🪷 “!! सपने !!” 🪷
-
पवनेश
-
14/06/2024
-
अन्य
-
प्रतियोगिता
-
0 Comments
साप्ताहिक आमंत्रण – कल्प/जून/२०२४/बविषय – सपनेविधा – मुक्तक काव्यभाषा – हिन्दीशीर्षक – सपने 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷सबने देखे अपने सपने देखे सबने सपने,बुनने बैठे हम लो साथी खुली आंख से सपने। मेरा सपना बस इतना सा हर बेटी को शिक्षा,बचपन उसको मिले सलोना दबे न कोई ईच्छा।बेटी बेटे से भी बढ़कर हाथ बढ़ा जग गढ़ती,सम अवसर पा पार करेगी कैसी भी हो परीक्षा।। …
Continue Reading
सांसो की लय हो तुम
तुम स्त्री हो
केवल स्त्री नहीं
तुम निर्मात्री
तुम संचालिका
तुम निर्देशिका भी हो मेरी ।
कभी दूर होकर भी
तुम्हारी छाप मेरे साथ होती है ।
मेरे हर फेसले पर ,
छिपी राय तुम्हारी ही होती है ।
थके हुए कदम घर वापसी में
तुम्हारी मौजूदगी में
सहज हो चंचल हो उठते हैं ।
तुम हो तो,
घर मेरा घर है।
तुम्हारी मौजूदगी घर की गरिमा है ।
सुबह शाम की ज्योत बाती हो तुम ।
तुम ही हो घर की लक्ष्मी ,
मेरे मन में बसी छिपी दुर्गा तुम ही हो ।
तुम्हारी अनहोनी को .
सपने में भी सोच बेचैन हो जाता हूँ ।
मेरी सांसो की लय हो तुम ।
मेरी प्रियतमा बन
मेरी जिंदगी की डोर हो तुम ॥
Continue Reading
माँ तुम केवल माँ हो
मां तुम केवल मां हो, मां तुम केवल मां हो,ममता से भरी मिश्री की डली हो बच्चों के चेहरे की मुस्कुराहट ही तेरे हर दर्द की दवा है ।बच्चों के चेहरे की रौनक ही तेरे मन की सुंदरता है ।बढते बच्चों के कदमों में तेरे सपनों की उडान है । बच्चों के मन में उभरी कोई टीस तेरे अंतर्मन को …
Continue Reading
एक व्रक्ष तुम लगाओं
एक व्रक्ष तुम लगाओं और एक मैं लगता हूँ बरगद तुम लगाओ तो पीपल मैं लगता हूँ एक एक कर जब व्रक्ष लगेंगे जंगल एक बन जाएगा पर्यावरण प्रदूषित जो है वह अंगे शुद्ध हो जाएगा प्रण करलो व्रक्ष लगाने का तुम मैं भी प्रण दोहराता हूँ पहल करो तुम जल,भूमि, और वायु दूषित न होने पाए साथ समाज …
Continue Reading
🌴 !! “पर्यावरण व परोपकार” !! 🌴
धरती का श्रृंगार है विटप और वन फूल।
शीतल जल सुरभित पवन होते फिर भरपूर।।
जीवन का आधार हैं नीर समीर व भोग।
वृक्ष धरा को सींचते, हरते ताप दुरोग।।
Continue Reading
🕉️ “!! जय बजरंग बली हनुमान !!” 🕉️
-
पवनेश
-
03/06/2024
-
मुक्तक
-
भक्ति रस
-
0 Comments
जय बजरंग बली हनुमान।
Continue Reading
एकाकी जीवन
अकेले जीना क्या होता है ? एक बार, जो जी लिया , तो फिर इस माया से भरी दुनियां और लालच से जुड़े रिश्तों में , आसान हो जाता है कहीं, अपने आप को ढूंढना , और जान लेना स्वयं के अस्तित्व का होना । पहले पहल अकेलापन काटने को दौड़ता, दूर तक भगाता, बेचैन सोने नही देता । …
Continue Reading
खुद को इतना सजाय हुआ है
-
NEERAJ MISHRA
-
18/05/2024
-
गीत
-
विरह गीत
-
0 Comments
विरह गीत श्याम सुंदर मेरे.. मैंने तेरे लिए खुद को इतना .. सजाय हुआ है ये काजल ,ये चूड़ी , ये गजरा मैने मैहदी लगाया हुआ है .. श्याम सुंदर मेरे.. मैंने तेरे लिए मेरी साँसों मे तू , मेरी धड़कन मे तू मेरी बहती आस्को की बूंदों मे तू मैंने आँखों को समुंदर बनाया हुआ है श्याम सुंदर मेरे.. …
Continue Reading
पुराने लम्हों में सिमटी जिंदगी मेरी
अर्ज किया है :- की याद नहीं मुझको , तेरी बेबफई का वो वक्त | जिस वक्त तूने मुझे, बर्बाद करने में कोई कसर न छोड़ी | पुराने लम्हों में सिमटी जिंदगी मेरी नया कुछ अब याद नहीं रहता || बदलते वक्त के साथ मैं नहीं बदला इश्क की तड़फ में खुद को जला डाला बदल गए जो …
Continue Reading
बारम्बार प्रणाम तुम्हें
यह काव्य रचना स्वरचित है जो की आज की प्रतियोगिता हेतु प्रस्तुत है |
विषय : माता जानकी
दिनांक 13/05/2024
Continue Reading