़ा द्वारा साहित्य लेखन, चित्र कला,नृत्य प्रतियोगिता काव्यपाठ प्रस्तुति पर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित

18. पश्चिम सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर द्वारा नाटक में अभिनय पर सम्मानित 

19. मनसंगी राष्ट्रीय साहित्यिक सांस्कृतिक मंच की बाल पत्रिका में संकलन कार्य 

20. बाल प्रहरी त्रैमासिक पत्रिका उत्तराखंड के ऑनलाइन कार्यक्रम का 22 बार संचालन किया और शताधिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी।

21. वागड़ रेडियो 90.8 एफएम रेडियो बांसवाड़ा से काव्य पाठ की प्रस्तुति

22. कराटे खेल में ग्रीन बेल्ट प्राप्त खिलाड़ी 

23. बच्चों का देश मासिक पत्रिका के राष्ट्र स्तरीय तीन दिवसीय रजत जयंती समारोह में बाल रचनाकार के रूप में सहभागिता 

24. मनसंगी साहित्यिक समूह द्वारा प्रकाशित छ:सांझा संकलन में रचना प्रकाशित।

25. वाणी मां भारती साहित्यिक संस्था द्वारा अदिति रानी बाल साहित्यकार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित 

26. विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक समूह में समय-समय पर काव्य पाठ और रचना लेखन करने पर शताधिक प्रशंसा प्रमाण पत्र से सम्मानित

 

 

!! प्रश्नावली : “पाखी की बात” !! 

 

प्रश्न 1. पाखी बिटिया, सबसे पहले बताइए — कविता और कहानी लिखने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली? क्या कोई ऐसा पल याद है जब पहली बार आपने कुछ लिखा था?

पाखी :-

मुझे कविता लिखने की प्रेरणा अपने पापा से मिली। कोरोना के समय में जब लॉकडाउन लगा तब पापा के मित्र थे उन्होंने मेरे पापा से बात की और मुझे एक प्रतियोगिता के बारे में बताया। जिसमें अंग्रेजी में कविता लिखकर भेजनी थी। उसके बाद मैं धीरे-धीरे लिखने लगी । लेकिन संयोगवश प्रतियोगिता में भाग लेने के कारण मेरी जो पहली कविता थी सिर्फ उसे मैंने अंग्रेजी में लिखा था बाकी सारी कविताएं हमेशा से हिंदी में लिखी। मैं अपने पापा के कारण ही आज इतना लिख पा रही हूं।

 

 

प्रश्न 2. आपकी उम्र तो केवल १३ वर्ष है, लेकिन उपलब्धियाँ बहुत बड़ी हैं — क्या कभी मन में आता है कि “अब थोड़ा आराम कर लूँ”? या फिर आपकी कलम खुद ही चलने लगती है?

पाखी :-

जी नहीं, क्योंकि मैं रोज कविता नहीं लिखती हूं दो-तीन दिन में जब भी मेरे मन में कोई विचार आता है तब मैं लिखती हूं।

यह सोचकर नहीं लिखती हूं कि अब मैं कविता लिख रही हूं। ऐसा कम होता है।

जब भी कोई दिवस आता है तब ऐसा होता है और कभी-कभी किसी पंक्ति/विचार तुक मिलान पर अटक जाती हूं तब लगता है कि अब थोड़ी देर रूक जाना चाहिए ।तो मैं रूक जती हूं और एक-दो दिन बाद जब भी समय मिलता है तब फिर से वहीं से शुरू करती हूं।

 

 

प्रश्न 3. जब आपकी पहली कविता किसी पत्रिका में छपी थी, तब आपकी क्या प्रतिक्रिया थी? मम्मी-पापा ने उस खुशी के पल में क्या कहा था?

