🧑🌾 “!! किसान और उसकी धरा !!” 👩🌾
- पवनेश
- 16/12/2024
- काव्य
- प्रतियोगिता
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✍🏻 !! “साप्ताहिक आमंत्रण – कल्प/दिसम्बर/२०२४/स” !!✍🏻
📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२४/स” !! 📜
📚 विषय :- !! “किसान और खेत” !! 📚
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣
शीर्षक:- किसान और उसकी धरा
हर प्रात चूमे अरुणिमा का आँचल,
किसान जो सींचे धरा का आँगन।
श्रम से लथपथ उसका हर कण,
धरती की गोद में भर दे जीवन।।
हल चलाए, पसीने से नहाए,
मेघ भी देख उन्हें झुक जाए।
बीज की हर बूँद में स्वप्न समाए,
हरियाली का गीत जग में गाए।।
सूरज की तपिश को जो सह जाए,
फिर भी धैर्य से फसल उगाए।
धूल और काँटों से न घबराए,
अपनी किस्मत खुद बुन पाए।।
चमके जब धान के सुनहरे कण,
झूम उठे धरती का हर तन।
मक्का-गेहूँ, गन्ना की बाली,
किसान की मेहनत बनती खुशहाली।।
जब अन्न का भंडार भरे आँगन,
हर पेट को मिले भोजन का धन।
गाँव से लेकर नगर तक उजियारा,
किसान है देश का सच्चा सितारा।।
हे अन्नदाता, तुझको नमन,
तेरे श्रम से सजता है ये गगन।
धरती, अम्बर, जल तेरा साथी,
तू है भारत की आत्मा अभिलाषी।।
खेत-खलिहान के ये सुंदर दृश्य,
तेरी मेहनत के हैं साक्षी अशेष।
तेरे हर क़दम से हो नई क्रांति,
किसान, तू है युग का वास्तविक भक्त।।
✍️:- सृजन प्रयास।
पवनेश मिश्रा।
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