गलियारे का जादूगर
अस्वीकरण
(यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसमें वर्णित पात्र, संस्थाएँ, घटनाएँ और परिस्थितियाँ किसी वास्तविक व्यक्ति अथवा कॉर्पोरेट संस्था से संबंधित नहीं हैं। इसका उद्देश्य आधुनिक कॉर्पोरेट संस्कृति, कार्यालयी राजनीति, चापलूसी, अफवाहों और पद की होड़ पर व्यंग्य करना है।)
ग्लोबलटेक इंटरनेशनल की बारहवीं मंजिल पर सब कुछ चमकता था काँच की दीवारें, संगमरमर का फर्श और कर्मचारियों की मुस्कानें। मुस्कानें इसलिए भी चमकती थीं क्योंकि यहाँ हर व्यक्ति जानता था कि अगली पदोन्नति किसकी हो सकती है और अगली विदाई किसकी। और जो नहीं जानता था, वह भी मुस्कुराता था क्योंकि यहाँ न जानने की बात कबूल करना आत्महत्या के बराबर था।
“इस बार प्रमोशन मेरा पक्का है।”सोमवार की सुबह शर्मा साहब कॉफी मशीन के पास मेहरा साहब से धीरे से बोले “सीईओ ने कल मीटिंग में मेरा नाम लिया था।” उन्होंने कप में चीनी घोलते हुए गर्दन थोड़ा झुकाई।
“बधाई हो भाई, लेकिन मैंने सुना है कि उपाध्यक्ष किसी और नाम पर विचार कर रहे हैं।” मेहरा साहब ने मुस्कराकर अपना कप उठाया।
“किसने कहा?” शर्मा साहब ने चम्मच कप में ही रोक दिया।
“बस… सुना है।” दोनों ने उसी क्षण पीछे मुड़कर देखा।
गलियारा खाली था, बिल्कुल खाली, इतना खाली कि शर्मा साहब को लगा कि खालीपन भी कुछ सुन रहा है।
अगले तीन दिनों में शर्मा के प्रमोशन की चर्चा इतनी फैल गई कि शर्मा स्वयं अपने प्रमोशन से डरने लगे। हर कोई उन्हें बधाई दे रहा था, वे लोग भी जो उन्हें पसंद नहीं करते थे, और वे लोग भी जो उनका नाम भूल चुके थे। शुक्रवार को मानव संसाधन विभाग से सूचना आई, प्रमोशन फिलहाल स्थगित है।
“मेरे खिलाफ शिकायत किसने की?” शर्मा साहब ने केबिन का दरवाजा बंद करते हुए मेहरा साहब से पूछा।
“शिकायत किसी ने की है या नहीं, पता नहीं… लेकिन बात ऊपर तक जरूर पहुँची है।” मेहरा ने मोबाइल मेज पर रखते हुए धीरे से कहा।
“ऊपर तक पहुँची कैसे?” शर्मा साहब सोच में पड़ गए।
“यही तो इस ऑफिस का असली रहस्य है।” मेहरा साहब ने कंधे उचकाए।
रहस्य का नाम किसी को मालूम नहीं था। बस इतना पता था कि गलियारे में कोई ऐसा व्यक्ति था जो बातचीत सुनता था और फिर वही बात ऐसी जगह पहुँचा देता था जहाँ उसका पहुँचना सबसे ज्यादा असरदार होता। कुछ लोग इसे प्रतिभा कहते थे, कुछ इसे कला, और कुछ इसे सिर्फ… नौकरी, और कुछ लोग गलियारे का जादूगर।
कुछ ही दिनों बाद निशाना मेहरा बन गया।
वह उपाध्यक्ष के कमरे से निकलकर अपनी फाइल सँभाल ही रहा था कि पास से गुजरते एक जूनियर कर्मचारी ने अनायास कहा, “सर, सुना है आपकी परियोजना किसी दूसरे विभाग को मिलने वाली है।”
“किसने कहा?” मेहरा साहब सुनकर ठिठक गए।
“सर! मैंने तो बस लोगों को बात करते सुना है।” जूनियर ने फाइल सीने से लगाई और मुस्कराकर कहा।
“कहाँ?” मेहरा साहब चौंक गए।
“गलियारे में।” कहते हुए वह कर्मचारी चला गया।
अगले सोमवार मेहरा साहब की परियोजना सचमुच दूसरे विभाग को दे दी गई। मेहरा साहब ने आपत्ति जताई तो उन्हें बताया गया कि यह “रणनीतिक निर्णय” है। मेहरा साहब ने पूछा कि रणनीति किसकी थी, तो जवाब मिला “ऊपर की।” मेहरा साहब ने पूछा कि ऊपर कौन? जवाब मिला “सबसे ऊपर।”
अब कार्यालय में एक नया नियम बन गया, गलियारे में किसी से कुछ मत कहो मगर यह नियम सबसे ज्यादा वही लोग तोड़ते थे जो दूसरों के बारे में सबसे ज्यादा जानना चाहते थे। नियम तोड़ना भी एक कला है और यहाँ हर कर्मचारी कलाकार था।
“तुमने ध्यान दिया है? जिसे भी वह गलियारे वाला जादूगर सुन लेता है, कुछ दिनों बाद उसकी जिंदगी बदल जाती है।” एक दिन रोहित ने कॉफी का कप मेज पर रखते हुए अपने साथी से कहा,
“तो फिर उससे दोस्ती कर लो।” साथी ने हँसते हुए कहा।
“पहचानेंगे कैसे?” रोहित ने भौंहें सिकोड़कर पूछा।
“यही तो मजा है… कोई उसे पहचानता ही नहीं।” साथी ने आसपास देखते हुए फुसफुसाकर कहा “कोई भी नहीं?”
