!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री प्रेम कुमार शर्मा “प्रेम” जी” !!
- कल्प भेंटवार्ता
- 31/10/2026
- लेख
- साक्षात्कार
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🏵️ !! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री प्रेम कुमार शर्मा “प्रेम” जी” !! 🏵️
!! मेरा परिचय !!
नाम —प्रेम कुमार शर्मा ‘प्रेम’
माताजी :- श्रीमती राजरानी शर्मा
पिता जी : श्री के एम शर्मा
जन्म स्थान -सुरजावली (सूरतपुर) जन्म तिथि -4जनवरी 197
जीवन साथी – श्रीमती मंजू शर्मा
बच्चे -कृतिका, डिम्पल,यशी एवं नव्या शर्मा
शिक्षा -एम ए (हिन्दी, संस्कृत,अर्थशास्त्र एवं समाज शास्त्र) बी एड,यू जी सी नेट (हिन्दी)
व्यवसाय -अध्यापन
(इण्टर कॉलेज में हिन्दी शिक्षक)
वर्तमान निवास -हरि एंक्लेव न्यू किला रोड खुर्जा बुलन्दशहर उत्तर प्रदेश
मेल आईडी premsharma0239@gmail.com
विशिष्ट कृति -प्रेरणा के फूल, संगम काव्य मंजूषा।
प्रकाशित साहित्य -भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार, हिन्दी साहित्य की ओर लौटो, निराला साहित्य में गांधी दर्शन, साहित्यकारों के प्रति उदासीनता (निबंध) अंधेरे का सफर (कहानी) निरुत्तर (लघुकथा) हम शराब नहीं पीयेंगे (लघु नाटिका)
आलोक पत्रिका का सम्पादन
पुरस्कार व सम्मान -शुभम संस्थान गुलावठी द्वारा विशिष्ट कविता गौरव सम्मान,कलम श्री सम्मान , श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा सृजन श्री साहित्य सम्मान
पद-अध्यक्ष, साहित्यकार संगम संस्था खुर्जा बुलन्दशहर
उत्तर प्रदेश
जिला अध्यक्ष
हिन्दी साहित्य भारती बुलन्दशहर
जिला ब्यूरो प्रमुख
लोक चिंतन मासिक पत्रिका
!! मेरी पसंद !!
-साहित्य पाठन एवं सृजन
उत्सव-दीपावली, होली रक्षाबंधन,भाई दूज
भोजन – शुद्ध शाकाहारी, दाल -रोटी, फल एवं हरी सब्जियां
रंग -गोरा
परिधान -पेन्ट शर्ट, कुर्ता पायजामा
स्थान एवं तीर्थ स्थल -हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी
लेखक – मुंशी प्रेमचन्द
कवि -सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
उपन्यास -गोदान,गवन (प्रेमचन्द) चेतन (उपेन्द्र नाथ अश्क)
कफ़न,नमक का दारोगा,पूस की रात, ईदगाह, पंच परमेश्वर आदि (प्रेमचन्द)
नाटक -चन्द्रगुप्त, स्कन्द गुप्त(प्रसाद)
कविता- तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस
बिहारी कृत सतसई, माखनलाल चतुर्वेदी कृत पुष्प की अभिलाषा
कामायनी, आंसू (प्रसाद)
खेल-दौड़, क्रिकेट
मूवीज- वाग्वान, ट्वैल्थ फेल
एवं हनुमान अंश
अपनी प्रिय रचना- ‘प्रेरणा के फूल’ कविता संग्रह
✍🏻 कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
💠 !! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : श्री प्रेम कुमार शर्मा ‘प्रेम’ जी के उत्तर !! 💠
प्रश्न ०१. प्रेम जी! आपके पारिवारिक संस्कारों और माता-पिता के मार्गदर्शन ने आपके व्यक्तित्व एवं जीवन-दृष्टि को किस प्रकार सँवारा?
प्रेम शर्मा जी :- मां का प्यार और पिताजी के शख्त अनुशासन ने मेरे जीवन को सद् मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
अपनी मां जी से कविता के प्रति प्रेम, धार्मिकता व्यवहार में सहजता और सरलता आदि गुण मिले पिता जी से अनुशासित जीवन, कार्य के प्रति सत्यनिष्ठा, परिश्रम की भावना एवं जीवन को व्यवस्थित जीना आदि गुण मिले। दिवंगत माता पिता के इन्हीं मार्गदर्शन ने आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रश्न ०२. अध्यापन और साहित्य-सृजन के बीच सामंजस्य स्थापित करने में आपकी जीवनसंगिनी मंजू शर्मा जी एवं परिवार का कितना सहयोग मिलता है?
