Dark

Auto

Light

Dark

Auto

Light

1000456493

!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : कुमारी अनिशा जैन” !! 

 

!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : कुमारी अनिशा जैन” !! 

 

तिथि -१४/५/२०२६

 

!! “मेरा परिचय” !! 

 

नाम :- अनिशा जैन 

 

माता/पिता का नाम :- श्री जेके जैन, श्रीमती गीता जैन 

 

जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :- मध्य प्रदेश 28 जुलाई 

 

पति/पत्नी का नाम :- अविवाहित 

 

बच्चों के नाम :- छोटी बहन अनाहिता पुत्री समान प्रेम करते 

 

शिक्षा :- सॉफ्टवेर इंजीनियर BE बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग 

 

व्यावसाय :- सॉफ्टवेर इंजीनियर 

 

वर्तमान निवास :- अरेरा कॉलोनी, भोपाल, मध्य प्रदेश 

 

आपकी मेल आई डी :- jain28suraj@gmail.com

 

आपकी कृतियाँ :- श्री राम पर भक्ति कविता 

 

आपकी विशिष्ट कृतियाँ :- राम जी पर आधारित कविताएँ 

 

आपकी प्रकाशित कृतियाँ :- पब्लिक वाणी और यश भारत अख़बार में काफ़ी सारी कविताएँ प्रकाशित हुई 

 

पुरूस्कार एवं विशिष्ट स्थान :- भिंड सरकार द्वारा कविताओं के लिए सम्मान।भिंड दिगम्बर जैन समाज द्वारा सम्मानित।कल्पकथा मंच द्वारा कल्प सृजन रत्न से सम्मानित।

 

 

 

!! “मेरी पसंद” !!

 

उत्सव :- राम नवमी दीपावली सीता नवमी आदि 

 

भोजन :- सादा घर का बना भोजन। 

 

रंग :- गुलाबी पीला नीला 

 

परिधान :- भारतीय कपड़े ज़्यादा पसंद सूट साड़ी 

 

स्थान एवं तीर्थ स्थान :- शिखरजी जैन तीर्थ, अयोध्या 

 

लेखक/लेखिका :-लेखिका 

 

कवि/कवयित्री :- कवयित्री 

 

उपन्यास/कहानी/पुस्तक :- कलम बोलती है, इश्क़ ए शहर में, क्या हम स्वतंत्र है(सभी साझा काव्य संकलन)

 

कविता/गीत/काव्य खंड :- मन मंजरी, जीवन के सुंदर रंग, मौन शब्द मुखर अनुभूतियाँ

(तीन एकल पुस्तिकाएं)

 

खेल :- क्रिकेट धोनी जी के कारण 

 

फिल्में/धारावाहिक (यदि देखते हैं तो) :- आनंद, कटी पतंग मूवी राजेश खन्ना जी की

रामायण रामानंद सागर जी की 

 

आपकी लिखी हुई आपकी सबसे प्रिय कृति :- श्री राम के लिए हर कविता मेरी पसंदीदा है

 

 

 

!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : अनिशा जैन जी के उत्तर !! 

 

भेंटवार्ता १. :– जीवन की इस यात्रा में साहित्य के प्रति आपकी चेतना का प्रथम अंकुर कब और किन अनुभूतियों के आलोक में प्रस्फुटित हुआ?  

 

अनिशा जी :- सबसे पहली कविता मैंने 2014 में लिखी माँ के लिए फिर २०१५ में तीर्थंकर भगवान के लिए फिर २०२० से कोरोना काल से निरंतर लेखन कार्य कर रही हूँ। 

 

 

 

भेंटवार्ता २. – कवयित्री होने का यह पावन भाव आपके अंतर्मन में किस सूक्ष्म अनुभूति से जन्म लेकर शब्दों का रूप लेने लगा?  

 

अनिशा जी :– सबसे पहली कविता माँ के लिए लिखी उनके आशीर्वाद स्वरूप ही ये अनुभूति हुई। 

 

 

 

भेंटवार्ता ३. – आपकी दृष्टि में साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है, अथवा आत्मा का मौन दर्पण भी हैं?  

 

अनिशा जी :– साहित्य वो है जो मौन से भी परे है और अभिव्यक्ति का माध्यम भी।जो शब्द हमें सुंदर अनुभूतियाँ दे वो साहित्य है। 

 

 

 

भेंटवार्ता ४. – आज के तीव्र गति वाले जीवन में आप कविता के स्थान और उसकी प्रासंगिकता को किस रूप में अनुभव करती हैं?  

 

अनिशा जी :– जो जीवन को ठहराव दे और बुद्धि को सन्मति दे। 

 

 

 

भेंटवार्ता ५. – आपके जीवन और साहित्यिक यात्रा में मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक भूमि, विशेषकर भोपाल नगर, की क्या भूमिका रही है? क्या इस शहर की आत्मा कहीं न कहीं आपकी रचनाओं में भी प्रतिबिंबित होती है?

 

अनिशा जी :– मध्य प्रदेश में इतने महान साहित्यकार हुए है ये निश्चित ही उनका आशीर्वाद है जो मैं लिख पा रही हूँ और बेहतरी की तरफ़ प्रयासरत हूँ। 

 

 

 

भेंटवार्ता ६. – श्रीराम भक्ति पर आपकी रचनाएँ विशेष रूप से चर्चित हैं—इस भक्ति-धारा का मूल स्रोत आपके हृदय में कब से प्रवाहित हुआ?  