“कोई नहीं। कुछ लोग कहते हैं वह सिक्योरिटी गार्ड है। कुछ कहते हैं वह कैंटीन में खाना परोसता है। और एक बार किसी ने कहा था कि वह तो सीईओ का ड्राइवर है।”
“और सच क्या है?” रोहित ने कप से एक घूँट लिया।
“सच? भाई, इस कंपनी में सच की सैलरी सबसे कम है।” साथी ने कंधे उचकाए।
कंपनी में उसके कई नाम पड़ गए किसी के लिए वह ‘कान’, किसी के लिए ‘सूचना विभाग’, किसी के लिए ‘सीईओ का आदमी’ और कुछ लोगों के लिए वह सिर्फ गलियारे का जादूगर था। नाम बदलते रहे, काम वही रहा।
“यह अफवाहों का स्रोत कौन है?” एक दिन नए मुख्य परिचालन अधिकारी ने मानव संसाधन निदेशक से पूछा।
“हमने भी पता लगाने की कोशिश की है।” निदेशक ने कंप्यूटर पर कुछ खोजते हुए जवाब दिया।
“नतीजा क्या हुआ?”मुख्य परिचालन अधिकारी यानि सीईओ ने फिर सवाल किया।
“कुछ नहीं।” उन्होंने स्क्रीन घुमाकर उत्तर नहीं।
“यानी हमारी कंपनी में एक ऐसा आदमी है जो सबकी बातें जानता है।” सीईओ ने चश्मा उतारकर मेज पर रखा “और हमारे पूरे मानव संसाधन विभाग को उसका नाम नहीं पता?”
“जी।” निदेशक ने धीमे से कहा।
“और तुम्हारे पास कितने कर्मचारी हैं?” सीईओ ने फिर सवाल किया।
“चार सौ बारह।” निदेशक ने तुरंत उत्तर दिया।
“और चार सौ बारह में से एक भी नहीं जानता?” सीईओ के लिए यह आश्चर्यजनक था।
“सर, चार सौ बारह तो सिर्फ हमारे विभाग के हैं।” निदेशक ने सिर झुकाया। “कुल कंपनी में दो हजार से ज्यादा हैं।”
“कमाल है।” सीईओ हँस पड़े। “हमें एक कर्मचारी नहीं, एक किंवदंती चाहिए थी।”
अगले दिन पूरे कार्यालय में एक और अफवाह फैल गई गलियारे के जादूगर को निकालने की तैयारी हो रही है। लोग अचानक बहुत सावधान हो गए। किसी ने किसी से बात करना बंद कर दिया। चाय की मेज पर चुप्पी रहने लगी। लिफ्ट में लोग मोबाइल देखने लगे। मीटिंग से बाहर निकलते ही हर व्यक्ति चारों तरफ देखने लगा। कॉफी मशीन के पास भीड़ गायब हो गई। गलियारा, जो कभी सबसे जीवंत जगह था, अब सबसे डरावनी जगह बन गया।
गलियारे का जादूगर सब कुछ देख रहा था फिर कंपनी का वातावरण बदलने लगा। शिकायतें कम हो गईं। गुटबाजी कम हो गई। लेकिन काम भी कम हो गया। लोग निर्णय लेने से डरने लगे कि कहीं उनकी बात फिर किसी के कान तक न पहुँच जाए। बैठकों में चुप्पी छा गई। ईमेल में शब्द कम हो गए। प्रस्ताव बनने बंद हो गए। और जब प्रस्ताव बनने बंद हो गए, तो प्रमोशन भी बनने बंद हो गए।
तभी सीईओ ने आपात बैठक बुलाई।
सभी अधिकारी कॉन्फ्रेंस रूम में जमा हुए। कोई किसी की ओर नहीं देख रहा था। सब अपनी फाइलें खोल-बंद कर रहे थे। चाय के कप ठंडे हो रहे थे।
सीईओ ने कमरे में प्रवेश किया तो सब खड़े हो गए।
“हमने अफवाहें रोकने के लिए ऐसा माहौल बना दिया है कि अब लोग सच बोलने से भी डर रहे हैं।” उन्होंने हाथ से बैठने का इशारा किया।
मीटिंग रूम
में सन्नाटा छा गया।
“तो क्या करें, सर?” किसी ने हिम्मत करके पूछा।
“मैंने सोचा था कि गलियारे के जादूगर को ढूँढ़कर उसे कोई जिम्मेदारी दूँगा।” सीईओ ने कुर्सी की पीठ से टेक लगाई। “लेकिन अब लगता है, उसे ढूँढ़ने की जरूरत ही नहीं है।” सुनकर सबने एक-दूसरे की ओर देखा।
कमरे में फुसफुसाहट फैल गई।
“सिर्फ अपनी ऑफिस पॉलिटिक्स, गॉसिप, एक दूसरे से जलन, चुगली जैसी आदतों को बंद कर दीजिए।” सीईओ ने आगे झुककर मेज पर हाथ रखे तभी किसी ने सिर उठाकर देखा।
“तो किसी को भी गलियारे के जादूगर से डरने की जरूरत नहीं है।” कुर्सियों में हलचल हुई।
“गलतियाँ सबसे हो सकती हैं, क्योंकि सब इंसान हैं। लेकिन गलत नहीं होना चाहिए।” सीईओ ने आवाज थोड़ी धीमी की।
कुछ लोगों ने सिर झुका लिया।
“हाँ, इतना याद रहे—जो भी गलत करेगा, वह जान ले कि गलियारे का जादूगर गलियारे में मौजूद है।” सीईओ के शब्द सभी के कानों में गूंजने लगे।
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