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आधुनिक डायन

अस्वीकरण

(यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसमें वर्णित पात्र, क्लिनिक, चिकित्सकीय संस्थान, जैविक नमूने, स्टेम सेल अनुसंधान, पुलिस कार्रवाई, अपराध, पीड़िताएँ तथा न्यायिक घटनाएँ साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। किसी वास्तविक व्यक्ति, चिकित्सक, संस्था, क्लिनिक अथवा घटना से इसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। कहानी का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों के शोषण, चिकित्सा-विज्ञान के दुरुपयोग तथा युवावस्था और सौंदर्य के प्रति आधुनिक समाज के अंधे मोह को उजागर करना है। इसमें किसी अवैध चिकित्सकीय प्रक्रिया की विधि, मात्रा, तकनीक अथवा व्यावहारिक निर्देश प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।)

एवरयंग का अँधेरा”

रात के साढ़े दस बजे एवरयंग रीजेनेरेटिव क्लिनिक की काँच की दीवारों पर बारिश की बूँदें लकीरें खींच रही थीं। भीतर कॉस्मेटिक सर्जरी यूनिट, क्रायोथेरेपी चैंबर, डर्मल इमेजिंग सिस्टम और अत्याधुनिक बायोमेडिकल लैब की नीली रोशनी चमक रही थी।

पचपन वर्षीय डॉ. साबिया सिद्दीकी आईने के सामने खड़ी अपनी त्वचा पर उँगलियाँ फेरते हुए बोलीं, “उम्र केवल कैलेंडर पर बढ़ती है… अगर बायोलॉजिकल एज को नियंत्रित करने का विज्ञान आपके पास हो तो चेहरा हमेशा युवा रह सकता है।”

सामने बैठी करोड़पति क्लाइंट ने साबिया की कलाई थाम ली, “डॉक्टर, मैं आपसे प्यार करती हूँ… आप मुझे बूढ़ा नहीं होने देंगी न?”

साबिया ने उसकी उँगलियाँ दबाईं और धीमे से कहा, “हम उम्र के खिलाफ साथ-साथ लड़ेंगे… यही हमारा एवरयंग लव है।”

रिसेप्शन पर फटी-पुरानी फाइल पकड़े पूजा कुर्सी के किनारे बैठी थी। उसने झिझकते हुए पूछा, “मैडम, विज्ञापन में रिसर्च असिस्टेंट की नौकरी के साथ पच्चीस हजार रुपये वेतन लिखा था न?”

रिसेप्शनिस्ट ने कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर दौड़ाई और मुस्कुराकर कहा, “हाँ, लेकिन पहले हेल्थ प्रोफाइलिंग, बेसलाइन बायोमार्कर, हेमेटोलॉजी पैनल, इम्यूनोलॉजिकल स्क्रीनिंग और कुछ रिसर्च सैंपलिंग होगी।”

पूजा ने अपनी फाइल सीने से लगा ली, “मेरी माँ बहुत बीमार हैं… अगर नौकरी मिल गई तो उनका इलाज हो जाएगा।”

रिसेप्शनिस्ट ने फॉर्म उसकी ओर बढ़ाते हुए कहा, “बस यहाँ साइन कर दीजिए… बाकी हम समझा देंगे।”

पास बैठी नाजिया ने फॉर्म के छोटे अक्षरों पर आँखें सिकोड़ते हुए पूछा, “लेकिन इसमें डोनर कोड और बायोलॉजिकल मटेरियल लिखा है… इसका मतलब?”

रिसेप्शनिस्ट ने होंठों पर मुस्कान टिकाए रखी, “मेडिकल टर्मिनोलॉजी है, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं।”

उसी समय एक युवक ने अपना बैग नीचे रखा और गर्दन खुजलाते हुए कहा, “सर, लैब असिस्टेंट की वैकेंसी के लिए आया हूँ।”

उसके सामने बैठी महिला कर्मचारी ने फाइल उठाते हुए पूछा, “पहले कभी सेल कल्चर या बायोबैंक में काम किया है?”

युवक ने हल्का-सा सिर झुकाया, “थोड़ा-बहुत।” महिला ने उसकी आँखों में दो पल देखा। दोनों की पलकें एक साथ झपकीं।

रात 11:07 बजे महिला अधिकारी ने लैब का दरवाजा खोलते हुए पूछा, “ये क्रायोप्रिजर्वेशन यूनिट किसके लिए है?”

तकनीशियन के हाथ में पकड़ी टैग-शीट रुक गई। उसने निगाहें नीचे कर लीं, “रूटीन रिसर्च…” अधिकारी ने फ्रीजर पर लगे कोड को पढ़ते हुए कहा, “और ये डोनर आईडी?”

