
“आग्रह”
गर्मी
Continue ReadingDark
Auto
Light
Dark
Auto
Light

गर्मी
Continue Reading
मांडवी और भरत ब्रह्मांड के उन सर्वश्रेष्ठ दंपतियों में से है जिनके दांपत्य और निर्णय दोनों पर प्रश्न चिन्ह कभी नहीं लगा।
Continue Reading
शीर्षक: घर वापसी पिता सोच रहा है,खुश हूं इस बात पर कि बेटा लौट आया है ,उसके पास ।या मनाऊं मातम ,कि सपनों का खून कर लौटा है घर वापस । माटी के आंचल में रोने को,शायद टूट कर ।क्योंकि शहरों की सड़कों पर ,कहां है वह गांव की मिट्टी की सी नमी ?जहां ना रोने को कोई कंधा ही …
Continue Reading
हास्य समाचार
Continue Reading
कीर्ति जिनकी है अजर, तेज जिनका है प्रखर, शौर्य जिनका है अमर, देश जिनका मन हैं प्राण हैं। वो हमारे परमवीर, वो हमारे स्वाभिमान हैं। – 2 राष्ट्र जिनकी चेतना, राष्ट्र जिनकी वंदना, राष्ट्र जिनकी प्रार्थना, राष्ट्र जिनकी आन बान हैं। वो हमारे परमवीर, वो हमारे स्वाभिमान हैं। – 2 कीर्ति जिनकी है अजर, तेज जिनका है प्रखर, शौर्य जिनका …
Continue Reading
शीर्षक: प्रतीक । चर्चा का विषय रहा है,औरत का विधवा होना,टूटना चूड़ियों का, मांग का सुना होना ।कहते है…पुरुष ने क्या पुण्य किया,विधुर होने पर भी , पत्नी को क्या दिया ? घड़ी, ऐनक या हुक्का, कोई प्रतीकतो पुरुष के लिए होते,तोड़कर जिन्हें..विधुर होने का प्रमाण देते ।पर टूट गया जिसका जग सारा, और छूट गया गृहस्थी का सहारा ,जिसके …
Continue Reading
जय ज्वाला माई
Continue Reading
शीर्षक: खानाबदोश ( बंजारे ) खाने का ना होश है,जिंदगी खानाबदोश है ।चिथड़ों से ढकते है लाज को,चुप रहकर कहते है अपनी बात को । टुकड़ों पर पलते है बच्चे,चलते है, रास्ते तो है, मगर कच्चे ।अजब जिंदगी का ये मोड़ है,इसे चलाता तो कोई और है । कारवां गमों से रहा है भर,खाली हाथ मुझे रहा है कर ।आज …
Continue Reading
आदमी अंदर-अंदर दु:खी है,औरों के सामने है खुश। अंदर से है टूटा- टूटा,अपनों के लिए है खुश। (खुशी) हंसती है अपने आने पर,वो रोता है उसे पाने पर । वो सोता तो है ,(सोने )को ,पर जागता है उसे पाने को । वो दिखना कोई चाहता है,पर अंदर से देखें तो,वो दिखता है कोई और । कौन सुनता है उसकी …
Continue Reading
शीर्षक: यहां कौन तेरा है ? हम आएं है किस जहां से,किस जहां में हमारा गमन होगा।किन रिश्तों को छोड़ आए पीछे,किन नातों का आगमन होगा। जीवन के रहते रिश्ते-नाते निभाते ,मृत्यु उपरांत किसी नए सफर को निकल जाते ।किस जन्म में कौन था अपना, कौन पराया, भूल चुके है अब सारे वादे, सारे रिश्ते-नाते । सफ़र जीवन-मरण के हर …
Continue Reading