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🏞️ “!!! कल्प संवादकुंज – पर्यावरण संरक्षण विशेष !!” 🏞️

🏞️ "साप्ताहिक कल्प संवादकुंज - पर्यावरण संरक्षण विशेष।" 🏞️

🌳 "विषय:- पर्यावरण संरक्षण ।" 🌳

🏡 "समयावधि: दिनाँक ०५-जून-२०२४ बुधवार सायं ६.०० बजे से दिनाँक ११-जून-२०२४ मंगलवार मध्य रात्रि १२.०० बजे (भारतीय समयानुसार) तक।" 🏡


🏝️ "विधा - लेख (वैचारिक)" 🏝️
🌴 "भाषा:- हिन्दी (देवनागरी लिपि)"🌴


🎋 "विशेष: > पर्यावरण संरक्षण पर आपके सौहाद्रपूर्ण विचार आमंत्रित हैं।"
"> आपके विचार कल्पकथा वेबसाइट पर दिए गए विषय के कमेंट सेक्शन में पोस्ट करने पर ही स्वीकार किए जायेंगे।"🎋

🐿️ "टिप्पणी:- विस्तृत विवरण एवं नियमावली हेतु लिंक पर जाएं।"🐿️
https://kalpkatha.com/%f0%9f%8c%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0
Kalp Samwad Kunj

2 Comments to “🏞️ “!!! कल्प संवादकुंज – पर्यावरण संरक्षण विशेष !!” 🏞️”

  • पवनेश

    राधे राधे सभी को,

    कल्प संवादकुंज श्रृंखला में वर्तमान विषय “पर्यावरण संरक्षण” के संदर्भ में अपने विचारों की रखने की शुरुआत में हम पर्यावरण संरक्षण के लिए हर स्तर पर किए जा रहे ईमानदार प्रयासों, और उनसे जुड़े संगठनों, सरकारों, संस्थाओं, व्यक्तिगत रूप से प्रयासरत महामानवों को करबद्ध साधुवाद के साथ आत्मीय धन्यवाद निवेदित करते हैं। अपने वक्तव्य में किसी कवि की दो पंक्तियों को पूरे सम्मान से उद्धृत करना चाहते हैं।
    “पर्यावरण पर लिखना, मुझको एक निबंध।
    सांसे एक दिन बिकेंगी, करलो सभी प्रबंध।।”

    मित्रों,
    आज हम आपको यह नहीं बताएंगे कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ पर्यावरण की रक्षा करना होता है। आज हम यह भी नहीं कहेंगे कि पर्यावरण संरक्षण आज सिर्फ एक विषय नहीं बल्कि पृथ्वी पर मानव जीवन की अनिवार्यता है, और न ही आज हम पर्यावरण के घटकों को लेकर यह बोलेंगे कि इनमें से किसी एक के क्षतिग्रस्त होने का अर्थ भी प्राकृतिक असंतुलन है जिसकी बहुत बड़ा मूल्य मानव को चुकाना पड़ेगा क्योंकि यह सब सच है जिसको हम सभी जानते हैं।

    साथियों,
    संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष १९७२ में ५ जून से लेकर १६ जून तक विश्व के अधिकतम राष्ट्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पर्यावरण संरक्षण के उद्वेश्य से विस्तृत चर्चा के पश्चात ५ जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने और पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक आवश्यकता पर बल दिया था अर्थात आज से ५२ वर्ष पूर्व पर्यावरण को क्षति न पहुंचाने के लिए एक राय हो चुकी दुनियां आज भी यथार्थ के धरातल पर इस बिंदु को उतारने में असफल रही है।

    दोस्तों,
    मानव इस पृथ्वी पर अतिथि है यह बिंदु उतना ही सत्य है जितना कि सूर्य का पूर्व से उदित होना। फिर भी मानव का बर्ताव इस पृथ्वी पर स्वामी सरीखा है जिसका परिणाम निरंतर होती जा रही पर्यावरण की क्षति है, इस क्षति का सबसे बड़ा दुष्परिणाम भी मानव को ही उठाना पड़ता है, सुनामी, असमय विकराल बारिश, भूस्खलन, भूकंप, बाढ़, इत्यादि आपदाएं प्रकृति द्वारा आँखें खोलने के लिए दी गई ऐसी चेतावनियां हैं जो भविष्य को प्रत्यक्ष दिखा रहीं हैं यह अलग बिंदु है कि उसके बाद भी हम शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छुपाकर अपने सुरक्षित होने की कल्पना में मग्न हैं।