पाखी :- 

 पहली कविता बच्चों का देश मासिक पत्रिका में 2021 में प्रकाशित हुई थी।

पापा ने मम्मी से कहा कि देखो “पाखी की रचना तो प्रकाशित हो गई। हमारी तो हुई ही नहीं। अब तो पाखी बड़ी साहित्यकार बन गई है।” पापा को खुब खुशी हुई। मुझे तब समझ में नहीं आ रहा था कि पापा को इतनी खुशी क्यों हो रही है और सच कहूं तो आज भी मैं इतना समझ नहीं पाती हूं कि जब भी रचना प्रकाशित होती है तो पापा को इतनी खुशी क्यों होती है? रचना प्रकाशित होने से क्या होता है, अभी मुझे इसका विशेष आकर्षण नहीं महसूस होता।

 

प्रश्न 4. आप पढ़ाई के साथ लेखन, अभिनय और चित्रकारी जैसे कई काम करती हैं — इन्हें संतुलित रखने का आपका राज़ क्या है?

 

पाखी :-

पढ़ाई मैं रोज करती हूं। दोपहर 2:00 बजे स्कूल से आकर नाश्ता करके दोपहर 3:30 बजे पढ़ने बैठ जाती हूं। शाम 6:00 बजे तक पढ़ती हूं । फिर 6:00 से 7:00 बजे तक कराटे क्लास जाती हूं । आप सबको बता दूं कि मुझे कराटे में ग्रीन बेल्ट मिल गया है।

फिर आकर खाना खाती हूं,उसके बाद रात 8:00 बजे से लेखन का कार्य करती हूं पर मैं रोज नहीं करती हूं। जब भी मेरा मन होता है। मेरे मन में जब भी कुछ विचार आते हैं, तब मैं लिखती हूं। नहीं तो फिर चित्रकला करती हूं। और रही बात अभिनय की तो… मैं घर पर अभिनय का अभ्यास तो नहीं करती हूं। निकालो किड्स स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ते हुए विद्यालय स्तर की प्रतियोगिता में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसद में दिए गए भाषण का एक अंश अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया था। जिसे बहुत पसंद किया गया। यह मेरे पहले अभिनय की एक छोटी प्रस्तुति थी। 2024 में राजस्थान पत्रिका उदयपुर में पश्चिम सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा नाट्य कार्यशाला का आयोजन करने का समाचार छपा था, जिसमें अभिनय करने के लिए जो रुचि रखते हैं उनको चयन हेतु बुलाया था। पापा मुझको वहां लेकर गए । उस नाटक का नाम था कल्पना पिशाच। निर्देशन प्रसिद्ध रंगकर्मी सुनील जी टांक ने किया था। उन्होंने मुझे अवसर दिया। नाटक में मेरी बहुत छोटी भूमिका थी लेकिन यह मेरे लिए एक नया अनुभव था। इतने लोगों के सामने बोलना इसका डर तो मुझे नहीं था क्योंकि शुरू से मुझे बोलने का अभ्यास पापा कराते रहते हैं। मम्मी भी प्रोत्साहित करती है। सब जगह प्रस्तुति के लिए मुझे लेकर जाते हैं। बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने शिल्पग्राम के मंच पर मेरा यह पहला अभिनय का प्रयास था। जो मेरी नजर में बहुत सफल रहा।

ग्रीष्म अवकाश में ही इसी वर्ष लोक कला मंडल के द्वारा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी डॉक्टर लइक हुसैन जी के निर्देशन में नाट्य कार्यशाला आयोजित हुई उसमें भी मैंने भाग लिया और नाट्य कार्यशाला में तैयार किए गए नाटक सब्बु के सार्वजनिक मंचन में करीम केरूप में बड़ी भूमिका का अभिनय किया। बड़े मंच पर यह मेरा दूसरा अभिनय का अवसर था। यहां मुझे नाटक में अच्छा मजा आया। नये मित्र भी बने और प्रसिद्ध रंगकर्मी आदरणीय लईक हुसैन जी से प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

मुझे अभिनय करना पसंद है। पढ़ाई चित्रकारी करते कविता लेखन इस सबके साथ अभिनय कला का मैं रोज घर पर अभ्यास‌ नहीं कर पाती हूं। लेकिन, हां अगली बार जब भी यह नाट्य कार्यशाला होगी तब जरूर जाऊंगी । और मैंने जो अभी दिनचर्या बताई उसका मैं कई बार पालन नहीं कर पाती हूं क्योंकि कभी स्कूल की पढ़ाई ज्यादा रहती है, कभी किसी कार्यक्रम में भाग लेने जाना होता है तो दिनचर्या टूट ही जाती है।

 

 

प्रश्न 6. जब आप कविता लिखती हैं, तो आपके मन में सबसे पहले कौन-सा भाव आता है — कल्पना, आनंद या सीख देने की भावना?

