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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मुक्ता शर्मा” !!

 

!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मुक्ता शर्मा, मेरठ (उप्र)” !! 

 

!! “मेरा परिचय” !!

 

नाम :- मुक्ता शर्मा 

 

माता/पिता का नाम :- श्रीमति सन्तोष देवी

श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा

 

 

जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :-मेरठ 19/09/1979

 

 

पति का नाम :-श्री हरीश कुमार शर्मा

 

बच्चों के नाम आर्यनकौशिक:-

 

शिक्षा :- एम. ए.इंग्लिश, हिन्दी, सोशियोलॉजी एवं शिक्षाशास्त्र 

 

व्यावसाय :- गृहिणी

 

वर्तमान निवास :-मेरठ

 

मेल आईडी :- 234muktasharma@gmail.com 

 

आपकी कृतियाँ :- साझा संकलन किन्नर के जज़्बात, इबादत की तामीर समर ( एक मीठा फल )रिश्ते नाते पिता क्रांति रश्मिया, माँ की छाया दुष्यंत ग़ज़ल की जमीन पर 

 

आपकी विशिष्ट कृतियाँ :- गीत गजल मुक्तक 

 

आपकी प्रकाशित कृतियाँ :- उपरोक्त सभी

 

पुरूस्कार एवं विशिष्ट स्थान :-सतमोला कवियों की चौपाल में नवोदित कवि श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार, अनेको ऑनलाइन व ऑफलाइन पुरस्कार व सम्मान चिन्ह 

 

 

 

!! “मेरी पसंद” !!

 

उत्सव :- दीपावली, रक्षाबंधन, करवाचौथ, अहोई अष्टमी

 

भोजन :- रोटी-सब्जी, दाल-चावल व खीर  

 

रंग :- लाल, पीला व सुनहरी 

 

परिधान :- साड़ी, सूट

 

स्थान एवं तीर्थ स्थान :- उज्जैन व ऋषिकेश

 

लेखक/लेखिका :- हजारी प्रसाद द्विवेदी, मुंशी प्रेमचंद, शिवानी

 

कवि/कवयित्री :- सूरदास, तुलसीदास, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर व सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

 

उपन्यास/कहानी/पुस्तक :- मानसरोवर, पुरस्कार, पुनर्नवा, अतिथि, पूतोंवाली करवा का व्रत, सती 

 

कविता/गीत/काव्य खंड :- राम की शक्ति पूजा, परशुराम की प्रतीक्षा, आँसू 

 

खेल :- क्रिकेट, टेनिस व कबड्डी 

 

मूवीज/धारावाहिक (यदि देखती हैं तो) :- बेबी, हॉलीडे, इंकहार्ट, इंसेप्शन 

 

आपकी लिखी हुई आपकी सबसे प्रिय कृति :- जब से मोहन गए हैं सुनो राधिके 

 

 

 

!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : श्रीमती मुक्ता शर्मा जी के उत्तर !! 

 

प्रश्न १. मुक्ता जी, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टि से समृद्ध मेरठ आपकी जन्मभूमि और कर्मभूमि है। इस नगर ने आपके व्यक्तित्व एवं साहित्यिक चिंतन को किस प्रकार प्रभावित किया?

 

मुक्ता जी :- सच है कि मेरठ नगरी ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक व साहित्यिक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध है जो कि निशित रूप से मेरे लिए गौरव का विषय है। वर्तमान समय के साथ पूर्व में भी मेरठ में ऐसे ऐसे साहित्यकार हुए हैं जो कि देश की धरोहर कहे जा सकते है । मैं ईश्वर को धन्यवाद करती हूँ कि उन्होने मुझे ऐसे स्थान पर जन्म दिया जिसका इतिहास रामायण काल महाभारत काल के साथ साथ सिन्धु घाटी सभ्यता से भी जुड़ा है 

 

 

 

प्रश्न २. साहित्य के प्रति आपकी रुचि का प्रथम अंकुर कब और किन परिस्थितियों में फूटा? लेखन की प्रेरणा आपको कहाँ से प्राप्त हुई?

 

मुक्ता जी :- साहित्य के प्रति बचपन से ही लगाव रहा जहाँ मेरे अन्य सहपाठी किताबों से दूर-दूर भागते थे, मैं अपने कोर्स की किताबों वाली कविताओं और कहानियों को बड़े चाव से पढ़ती थी। इसी अभिरूचि के साथ ही मैंने भक्ति रचनाएं लिखनी आरंभ कीं। 

मैने 16 वर्षों तक कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय में अध्यापन कार्य किया है। वहाँ रहते हुए बच्चों के साँस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए नाटक स्क्रिप्ट से लेकर कविताएं व कहानियाँ लिखती थी। 

फिर कोरोना काल में अपनी रचनाएं फेसबुक पर अपलोड करना आरंभ किया तो पहचान व लोकप्रियता भी मिलने लगी और आज मैं आप सबके सम्मुख यहाँ इस समृद्ध मंच पर उपस्थित हूँ। 

 

 

 

प्रश्न ३. गृहिणी, माँ और साहित्य-साधिका—इन तीनों उत्तरदायित्वों के मध्य आपने अपनी रचनात्मक साधना को किस प्रकार निरंतर बनाए रखा?

 

मुक्ता जी :- गृहिणी, माँ और साहित्य साधिका – तीनों ही भूमिकाएं मेरे लिए अति महत्वपूर्ण हैं। परन्तु जब भी प्राथमिकता की बात आती है तो मेरा चुनाव माँ की भूमिका का ही होता है। साहित्य साधना तो बंद नहीं करती, परन्तु आयोजनों में जाना टाल देती हूँ या बहुत कम कर देती हूँ। 

 

 

 

प्रश्न ४. आपने हिंदी, अंग्रेज़ी, समाजशास्त्र एवं शिक्षाशास्त्र जैसे विविध विषयों का अध्ययन किया है। इन विषयों ने आपकी साहित्यिक दृष्टि और लेखन-शैली को किस प्रकार समृद्ध किया?

