
🦚 “!! सावन !!” 🦚
आल्हा शैली में सावन गीत
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आल्हा शैली में सावन गीत
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सकल जगत के पालनहार सोलह कलाओं से परिपूर्ण भुवन मोहन परमावतार श्री कृष्ण भगवान को समर्पित कुछ पंक्तियाँ 🙏
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श्रावण तीज
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र
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पति पत्नी की नौंक झौंक कुंडलियां
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सौंधी माटी
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वीर धरा ये अति सुहावनी पुण्य प्रदायिनी माता।
गर्भ में जिसके पलते सृष्टि भाग्य विधाता।।
✍🏻 राधा श्री
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जय जगन्नाथ स्वामी, जयति जय जगन्नाथ स्वामी।
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साप्ताहिक आमंत्रण – कल्प/जून/२०२४/बविषय – सपनेविधा – मुक्तक काव्यभाषा – हिन्दीशीर्षक – सपने 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷सबने देखे अपने सपने देखे सबने सपने,बुनने बैठे हम लो साथी खुली आंख से सपने। मेरा सपना बस इतना सा हर बेटी को शिक्षा,बचपन उसको मिले सलोना दबे न कोई ईच्छा।बेटी बेटे से भी बढ़कर हाथ बढ़ा जग गढ़ती,सम अवसर पा पार करेगी कैसी भी हो परीक्षा।। …
Continue Readingतुम स्त्री हो
केवल स्त्री नहीं
तुम निर्मात्री
तुम संचालिका
तुम निर्देशिका भी हो मेरी ।
कभी दूर होकर भी
तुम्हारी छाप मेरे साथ होती है ।
मेरे हर फेसले पर ,
छिपी राय तुम्हारी ही होती है ।
थके हुए कदम घर वापसी में
तुम्हारी मौजूदगी में
सहज हो चंचल हो उठते हैं ।
तुम हो तो,
घर मेरा घर है।
तुम्हारी मौजूदगी घर की गरिमा है ।
सुबह शाम की ज्योत बाती हो तुम ।
तुम ही हो घर की लक्ष्मी ,
मेरे मन में बसी छिपी दुर्गा तुम ही हो ।
तुम्हारी अनहोनी को .
सपने में भी सोच बेचैन हो जाता हूँ ।
मेरी सांसो की लय हो तुम ।
मेरी प्रियतमा बन
मेरी जिंदगी की डोर हो तुम ॥