पाखी :-

मैं कविता दूसरों को सीख और दूसरों को आनंद देने के लिए लिखती हूं। और अपने विचार दूसरों तक पहुंचाने के लिए और लोगों को जागरूक करने के लिए लिखती हूं।मुझे स्वयं को भी आनंन्द आता है।

 

 

प्रश्न 7. आपको चित्र बनाना भी पसंद है — क्या कभी आपने अपनी कहानी या कविता के पात्रों के चित्र खुद बनाए हैं?

पाखी :-

जी हां, मैंने ऐसा किया है। मुझे अपनी स्वरचिच रचनाओं की पुस्तक प्रकाशित करवानी है। उसके लिए मैंने पांडुलिपि बनाई और साथ में अपने मन से ही चित्र भी बनाएं है। ताकि जब बच्चे कविताएं पढ़े तो साथ में उसमें जो चित्र बने हुए है उसमें अपनी कल्पना और रूचि से रंग भी भर पाएं और चित्र देख कर बच्चे कविता का भाव और अच्छे से समझ जाए। सभी चीज तैयार है ,बस पुस्तक प्रकाशित करवानी है। और कोई अच्छा प्रकाशक चाहिए जिससे कम पैसों में काम हो जाए। पापा के पास ऐसे कुछ प्रकाशक भी आए जो कम पैसों में किताब छपवाते हैं।लेकिन बाद में वे कितनी कॉपी चाहिए? इस पर बात करते है तो फिर बात वही हो जाती है। क्योंकि अगर हम चाहे तो तो कुछ पैसे में रोज एक संकलन में हमारी कविता छप सकती है। लेकिन ऐसा करने का कोई मतलब नहीं है। हमारी रचना छपवाने के लिए भी हमें पैसे देने पड़े हमें। यह ठीक नहीं है। क्योंकि मैं सोचती हूं कि अपने आप को इतना काबिल बनाना चाहिए कि सामने से कोई आए और हमारी कविता के लिए पूछे और हमें पैसे दे। मम्मी भी ऐसा ही कहती है। एक दो बार पापा ने पैसे देकर सांझा संकलन में रचना छपवाई लेकिन मैंने उसके बाद मना कर दिया पापा को कि पैसे देकर के रचना नहीं छपवानी है।

 

 

प्रश्न 8. मंच पर अभिनय करते समय क्या डर लगता है, या फिर आप मंच पर जाते ही एकदम “कलाकार पाखी” बन जाती हैं? 😄

पाखी :-

दर्शकों के सामने बोलने का मेरा आत्मविश्वास पापा-मम्मी ने अच्छा बना रखा है। दर्शकों को देखकर तो मुझे डर नहीं लगता है। मंच पर मैंने अभिनय दो बार ही प्रस्तुत किया है, तो मन में थोड़ा डर इस बात का रहता है कि कहीं मेरे कारण पूरा नाटक खराब न हो जाए । हां, लेकिन मैं अपने डायलॉग कभी नहीं भूली और अगर आत्म-विश्वास में कमी पड़ी जाए तो आँखे बंद कर देती हूं और वैसे भी अभिनय करते समय दर्शकों के सामने ज्यादा देखने की जरूरत नहीं पड़ती।

 

 

प्रश्न 9. आपकी रचनाएँ बाल प्रहरी और बच्चों का देश जैसी लोकप्रिय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं — क्या वहाँ के संपादक अंकल-आंटी से भी बातचीत होती है?