डॉ. साबिया धीरे-धीरे आगे बढ़ीं, “आपको मेडिकल बायोलॉजी में काफी दिलचस्पी है।” पीछे से हील की आवाज आई।

“और आपको कानून में कितनी?” महिला अधिकारी ने फाइल बंद की और उनकी ओर मुड़कर कहा।

“क्राइम ब्रांच।”

साबिया की भौंह हल्की-सी सिकुड़ी अगले ही क्षण अधिकारी ने पहचान-पत्र सामने कर दिया।

“आपके पास सर्च वारंट है?” साबिया की उँगलियाँ क्षणभर के लिए काँपीं, लेकिन उसने तुरंत संयत होकर कहा,

बाहर से पुरुष अधिकारी की आवाज आई, “यह रहा।”

दरवाजा खुला और पुलिसकर्मी भीतर फैल गए।

साबिया ने पीछे मुड़कर देखा। उसकी नजर एक क्षण मुख्य सर्वर पर ठहरी और वह अचानक उसी दिशा में बढ़ी।

“कोई सर्वर बंद नहीं करेगा!” पुरुष अधिकारी ने उसका रास्ता रोकते हुए कहा, “उधर जाने की जरूरत नहीं है।”

साबिया ने जबड़ा कस लिया, “यह प्राइवेट मेडिकल डेटा है।”

“अब यही डेटा हमारी जाँच का हिस्सा है।” अधिकारी ने उसकी कलाई से हाथ हटाते हुए कहा।

साबिया ने सिक्योरिटी अलार्म दबा दिया। लाल बत्तियाँ चमक उठीं। दो गार्ड दौड़कर आए “हथियार नीचे! सब लोग दीवार से लग जाएँ।” मगर महिला अधिकारी ने पिस्टल से निशाने पर लेते हुए कहा।

आपाधापी

के बीच साबिया पीछे के गलियारे में भागी। उसके कदमों की आवाज संगमरमर पर गूँज रही थी। उसने एक गुप्त दरवाजा खोला।

अंदर बायोबैंक था—क्रायो-वायल, कोडेड डोनर प्रोफाइल, सेल-लॉट रिकॉर्ड, एक्सोसोम एनालिसिस, साइटोकिन प्रोफाइल, फ्लो साइटोमेट्री रिपोर्ट और डिजिटल बायोमार्कर लॉग। साबिया ने काँपते हाथ से एक क्रायो-वायल उठाई।

“उसे नीचे रखिए, डॉक्टर।” पीछे से आवाज आई तो वह धीरे-धीरे पलटी। “वरना पिस्टल से निकली बुलेट आपकी खोपड़ी खोल देगी।

महिला अधिकारी की टॉर्च सीधे उसके चेहरे पर थी।
“आज आपकी लैब नहीं… आपका पूरा साम्राज्य सील होगा।”

“कल्ट, कोशिकाएँ और झूठ”

पूछताछ कक्ष में साबिया सामने बैठी थी। टेबल पर फाइलों का ढेर था।

“इन्फॉर्म्ड कंसेंट कहाँ है?” अधिकारी ने पहला दस्तावेज उसकी ओर सरकाया और पूछा।

“सभी प्रक्रियाएँ प्रोटोकॉल के अनुसार थीं।” साबिया ने दस्तावेज की ओर देखा, फिर नाखून से मेज पर हल्की रेखा खींचते हुए बोली।

अधिकारी ने दूसरी फाइल खोली, “आईआरबी अप्रूवल?” साबिया की उँगली मेज पर रुक गई।

“डोनर एलिजिबिलिटी रिकॉर्ड?” उसने नजरें फेर लीं।

“बायोबैंक ट्रेसबिलिटी?” साबिया ने होंठ भींच लिए।

अधिकारी ने कुर्सी आगे खिसकाते हुए कहा, “आप एचसीटी-पी, सेलुलर मटेरियल, मेसेन्काइमल स्टेम सेल प्रोफाइल, एक्सोसोम, साइटोकिन, ग्रोथ फैक्टर और रीजेनेरेटिव बायोमार्कर के नाम पर गरीब लड़कियों को फँसाती थीं?”

साबिया ने सीधी नज़र अधिकारी को देखा “यह सब मेरी मेडिकल प्रैक्टिस के खिलाफ निराधार आरोप हैं।” और मुस्कुराते हुए कहा। “मैं एक प्रतिष्ठित चिकित्सक हूँ। मेरे सभी क्लाइंट्स संतुष्ट हैं।”

अधिकारी ने एक फोटो टेबल पर रखी उसमें एक युवती अस्पताल के बिस्तर पर बेहोश थी, उसके हाथ में आई वी ड्रिप लगी थी और पास में साबिया की सिग्नेचर वाली फाइल रखी थी।
“यह क्या है?”