    बन्धुओं,
    स्थिति विस्फोटक इसलिए नहीं है कि इस समस्या का कोई हल नहीं है बल्कि स्थिति भयंकर इसलिए है कि हर कोई चाहता है प्रयास दूसरा व्यक्ति करें। नदियों में अंधाधुंध खनन की तरह रेत निकालेंगे तो उनकी धारा मंद भी होगी और वह अपना मार्ग भी बदलेंगी। पहाड़ों के सीने को आँखें बंद करके छलनी करेंगे तो पहाड़ भी अपना स्थान छोड़ेंगे। तालाबों, झीलों, से जल भंडारण स्थलों को भरकर निर्माण करेंगे तो बाढ़ भी आएगी और बाढ़ का पानी घरों में घुसेगा। जंगलों को काटेंगे तो मृदा क्षरण भी होगा और गर्मी भी बढ़ेगी। अत्याधुनिक सुविधाओं की लालसा में प्रकृति के चक्र में हस्तक्षेप करेंगे तो कोरोना जैसी महामारियां भी आएंगी। उद्योगों, वाहनों, घरेलू उपकरणों, बाजारवाद के चहेते संयंत्रों, की अति प्रदूषण बढ़ाएगी तो मानव निश्चित रूप से एक – एक सांस के लिए तरसेगा।

    भगनियों,
    आज के समय में शायद ही पृथ्वी का कोई ऐसा कोना हो जहां पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता न हो। पर्यावरण संरक्षण के साधन और उपाय भी सभी के पास हर जगह हैं आवश्यकता है सिर्फ उनमें से सही विकल्प का चयन करके अपने नैतिक कर्तव्य के रुप में उसको प्रयोग करने की है।

    सभी से आग्रह है कि अपने ईमानदार प्रयासों से अपने परिवार, स्वजनों के लिए अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाइए। कौन क्या कर रहा है, कोई और क्यों नहीं कर रहे है? कोई और आगे आए तो साथ दूं, मेरे अकेले के करने से कुछ नहीं होगा, मेरे न करने से क्या फर्क पड़ेगा, जैसे वाक्यों से बाहर निकलिए आग्रह है खुद के लिए पर्यावरण को स्वच्छ बनाइए।
    सादर।

  • Sumita Gahlyan

    साप्ताहिक कल्प संवाद कुंज
    विषय – पर्यावरण संरक्षण
    विधा – लेख
    भाषा – हिंदी
    शीर्षक – पर्यावरण

    पर्यावरण क्या है – हमारे चारों तरफ का आवरण या वातावरण । तो हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने चारों तरफ सफाई रखें तथा अपने वातावरण को स्वच्छ बनाएं। स्वच्छता में ही मानव का हित है। जब एक पशु बैठने से पहले अपनी पूंछ के द्वारा अपने बैठने के स्थान को साफ करता है तभी बैठता है तो क्या मानव अपने चारों तरफ के वातावरण को स्वच्छ नहीं रख सकता।

    पर्यावरण को साफ-सुथरा रखना हमारा हमारे हाथ में है । हमें पेड़ पौधे लगाने चाहिए ताकि चारों तरफ हरियाली हो मानव तथा पशु स्वच्छ वायु में सांस ले सके। 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है क्या सिर्फ 5 जून को ही पेड़ – पौधे लगाने चाहिए। असली पर्यावरण दिवस तब मनाया जाएगा जब हम रोज पेड़- पौधे लगाएंगे ताकि हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ वातावरण मिल सके।

    पर्यावरण दिवस किसी दिन का मोहताज नहीं होना चाहिए बल्कि रोज ही पर्यावरण दिवस मनाया जाना चाहिए। हमें पेड़ों की कटाई रोकने चाहिए। मानव अपनी सुविधा के लिए पेड़ों की कटाई करता है लेकिन वह भूल जाता है यदि पेड़ नहीं रहेंगे तो हम कैसे रहेंगे ,कैसे सांस लेंगे, बिना पेड़ों के तो जीवन संभव ही नहीं है। प्रकृति को बचाना हमारा कर्तव्य है इसलिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगानी चाहिए। प्रकृति के बीच समय बिताना चाहिए। इसलिए यह वादा कीजिए कि आप केवल 5 जून को ही पर्यावरण दिवस नहीं मनाएंगे बल्कि रोज ही पर्यावरण दिवस होना चाहिए। पर्यावरण का संरक्षण करना बहुत ही जरूरी है तभी जीवन संभव है।

    रचियता – डॉ सुमिता गाहल्याण

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