पाखी :-

जी, मेरी बात लोकप्रिय मासिक बच्चों का देश मासिक पत्रिका के संपादक जी आदरणीय प्रकाश जी तांतेड़ साहब से बात होती रहती है। वह मुझे बहुत प्रोत्साहित करते हैं। उनके प्रधान संपादक संचय जी जैन साहब से हमें बच्चों का देश पत्रिका के रजत जयंती वर्ष पर अणुव्रत विश्व भारती संस्थान राजसमंद में आयोजित राष्ट्रीय बाल समागम साहित्यकार सम्मेलन में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया था। वहीं पर मुझे उनसे मिलने का अवसर मिला । जिसमें देश भर के 11 राज्यों से 100 से ज्यादा बाल साहित्यकारों ने भाग लिया था। पापा के साथ उसमें मुझे भी भाग लेने का अवसर मिला। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि रही। वहां सबसे छोटे बाल साहित्यकार के रूप में काव्य पाठ करने व सक्रिय सहभागिता पर मुझे सम्मानित किया गया यह मेरे लिए गौरव की बात है ।

बच्चों का देश पत्रिका के रजत जयंती वर्ष के इस कार्यक्रम में उत्तराखंड की बाल प्रहरी त्रैमासिक पत्रिका के संपादक जी आदरणीय उदय किरौला जी भी पधारे थे उनसे भी प्रत्यक्ष में मिलना हुआ। देवपुत्र मासिक पत्रिका के संपादक जी आदरणीय गोपाल महेश्वरी जी से भी मिलना हुआ।

इसके अलावा स्वर्णिम दर्पण पत्रिका लखनऊ उत्तरप्रदेश के संपादक आदरणीय सौरभ पांडे जी भी समय समय पर मुझे फोन करते हैं और प्रोत्साहित करते रहते हैं। सलूम्बर की सलिला संस्था की सम्पादक व संस्थापक आदरणीया विमला भंडारी जी से भी मिलना हुआ है। राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर और सलिला संस्था सलूम्बर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चौदहवें, पन्द्रहवें और सोलहवें राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन में मुझे भाग लेने का उन्होंने अवसर प्रदान किया है।

ये सभी मुझे बहुत प्रोत्साहित करते है। मैं इसमें कल्प कथा का भी नाम जोड़ना चाहूंगी कल्पकथा की तो बात ही अलग है। इसके द्वारा मुझे बराबर प्रोत्साहन मिलता है। बाल साहित्यकार भेंटवार्ता कार्यक्रम में सबसे पहला अवसर मुझे प्रदान करना मेरे लिए गौरव की बात है। कल्प कथा सहित इन सभी बड़े आदरणीय साहित्यकारों का मैं इस मंच से हार्दिक आभार प्रकट करती हूं।

 

 

प्रश्न 10. जब कभी आपकी रचना सराही जाती है या पुरस्कार मिलता है, तो सबसे पहले आप किसे दिखाती हैं — माँ, पापा या किसी प्रिय मित्र को?

पाखी :-

किसी को दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि मैं कहीं किसी कार्यक्रम में जाती हूं तो पापा-मम्मी साथ में ही होते हैं और कभी अगर ऐसा होता है कि वह साथ में ना आए जैसे विद्यालय में कोई कार्यक्रम हुआ तो मैं सबसे पहले उसके बारे में घर आकर अपने पापा को बताती हूं। पापा घर पर नहीं होते हैं तो फिर एक बार में मम्मी को तो बताती ही हूं। और किसी को चल करके बताने की मेरे मन में इच्छा नहीं होती है। हां मैं स्कूल में मेरे कुछ दोस्त हैं उनको मैं जरूर बताती हूं।

 

 

प्रश्न 11. आपने वागड़ रेडियो पर कविता पाठ किया — अपनी आवाज़ रेडियो पर सुनकर कैसा लगा? कुछ नया अनुभव हुआ?