साबिया ने फोटो को देखा, फिर ऊपर देखा “एक रूटीन पोस्ट-प्रोसीजर मॉनिटरिंग।” कोई हिचकिचाहट नहीं, कोई घबराहट नहीं। “मरीज को एलर्जी थी, हमने उसे ट्रीटमेंट दिया। वह ठीक हो गई।”

अधिकारी ने अगली फाइल खोली उसमें सात पीड़िताओं के हस्ताक्षर थे, जो उन्होंने बिना पढ़े किए थे।
“इन महिलाओं का कहना है कि आपने उन्हें बिना जानकारी के बायोलॉजिकल सैंपलिंग के लिए साइन करवाया।”

साबिया ने फाइल उठाई, पलटी, “ये महिलाएँ आर्थिक रूप से कमजोर थीं।” फाइल हँसते हुए वापस रख दी। “उन्होंने अपनी मर्जी से साइन किया। अब पछता रही हैं क्योंकि उन्हें नौकरी नहीं मिली। यह मेरी गलती नहीं है कि उनकी योग्यता कम थी।”

अधिकारी ने गहरी साँस ली और टेबल पर एक क्रायो-वायल रखी। उस पर डोनर कोड था जो पूजा के फॉर्म से मेल खाता था।
“यह वायल पूजा नाम की युवती का है। उसे बताया गया कि यह रिसर्च सैंपलिंग है, लेकिन यह क्लिनिक के बायोबैंक में अवैध रूप से संग्रहीत था। आप इसका क्या स्पष्टीकरण देती हैं?”

साबिया ने वायल की ओर देखा, फिर अधिकारी की ओर
“यह डोनर वायल उस महिला के स्पष्ट लिखित अनुमति से लिया गया था।” उसकी आँखों में झूठ की चमक थी। “यदि उसने पूरा फॉर्म नहीं पढ़ा, तो वह उसकी व्यक्तिगत लापरवाही है। मैंने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया।”

अधिकारी ने फाइल बंद की और उसके सामने बैंक स्टेटमेंट रखा  जिसमें अमीर क्लाइंट्स से लाखों रुपये के ट्रांजैक्शन थे, और उसी अवधि में पीड़िताओं के नाम पर कोई भुगतान नहीं था।
“तो आपको इन लड़कियों से सैंपल मिले, आपने उन्हें कुछ नहीं दिया, लेकिन आपके अमीर क्लाइंट्स ने आपको करोड़ों दिए। यह क्या है  चैरिटी?”

साबिया ने पहली बार अपनी नज़र थोड़ी झुकाई। “मैंने जो किया, वह रीजेनेरेटिव मेडिसिन थी। अमीर लोग इसका खर्च उठा सकते हैं, गरीब नहीं।” फिर उसने मुस्कुराकर कहा। “यह दुखद है, लेकिन दुनिया ऐसी ही चलती है। मैंने कोई कानून नहीं तोड़ा।”

हर सवाल पर उसने झूठ बोला।
हर साक्ष्य को उसने विकृत किया।
हर पीड़िता की कहानी को उसने उलट-पुलट कर पेश किया।

लेकिन अधिकारी ने उसकी एक भी बात नहीं मानी।

आखिरी आईना”

अदालत खचाखच भरी थी। अभियोजन ने तथ्यों, फोरेंसिक साक्ष्यों, बायोबैंक डेटा, डिजिटल सर्वर, वित्तीय लेन-देन, फर्जी इन्फॉर्म्ड कंसेंट और पीड़िताओं के बयानों के आधार पर एक-एक करके सारी सच्चाई सामने रखी।

जाँच दल ने बताया कि:
· ५१ युवतियों के जैविक नमूने बिना सही जानकारी के लिए गए।
· कोई आईआरबी अप्रूवल नहीं था।
· कोई ट्रेसबिलिटी नहीं थी।
· बायोबैंक अवैध था।
· हर पीड़िता को झूठा भरोसा दिलाया गया कि उन्हें नौकरी मिलेगी, पैसे मिलेंगे।
· उनके स्टेम सेल, प्लाज्मा, एक्सोसोम और बायोमार्कर का अमीर क्लाइंट्स के लिए अवैध व्यापार किया गया।

साबिया के वकील ने प्रतिरोध करते हुए कहा, “मेरी मुवक्किल प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं। सभी आरोप झूठे हैं।”

