🇮🇳 “!! कल्प संवादकुंज > तिरंगा – राष्ट्र गौरव का वाहक !!” 🇮🇳
- Kalp Samwad Kunj
- 17/07/2024
- लेख
- रंजीत
- 1 Comment
🎆 “साप्ताहिक कल्प संवादकुंज – राष्ट्र ध्वज विशेष।” 🎆
🎯 “विषय:- तिरंगा – राष्ट्र गौरव का वाहक” 🎯
⏳ “समयावधि: दिनाँक १७-जुलाई-२०२४ बुधवार सायं ६.०० बजे से दिनाँक २३-जुलाई-२०२४ मंगलवार मध्य रात्रि १२.०० बजे (भारतीय समयानुसार) तक।” ⏲️
🔆 “विधा – लेख (वैचारिक)” 🔆
📝 “भाषा:- हिन्दी (देवनागरी लिपि)” 📝
❇️ “विशेष: > राष्ट्र ध्वज के सम्मान में आपके सौहाद्रपूर्ण विचार आमंत्रित हैं।”
“> आपके विचार कल्पकथा वेबसाइट पर दिए गए विषय के कमेंट सेक्शन में पोस्ट करने पर ही स्वीकार किए जायेंगे।” ❇️
One Reply to “🇮🇳 “!! कल्प संवादकुंज > तिरंगा – राष्ट्र गौरव का वाहक !!” 🇮🇳”
Leave A Comment
You must be logged in to post a comment.


पवनेश
कल्प संवादकुंज – तिंरगा – राष्ट्रगौरव का वाहक
राधे राधे सभी को,
कल्प संवादकुंज के वर्तमान विषय तिरंगा राष्ट्र गौरव का वाहक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। अपने विचारों की शुरुआत करते हुए हम बताना चाहते हैं कि हमारा राष्ट्र ध्वज तिरंगा हमारे देश की पहचान, गौरव और स्वतंत्रता का प्रतीक है। तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं है, बल्कि यह हमारी स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं, शहीदों की बलिदानों और राष्ट्र की अखंडता का वाहक है। यह हमारे देश के अद्वितीय सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक धरोहरों का प्रतीक है।
मित्रों,
पहली बार 22 जुलाई 1947 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। तिरंगे का वर्तमान स्वरूप महानुभाव पिंगली वेंकय्या द्वारा डिजाइन किया गया था। इस ध्वज में तीन क्षैतिज पट्टियां हैं ऊपर भगवा, उसके नीचे अर्थात् मध्य में सफेद, और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टियां स्थित होती हैं ध्वज के मध्य में एक नीले रंग का अशोक चक्र है इसमें 24 तीलियाँ हैं जो जीवन के सतत प्रवाह का प्रतीक हैं।
दोस्तों,
हमारे तिरंगे में स्थित तीनों रंग क्रमशः बलिदान, शांति, और समृद्धि, के प्रतीक बताए जाते हैं साथ ही भगवा रंग को त्याग, श्वेत रंग को सत्य, और हरा रंग हरियाली अर्थात् खेती का प्रतिनिधत्तव करते हैं। कुल मिलाकर तिरंगा देश की सेना, आम जनमानस, और भारतीय समाज की रीढ़ यानि किसान को भी परोक्ष रूप से प्रतिनिधि है।
साथियों,
तिरंगे के बीच में स्थित नीले रंग का अशोक चक्र, अशोक स्तंभ से लिया गया है। यह चक्र धर्म, कानून और नैतिकता का प्रतीक है। चक्र की 24 तीलियाँ दिन के 24 घंटों का प्रतिनिधित्व करती हैं और यह दर्शाती हैं कि समय कभी नहीं रुकता, और हमें भी निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
भाईयों,
हमारा राष्ट्र ध्वज भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में एकता, और समग्र क्रांति, का मूल चिन्ह बनकर उभरा था। हमारे क्रांतिकारी, बलिदानी, और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, ने इस राष्ट्र ध्वज के सम्मान में आंदोलन को यज्ञ और जीवन को आहुति बनाकर ध्वज के गौरव में वृद्धि की है।
बहिनों,
तिरंगे के प्रति सम्मान और आदर हमारे संविधान और कानूनों द्वारा सुनिश्चित किया गया है। ध्वज को फहराने, संजोने और संभालने के कड़े नियम हैं, जिनका पालन हर भारतीय को करना चाहिए। ध्वज को कभी भी जमीन पर नहीं गिराना चाहिए और न ही इसे अपमानजनक ढंग से इस्तेमाल करना चाहिए। राष्ट्रध्वज को सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है, और रात में केवल विशेष अवसरों पर ही फहराया जा सकता है।
बन्धुओं और भगिनियों,
हमारे लिए तिरंगे का महत्व समझना बेहद जरूरी है। यह ध्वज हमारी स्वतंत्रता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। इसके प्रति सम्मान और गर्व की भावना हर भारतीय के दिल में होनी चाहिए। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से तिरंगे के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना आवश्यक है।
अपने विचारों को विराम देते हुए हम यही कहना चाहते हैं कि तिरंगे का सम्मान और आदर हर भारतीय का कर्तव्य है, और हमें इसे गर्व के साथ फहराना चाहिए। तिरंगा न केवल हमारे देश की पहचान है, बल्कि यह हमारी आत्मा और भारतीयता का प्रतीक है। भारत माता की जय, वन्दे मातरम्, जय हिन्द,।