पाखी :-

जी मुझे बहुत अच्छा लगा। हम छुट्टियों में बांसवाड़ा गए थे वहां मेरे ताई जी हैं डॉक्टर हेमलता जैन। उनसे इस रेडियो स्टेशन के बारे में पता चला उन्होंने ही मुझे कहा था कि पाखी तू बहुत अच्छा लिखती-बोलती है तो रेडियो पर क्यों नहीं बोलती हो? तो मैंने कहा कि रेडियो पर कैसे जाते हैं ,मुझे नहीं पता ? उन्होंने ही वहां पर वागड़ रेडियो स्टेशन वालों से मिलवाया और मुझे वहां पर पहली बार रेडियो पर बोलकर बहुत अच्छा लगा साथ ही मुझे उससे रेडियो कार्यक्रमों के बारे में पता चला । किस तरह वहां काम होता है। मुझे पता चला कि रेडियो स्टेशन में भी नौकरी लग सकती है, किस-किस पद पर काम कर सकते हैं? कैसे काम करते हैं उसका मार्गदर्शन मिला । इसके बाद में मैं उदयपुर आकाशवाणी में भी गई थी लेकिन उनका अब तक कोई उत्तर नहीं आया । हां वहां पर काम करने वालों ने यह जरूर बोला कि तुम अभी छोटी हो। यह बात मेरे को समझ में नहीं आई

स्वरचित कविता पाठ करने में छोटी और मोटी का क्या मतलब निकलता है। मेरी इच्छा है कि मैं उदयपुर आकाशवाणी से भी अपनी रचना पाठ करूं।

 

 

प्रश्न 12. कराटे में ग्रीन बेल्ट हासिल करने वाली कवयित्री होना तो बड़ी बात है! 😄 क्या कभी किसी ने मज़ाक में कहा कि “पाखी से पंगा मत लेना”?

पाखी :-

जी हां स्कूल में ऐसा होता है। मित्र जो भी होते हैं वो इस तरह मजाक करते है और इसके अलावा मेरे ताऊजी, दादा-दादी, मामा-मामी और भाई-बहन भी इस तरह का मजाक करते रहते हैं। यह सब सुनकर मुझे अच्छा लगता है।

 

 

प्रश्न 13. जब आप बड़ी होंगी, तो क्या कवयित्री बनना चाहेंगी या कोई और सपना भी है जो आपके दिल में पलता है?

पाखी :-

जी ,कवयित्री तो बनना है।साथ में मुझे और भी कुछ करना है। मेरे लक्ष्य बहुत सारे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि मैं सारी चीज सीख जाऊं । मुझे नई चीज़ सीखने का बहुत शौक है ।

जैसे : सबसे पहले मैंने कविता लिखना सिखा। उसके बाद मेरा चित्रकारी में आगे बढ़ने का मन हुआ जो अभी भी है लेकिन मेंने कविता को नहीं छोड़ा क्योंकि मैं चाहती हूं कि मैं हर चीज सीख जाऊं और अब मेरा संगीत में जाने का भी मन है मुझे गिटार सीखना है और मुझे नाटक में अभिनय करना भी बहुत अच्छा लगता है। मुझे अभिनय करने में मजा आता है लेकिन दुख इस बात का है कि मैं एक भी चीज पूरी नहीं सीख पाई और रही बात लक्ष्य की तो मैंने अभी इस बारे में कुछ खास सोचा नहीं है । मैं छोटे-छोटे लक्ष्य लेकर चलती हूं । कोशिश करती हूं सभी पूरे हो जाएं।

 

 

प्रश्न 14. अगर एक दिन के लिए आपको प्रधानमंत्री बना दिया जाए, तो आप बच्चों के लिए कौन-सा खास नियम या आदेश जारी करेंगी?