लेकिन अभियोजन ने वह वीडियो चलाया जो अंडरकवर अधिकारियों ने रिकॉर्ड किया था

“गरीब लड़कियाँ सबसे अच्छा कच्चा माल हैं।” उसमें साबिया एक क्लाइंट से कह रही थी। “वे सवाल नहीं करतीं, वे सिर्फ हस्ताक्षर करती हैं।”

“यह सब मेरे खिलाफ शत्रुओं का षड्यंत्र है। “साबिया का चेहरा सफेद पड़ गया, लेकिन उसने फिर भी कहा “यह वीडियो फर्जी है। मुझे फंसाया गया है। मेरी प्रतिष्ठा का धूमिल करने के रचा गया जाल है।”

  “आप इस तरह की बातों से जांच दल की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।” न्यायाधीश ने चश्मा उतारकर मेज पर रखा “आपको जानकारी है प्रतिष्ठा कानून से ऊपर नहीं होती।”

तब पूजा और नाजिया ने गवाही दी।
पूजा ने कहा, “हमें सिर्फ नौकरी नहीं चाहिए थी… हमें अपने परिवार की जिंदगी चाहिए थी।”
नाजिया ने कहा, “हम गरीब है, इसलिए हमारे शरीर को उन्होंने प्रयोगशाला बना लिया।”

साबिया ने अदालत में आखिरी झूठ बोला “ये सब मुझे बदनाम करने की साजिश है। मैंने कभी किसी का शोषण नहीं किया।”

लेकिन अभियोजन ने उसके खिलाफ ५१ पीड़िताओं के मेडिकल रिकॉर्ड, १२४ बैंक ट्रांजैक्शन, फर्जी दस्तावेज़ और बायोबैंक की पूरी डिजिटल चेन पेश कर दी।

सच्चाई अब छिप नहीं सकती थी।

न्यायाधीश ने फैसला सुनाया “डॉ. साबिया सिद्दीकी तथा उसके सहयोगियों को मानव शोषण, धोखाधड़ी, अवैध जैविक सामग्री के व्यापार, आपराधिक षड्यंत्र तथा संबंधित गंभीर अपराधों में दोषी पाया जाता है। अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है।” कहते हुए उन्होंने हथौड़े से ठक – ठक करते हुए निर्णय दिया।

साबिया को हथकड़ी लगी। वह अंत तक बोलती रही “यह न्याय नहीं है!” लेकिन उसकी आवाज फीकी पड़ गई।

एक सामान्य सुबह, नाजिया चाय की चुस्की लेते हुए अपनी छोटी-सी किराए की कोठरी में बैठी थी। “एवरयंग क्लिनिक मामला: डॉ. साबिया सिद्दीकी को उम्रकैद — प्रतिबंधित दवाओं के अभाव में जेल में बदहाल, ३० की दिखने वाली महिला अब ८० से अधिक बूढ़ी!” सामने अखबार बिछा था उसकी नज़र एक बड़ी सुर्खी पर गई।

नाजिया ने अखबार उठाया और उसे गौर से पढ़ना शुरू किया।

“डॉ. साबिया सिद्दीकी, जो कभी एवरयंग रीजेनेरेटिव क्लिनिक की मालकिन थीं और प्रतिबंधित एंटी-एजिंग दवाओं, अवैध हार्मोन थेरेपी और चोरी-छिपे स्टेम-सेल कॉकटेल के सहारे ५५ की उम्र में ३० की दिखती थीं, को जेल में उन सब चीजों से वंचित कर दिया गया है।

जाँच दल द्वारा एकत्र किए गए तथ्यों, फोरेंसिक साक्ष्यों, डिजिटल सर्वर डेटा, बायोबैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन तथा ५१ पीड़िताओं और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने उसके सभी झूठों को ध्वस्त कर दिया। साबिया ने पूछताछ के दौरान लगातार झूठ बोला, गुमराह करने की कोशिश की, साक्ष्यों को विकृत किया, लेकिन जाँच दल ने उसकी एक भी बात मानी नहीं।

अब प्रतिबंधित दवाओं के अभाव में उसका शरीर ढह गया है। उसकी त्वचा गहरी झुर्रियों से कटी है, गाल धँस गए हैं, बाल सफेद और पतले हो गए हैं, उँगलियाँ सिकुड़ गई हैं, आँखें पीली और खून से भरी हैं। वह अपनी उम्र से कहीं अधिक बूढ़ी, भयानक और टूटी-फूटी दिखती है — मानो उसकी खुद की सारी कृत्रिम जवानी ने बदला ले लिया हो।