प्रेम शर्मा जी :- मेरे अध्यापन कार्य एवं एवं साहित्य सृजन में मेरी पत्नी ने मुझे बहुत सहयोग दिया है। मेरी पत्नी ने भी हिन्दी एवं संस्कृत से एम ए तथा बी एड कर रखा है।वे घर की व्यवस्थाओं को अच्छी तरह से रखती हैं इसलिए मुझे अध्यापन और साहित्य सृजन में सामंजस्य स्थापित करने में कोई परेशानी नहीं आती। साहित्य सृजन में मेरी बड़ी बेटी कृतिका जो बी एड कर रही है वो बहुत सहयोग करती है।
मेरे परिवार का माहौल मेरे अनुकूल रहा है।
प्रश्न ०३. हिंदी शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण और साहित्यकार के रूप में समाज को दिशा देने के आपके प्रयासों में क्या समानता है?
प्रेम शर्मा जी :- मैं सदैव अपने विद्यार्थियों को चरित्र निर्माण हेतु प्रेरित करता हूं। छात्राओं को सती सावित्री, महारानी पद्मावती,सती अनुसूया, एवं माता सीता की कहानियों द्वारा सुनाता हूं।
मेरे साहित्य का मूल उद्देश्य देश भक्ति, चरित्र निर्माण, परोपकार,दया, प्यार,दीन हीनों के प्रति सहानुभूति है और मैं साहित्यकार के रूप में सभी पाठकों एवं श्रोताओं में इन गुणों के विकास हेतु प्रयासरत हूं और इसका परिणाम भी सकारात्मक रहा है।
प्रश्न ०४. आदरणीय, आप रामायण कालीन ग्राम “रामघाट” रामवास से हैं जो कि प्राचीन “बरान” बुलंदशहर के महाभारत कालीन खुर्जा अंचल से हैं जो कि मूल रूप से सिरेमिक उद्योग, और नव दुर्गा शक्ति मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, हम आपसे आपके ग्राम और आँचल के बारे में आपके ही शब्दों में जानना चाहते हैं।
प्रेम शर्मा जी :- है ग्राम मेरा प्रिय रामवास,
जहां राम भक्त ही रहते हैं।
श्री राम के पदचिन्हों पर चल
सदैव सुख का जीवन जीते हैं।
खुर्जा तहसील में ही
रामवास गांव आता है।
देवभूमि देवराला का
जो हिस्सा कहलाता है।
महाभारत काल में राजा बरान ने
बरन नगर बसाया था।
आगे चलकर वही बरन
बुलन्दशहर कहलाया था ।
बुलन्दशहर के अन्दर ही ,
एक खुर्जा तहसील आती है।
प्राचीन काल से ही जो
छोटी काशी कहलाती है।
हैं जहां विशाल मन्दिर दुर्गा जी का
और सिद्धेश्वर का धाम जहां।
भक्ति भाव में डूबे रहते
प्रतिदिन अनेक भक्त यहां।
सिरेमिक उद्योग में भी यह
विश्व पटल पर छाया है।
अपने अच्छे उत्पादन में
बहुत अच्छा नाम कमाया है इसी नगर में ही मैंने
छोटा सा आवास बनाया है।
जिसमें हम सब प्रेम से रहते
वह प्रेम सदन कहलाया है।
प्रश्न ०५. मुंशी प्रेमचंद और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे साहित्यकारों से आपको क्या प्रेरणा मिली, और आपकी लेखनी पर उनका कितना प्रभाव है?
प्रेम शर्मा जी :- मुझे मुंशी प्रेमचंद और निराला जी से
दीन हीनों के प्रति सहानुभूति और मानवतावादी दृष्टिकोण रखने की प्रेरणा मिली। मेरे साहित्य में इनका पूरा प्रभाव है।
प्रश्न ०६. कविता, निबंध, कहानी, लघुकथा और नाटिका जैसी विविध विधाओं में सृजन करते हुए आप अपनी अभिव्यक्ति के लिए विषयों का चयन कैसे करते हैं?
प्रेम शर्मा जी :- अपने साहित्य सृजन में अपने आस पास से ही विषयों का चयन कर लेता हूं।
प्रश्न ०७. आपके प्रिय कविता-संग्रह प्रेरणा के फूल तथा कृति संगम काव्य मंजूषा की रचना के पीछे कौन-सी प्रेरणा और जीवनानुभव रहे हैं?