पाखी :-

एसा होना तो मुश्किल है पर अगर एक दिन के लिए मुझे प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो मैं सबसे पहले शनिवार की भी छुट्टी घोषित कर दूंगी और बच्चों के लिए विद्यालय में एक और पर्यावरण से जुड़ा विषय भी जोड़ दूंगी। उसमें शनिवार को बच्चे पर्यावरण से जुड़ी हुई जगह पर जाएंगे। उसे देखेंगे फिर उस पर प्रोजेक्ट बनायेंगे । मैं अपने देश का कानून थोड़ा सख्त कर दूंगी कोई रिश्वत ले तो कड़ी से कड़ी सजा दूंगी और लड़कियों की सुरक्षा के लिए जो कुछ कर सकती हूं वो सब करूंगी। और जितना अभी अंग्रेज़ी सबसे महत्वपूर्ण विषय है तो मैं हिंदी को ज्यादा महत्वपूर्ण बनाऊंगी और मुझे बहुत दुख होता है जब मैं देखती हूं कि दूसरे देश के लोग अपनी भाषा का अपनी संस्कृति का सम्मान करते हैं व उस पर गर्व करते है और दूसरी तरफ हम जो अपनी भाषा बोलते हुए भी शर्माते हैं। मैं किसी और की बात क्यों करूं मेरे खुद के विद्यालय में अंग्रेजी न बोलने पर डांट पड़ती है । और कितनी बार मैं खुद अंग्रेजी की शब्दों का उपयोग करती हूं और नहीं चाहकर भी बोल पड़ती है क्योंकि शुरू से मुझे यही पढ़ाया गया है और अंग्रेजी बोलने वाले को महान माना जाता है ।

मैं मानती हूं कि अंग्रेजी आना ज़रूरी है लेकिन उसका मतलब यह नहीं है कि हम सिर्फ अंग्रेजी ही पढ़ें। हिंदी को हमें अंग्रेजी से भी ऊपर रखना चाहिए। आज हिंदी हम विद्यार्थियों के लिए सिर्फ एक विषय बन कर रह गई । जिसे कुछ नंबर पाने के लिए पढ़ना पड़ता है। समय इतना खराब है कि मेरी कक्षा के बच्चे हिंदी को ढंग से पढ़ भी नहीं पाते। और मैं यह भी चाहती हूं कि दिवाली पर अन्य किसी भी दिन रात 10:00 बजे के बाद लोग पटाखे चलाना बंद कर दे। इसके लिए पुलिस अपने-अपने क्षेत्र में चक्कर लगाए । बड़े-बड़े बम बहुत ज्यादा आवाज करते हो उनको बेन करदे।

 

 

प्रश्न 15. अंत में पाखी, कल्पकथा साहित्य संस्था के मंच से देशभर के बच्चों को आप क्या प्रेरणादायी संदेश देना चाहेंगी, ताकि वे भी लेखन और सृजन से जुड़ें? 

पाखी :-

मैं देश भर के बच्चों से यह कहना चाहती हूं कि जो भी आपके विचार है दिन भर में जो भी आप देखते हैं उस पर जरूर लिखे। उसे आलेख के रूप में निबंध के रूप में कहानी कथा के रूप में कैसे भी लिखें ।अगर आपको समझ ना आए कि यह लेख है आलेख है कहानी है तो भी लिखें और जो भी आपके आसपास लेखन से जुड़ा हो उससे जांच करवावे। क्यूंकि लिखने से आनंद मिलता है मन की खुशी, व्यथा, पीड़ा, सुझाव बाहर आता है। मन हल्का होता है। पहचान मिलती है। अपने अनुभव साझा होते हैं।दूसरों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इसलिए जिसको अच्छा लगता है वह जरूर लिखें।

 

✍🏻 वार्ता : पाखी जैन 

 

कल्प व्यक्तित्व परिचय में आज बाल साहित्यकार पाखी जैन जी से परिचय हुआ। ये उदयपुर (राज.) से हैं। ये आठवीं कक्षा की छात्रा हैं और छोटी सी आयु में ही बहुत से पुरुस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। इनके साथ हुई भेंटवार्ता को आप नीचे दिये कल्पकथा के यू ट्यूब चैनल लिंक के माध्यम से देख सुन सकते हैं। 👇

https://www.youtube.com/live/9HsslmeDpjM?si=yaVji_EN8TxF2h4K

 

इनसे मिलना और इन्हें पढना आपको कैसा लगा? हमें कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट लिख कर अवश्य बताएं। हम आपके मनोभावों को जानने के लिए व्यग्रता से उत्सुक हैं। 

मिलते हैं अगले सप्ताह एक और विशिष्ट साहित्यकार से। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये। 

राधे राधे 🙏 🌷 🙏 

 

✍🏻 लिखते रहिये, 📖 पढते रहिये और 🚶बढते रहिये। 🌟 

 

✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन

 

 

कल्प भेंटवार्ता

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