 

अनिशा जी :– श्री राम तो सदा से रोम रोम में धड़कन बन स्पंदित होते है।बचपन से ही राम कथा सुनकर बड़ी हुई। श्री रवीन्द्र जैन जी के भजन और अरुण गोविल जी की रामायण ने काफ़ी प्रेरणा दी। 

 

 

 

भेंटवार्ता ७. – आपकी रचनाओं में आस्था और संवेदना का जो दिव्य संगम दृष्टिगोचर होता है, वह किन भावनात्मक अनुभवों से आकार लेता है?  

 

अनिशा जी :– श्री राम के प्रति आस्था में उनके प्रति विश्वास और प्रेम का हर भाव मेरी कविता को अनुभव प्रदान करते है। 

 

 

 

भेंटवार्ता ८. – “मन मंजरी” एवं “जीवन के सुंदर रंग” जैसी कृतियों में आप जीवन को किस दृष्टि, किस अनुभूति और किस दर्शन से देखती हैं?  

 

अनिशा जी :– इन पुस्तकों में श्री राम के प्रति मेरी आस्था, प्रेम के रंग और सामाजिक विषयों पर कविता लिखी है। 

 

 

 

भेंटवार्ता ९. – क्या आपके जीवन में ऐसी कोई कविता रही है जिसने आपके अंतर्मन की दिशा और दृष्टि दोनों को गहराई से परिवर्तित कर दिया हो? 

 

अनिशा जी :– श्रृंगार कविता जो मैंने IBS में अध्ययन के दौरान लिखी IIM में सेलेक्ट हुई। 

 

भेंटवार्ता १०. – आपकी रचनात्मक यात्रा में वह कौन-सा व्यक्ति, ग्रंथ या अनुभव रहा है, जिसने आपकी साहित्यिक चेतना को सर्वाधिक प्रेरित किया?  

 

अनिशा जी :– तुलसीदास जी की रामायण। 

 

 

 

भेंटवार्ता ११. – क्या आपके विचार में साहित्य समाज का मार्गदर्शक दीपक है, अथवा केवल मानवीय भावनाओं का कोमल प्रतिबिंब?  

 

अनिशा जी :– दोनों है।भावनाएँ ही अच्छे या बुरे कर्म को प्रेरित करती है जो समाज का आईना बनते है। 

 

 

 

भेंटवार्ता १२. – विभिन्न संस्थाओं से प्राप्त सम्मान और पुरस्कारों को आप अपने साहित्यिक जीवन में किस भाव से स्वीकार करती हैं?  

 

अनिशा जी :– इन पुरस्कारों को विनम्र भाव से सम्मान के साथ स्वीकार करती हूँ। 

 

 

 

भेंटवार्ता १३. – क्या ये सम्मान आपके भीतर सृजन की प्रेरणा को और अधिक प्रज्वलित करते हैं, अथवा उत्तरदायित्व का भार बढ़ाते हैं?  

 

अनिशा जी :– जी बिल्कुल। 

 

 

 

भेंटवार्ता १४. – आपके जीवन में “घर का सादा भोजन” तथा “गुलाबी, पीला और नीला रंग”—ये प्रतीक किन भावनात्मक अर्थों को धारण करते हैं?  

 

अनिशा जी :– सादा भोजन सादा जीवन जीने की प्रेरणा देती है।गुलाबी रंग प्रेम, नीला रंग श्री राम की सर्वव्यापकता और पीला रंग उनके पीताम्बर का प्रतीक है। 

 

 

 

भेंटवार्ता १५. – अयोध्या एवं शिखरजी जैसे पवित्र तीर्थ आपके अंतर्मन और आपकी लेखनी को किस प्रकार आध्यात्मिक स्पर्श प्रदान करते हैं?  

 

अनिशा जी :– श्री राम और तीर्थंकर भगवान का आशीर्वाद मैं अपनी कविताओं में महसूस करती हूँ। 

 

 

 

भेंटवार्ता १६. – यदि आपके सम्पूर्ण जीवन को किसी एक कविता में पिरोया जाए, तो वह किस भावभूमि से अपनी यात्रा प्रारम्भ करेगी?  

 

अनिशा जी :– श्री राम की आराधना करती हुई भाव पूर्ण कविता। 

 

 

 

भेंटवार्ता १७. – यदि स्वयं प्रभु श्रीराम आपकी रचनाओं का पठन करें, तो आप उनके समक्ष कौन-सा भाव या संदेश व्यक्त करना चाहेंगी?  

 

अनिशा जी :– मैं मौन रहना चाहूँगी जिससे भगवान स्वयमेव ही अपनी भक्त के हर भाव पढ़ सके। 

 

 

 

भेंटवार्ता १८. – अंततः आपकी दृष्टि में साहित्य का परम उद्देश्य क्या है—जीवन को समझना, संवेदनाओं को जीना, या आत्मा को शब्द देना?

 

अनिशा जी :– संवेदनाओं को जीते हुए उन्हें शब्द देना। 

 

 

 

भेंटवार्ता १९. – आज के नवोदित कवियों एवं लेखकों के लिए आप कौन-सा जीवनदायी संदेश देना चाहेंगी?

 

अनिशा जी :– साहित्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे और अपनी भाषा का सम्मान करें।”अपने विचारों को शब्द देकर आवाज़ दे”। 

 

✍🏻 वार्ता : कुमारी अनिशा जैन 

 

 

कल्प भेंटवार्ता में आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं साहित्य जगत में साधना करती हुई युवा कवयित्री अनिशा जैन जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇

 

https://www.youtube.com/live/cPwQIC8wCkM?si=dM7529V1NpwilZHh

 

 

इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी। 

 

मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये। 

राधे राधे 🙏 🪷 🙏 

 

✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️ 

 

✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन 

 

🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ

 

कल्प भेंटवार्ता

Leave A Comment