जाँच अधिकारी अन्वेषा ने कहा ‘साबिया ने कभी कबूलनामा नहीं किया। वह आखिरी दिन तक झूठ बोलती रही। लेकिन झूठ का साम्राज्य तथ्यों के सामने नहीं टिक सकता। अखबार में सूचना के साथ जांच अधिकारी का पासपोर्ट साइज चित्र लगा हुआ था हमने उसकी हर बात को साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्टों और गवाहों के जरिए झुठलाया। आज वह जो दिख रही है वह उसके घिनौने कर्मों का प्रतिबिंब है।”

नाजिया ने अखबार नीचे रखा। उसकी आँखें भीगी हुई थीं लेकिन वे दर्द की नहीं, संतोष की थीं।
उसने पास बैठी पूजा की ओर देखा, जो चाय बना रही थी।

“पूजा…” नाजिया ने आवाज दी।
पूजा पास आई और अखबार पढ़ा।
दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा।

“वह दिन मुझे याद है जब उसने कहा था, ‘बस आखिरी टेस्ट।'” पूजा ने धीरे से कहा “मुझे नहीं पता था कि मेरी जवानी चोरी हो रही है।”

नाजिया ने उसका हाथ पकड़ा, “और अब? अब वह खुद बूढ़ी हो रही है बिना किसी दवा के, बिना किसी धोखे के प्रकृति ने उसे दण्ड दिया है पूजा।”

पूजा ने अखबार उठाया और उस पर साबिया की फोटो देखी वह फोटो जेल की थी, जिसमें वह सिकुड़ी, झुर्रीदार, भयानक दिख रही थी।

“यह वही स्त्री है… जो पाँच साल पहले ३० की दिखती थी,” पूजा ने कानाफूसी में कहा, “अब वह मुश्किल से पहचानी जा सकती है।”

नाजिया ने गहरी साँस ली और खिड़की से बाहर देखा बाहर हरियाली थी, धूप थी, पक्षी उड़ रहे थे।
“हमने सोचा था कि वह अमर है, पूजा। हमने सोचा था कि उसके पास जादू है। लेकिन असल में वह तो बस एक धोखा थी और धोखा कभी टिकता नहीं।”

“प्रकृति अपना हिसाब रखती है, नाजिया। कोई चाहे कितनी भी दवाएँ खा ले, कितना भी झूठ बोल ले।” पूजा ने अखबार को धीरे से मोड़ा और टेबल पर रखा। “अंत में अपनी असली उम्र तो आँखों के आसपास झुर्रियाँ बनकर, गिरते बालों और काँपती उँगलियों में ही आएगी।”

नाजिया ने सिर हिलाया।
“हाँ… प्रकृति के विरुद्ध जाकर कोई सफल या सुखी नहीं हो सकता। यही तो उसकी सबसे बड़ी सज़ा है।”

दोनों चुप हो गईं।
दूर कहीं एक स्कूल की घंटी बजी बच्चों की हँसी की आवाज आई।

नाजिया ने पूजा का हाथ दबाया और कहा, “अब हमें न्याय मिला है, पूजा। हम सभी को अब प्रकृति की तरफ लौटना है।”

“उम्र बढ़ना कोई बीमारी नहीं है, नाजिया।” पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा  “यह तो जीने का सबूत है।”

अगली सुबह उसी अखबार ने एक संपादकीय छापा

“आधुनिक डायन डॉ. साबिया सिद्दीकी: वह स्त्री जो अमरता बेचती थी, अब अपनी मृत्यु को देख रही है।

जाँच दल ने उसके सभी झूठों को सच्चाई के सामने ढेर कर दिया। आज वह जेल में बिना किसी दवा के बूढ़ी हो रही है  इसलिए नहीं कि भाग्य ने साथ छोड़ा, बल्कि इसलिए कि उसने प्रकृति को ही चुनौती दी थी।
प्रकृति कभी हारती नहीं, मित्रों। वह अपना समय लेती है, लेकिन हिसाब चुकता करती है।
आज साबिया वही दिख रही है जो असल में है — एक बूढ़ी, अकेली, घृणित औरत, जो अपने ही झूठ का सबसे बड़ा शिकार बन गई।

पूजा ने वह संपादकीय पढ़ा और अखबार बंद कर दिया।
उसने नाजिया की ओर देखा और मुस्कुराई।
दोनों ने खिड़की खोली और धूप और हवा को अपने चेहरे पर महसूस किया।

प्रकृति ने अपना संतुलन बहाल कर लिया था।
और डायन — वह आधुनिक डायन — अपने ही जाल में फँसकर, बिना किसी दवा के, बूढ़ी होकर, अकेली सड़ रही थी।

पवनेश

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