प्रेम शर्मा जी :- अपनी रचना ‘प्रेरणा के फूल ‘ युवाओं को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने के लिए लिखी है।
संगम काव्य मंजूषा अपनी संस्था साहित्यकार संगम संस्था के साथियों और अपनी कविताओं का संकलन है।
प्रश्न ०८. प्रेम जी, हमारे दर्शक आपसे आपके बचपन की नादानी, शरारत का वह किस्सा जानना चाहते हैं जो आज भी जब आपको याद आता है तो आप स्वयं ही मुस्कुरा उठते हैं।
प्रेम शर्मा जी :- बचपन में मुझे घूमने का बहुत शौक था और ऊंचे ऊंचे पेड़ों पर चढ़ जाता था।
पालतू कबूतर बहुत अच्छे लगते थे।
प्रश्न ०९. आपकी साहित्यिक यात्रा का वह कौन-सा अनुभव है, जिसने आपको लेखन के प्रति सर्वाधिक समर्पित किया?
प्रेम शर्मा जी :- महिलाओं को दुखी होते हुए देखकर और बुरी बात को देखकर इनके विरोध स्वरूप साहित्य सृजन हेतु समर्पित किया है।
प्रश्न १०. साहित्यकार संगम संस्था के अध्यक्ष, हिंदी साहित्य भारती के जिला अध्यक्ष तथा पत्रिका के जिला ब्यूरो प्रमुख के रूप में आपके प्रमुख साहित्यिक उद्देश्य क्या हैं?
प्रेम शर्मा जी :- साहित्य सेवा एवं समाज सेवा
प्रश्न ११. वर्तमान साहित्यिक परिवेश में गंभीर लेखन, साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन और नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहन देने की क्या चुनौतियाँ हैं?
प्रेम शर्मा जी :- आजकल पाठक कम हैं एक अच्छा पाठक ही अच्छा साहित्यकार व पत्रकार बन सकता है। आजकल सबसे बड़ी चुनौती है कि नवोदित साहित्यकार अपनी समीक्षा नहीं चाहते,वे मात्र अपनी वाह वाह चाहते हैं।
प्रश्न १२. आपकी रचनाओं में भ्रष्टाचार, गांधी-दर्शन और साहित्यकारों के प्रति उदासीनता जैसे विषय दिखाई देते हैं। साहित्य सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम कैसे बन सकता है?
प्रेम शर्मा जी :- साहित्य ही सुधार का प्रभावी माध्यम है जो सीधे मानसिक रूप से प्रभावित करता है।
प्रश्न १३. डिजिटल युग और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी भाषा, पठन-पाठन की संस्कृति तथा साहित्यिक मूल्यों को कैसे समृद्ध किया जा सकता है?
प्रेम शर्मा जी :- डिजिटल युग को मैं साहित्य का सहयोगी मानता हूं। सृजन, प्रकाशन और उपलब्धता में डिजिटल युग और सोशल मीडिया सहायक सिद्ध हुए हैं।
प्रश्न १४. आदरणीय, आपके दृष्टिकोण में आधुनिक युग में महिलाओं पर आधारित लेखन में क्या परिवर्तन हुआ है और आप इस परिवर्तन को किस दृष्टिकोण से देखते हैं?
प्रेम शर्मा जी :- आजकल महिलाओं पर आधारित लेखन बढ़ रहा है। जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है।
प्रश्न १५. आज के युवा साहित्यकारों और विद्यार्थियों को आपका क्या संदेश है, और हिंदी साहित्य के भविष्य के लिए आपके आगामी सृजनात्मक संकल्प क्या हैं?
प्रेम शर्मा जी :- मेरा युवा साहित्यकारों और विद्यार्थियों को संदेश यह है की वे स्वस्थ एवं आदर्श मानव बनकर मानवता का प्रसार करें, बुराई का विरोध करें और इस भौतिकवादी युग में मशीन बनकर न रह जाएं।
युवाओं को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा स्वरूप उपन्यास एवं लघु कथा प्रकाशित करने का विचार है।
✍🏻 वार्ता : श्री प्रेम कुमार शर्मा ‘प्रेम’
शिक्षक एवं साहित्यकार
रामवास खुर्जा बुलन्दशहर उत्तर प्रदेश
कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय वरिष्ठ साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं खुर्जा, बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश के विद्वान लेखक व साहित्यकार श्री प्रेम कुमार शर्मा प्रेम जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇
https://www.youtube.com/live/B-UwhDHiT_E?si=UStyS1kxbkwzxmVu
इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये।
राधे राधे 🙏 🪷 🙏
✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️
✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी
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