 

मुक्ता जी :- हिन्दी व अंग्रेजी दोनो साहित्य का अध्ययन करने का लाभ यह हुआ कि सोच का दायरा बहुत विस्तृत व परिष्कृत हो गया। दोनो ही साहित्य में श्रेष्ठ साहित्यकारों को विस्तृत रूप से पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसका निश्चित रूप से मेरे लेखन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। 

समाज को समझकर ही रचनाकार समाज के लिए उपयोगी रचनाएं प्रदान कर सकता है। इस संदर्भ से समाजशास्त्र कार्यरत अध्ययन उपयोगी सिद्ध हुआ।

 

 

 

प्रश्न ५. गीत, ग़ज़ल और मुक्तक—इन तीनों विधाओं में आपकी सशक्त अभिरुचि है। इनमें से कौन-सी विधा आपके अंतर्मन के सबसे अधिक निकट है और क्यों?

 

मुक्ता जी :- सच कहूँ तो यह तीनों ही विधाएं मेरे मन के बहुत निकट हैं किसी एक विधा का चयन करना बड़ा कठिन कार्य है परन्त यदि किसी एक ही विधा का चयन करना पड़े तो वह ग़ज़ल है। मै इसको बड़ी सहजता से लिख पाती हूँ। इसका कथ्य बहुत विस्तृत होता है। हम ग़ज़ल के हर शेर में अलग-अलग विषय ले सकते हैं। 

 

 

 

प्रश्न ६. आपकी अत्यंत लोकप्रिय रचना “जब से मोहन गये हैं सुनो राधिके” की भावभूमि क्या है? यह रचना किन अनुभूतियों और परिस्थितियों में जन्मी?

 

मुक्ता जी :- एक बार मथुरा और वृन्दावन जाना हुआ तो अनुभव किया कि वहाँ श्रीकृष्ण से अधिक राधा का नाम गूँज रहा है। 

तब मन में यह भाव आया कि अवश्य राधा रानी ने ब्रजमंडल के लिए कृष्ण से भी बढ़कर कुछ किया होगा और वह उन्होंने कैसे किया किसकी प्रेरणा से किया। बस यही बताने का प्रयास मैंने इस गीत के माध्यम से किया है। 

 

 

  

प्रश्न ७. आपकी रचनाओं में प्रेम, विरह, पारिवारिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत सुंदर चित्रण मिलता है। इन भावों का मूल स्रोत क्या है?

 

मुक्ता जी :- मेरा मानना है कि व्यक्ति जो कुछ अनुभव करता है, उसकी अभिव्यक्ति किसी न किसी माध्यम से करता ही है और किसी भी व्यक्ति के जीवन में सुख दुख प्रेम विरह आदि सभी अनुभूतियाँ होती हैं। सभी परिस्थियों से गुजरना हुआ, इसीलिए मेरी रचनाओं में आपको ये सभी रंग दृष्टिगोचर हो रहे हैं। 

 

 

 

प्रश्न ८. “किन्नर के जज़्बात”, “पिता”, “माँ की छाया”, “रिश्ते-नाते” जैसे साझा संकलनों में आपकी सहभागिता रही है। आपकी दृष्टि में साझा संकलन साहित्य, समाज और नवोदित रचनाकारों के लिए कितने उपयोगी हैं?

 

मुक्ता जी :- साझा संकलन सच में बहुत उपयोगी है। उन नवोदित कलाकारों के, जो कि अपना स्वयं का संकलन किसी भी कारण से नहीं निकाल सकते, चाहे वह समय का अभाव हो या आर्थिक कारण हो।

इससे नवोदित कलाकारों का आत्मविश्वास सुदृढ़ होता है रचनाकारों के मध्य अपना नाम देखकर बहुत अच्छा लगता है। 

 

 

प्रश्न ९. आपने अनेक साहित्यिक मंचों पर अपनी सृजन-यात्रा को आगे बढ़ाया। आप किस मंच को अपनी साहित्यिक यात्रा की प्रथम सीढ़ी मानती हैं? साथ ही, सतमोला कवियों की चौपाल में शीर्ष कवियों के साथ काव्यपाठ का आपका अनुभव कैसा रहा?

 

 

मुक्ता जी :- कोरोना काल से पहले मेरा लेखन बस डायरी तक ही सीमित था। फिर जब मैंने फेसबुक पर अपनी रचनाएं पोस्ट करनी शुरू कीं, तो अनेक साहित्यिक मंचों से जुड़ाव हुआ जैसे काव्योदय, कलम के जादूगर, राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच, काव्यांचल आदि मंचो का मेरी साहित्यिक यात्रा में बहुत योगदान रहा। मैं उन सबको धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ। 

सतमोला कवियों की चौपाल में दो बार जाना हुआ और पहली बार नवोदित कवि की श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला वहाँ जाकर बहुत अच्छा लगा। 

 

 

 

प्रश्न १०. आपकी दृष्टि में लेखन का वास्तविक उद्देश्य क्या है? क्या साहित्य आज भी समाज की दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखता है?

 

मुक्ता जी :- लेखन मेरे विचार से तो मन के भावों का भौतिक प्रस्फुटन है। जो भी सहज मन के भाव हैं, उनको लिखित रूप में व्यक्त करना ही साहित्य है। 

परन्तु साहित्य को समाज दर्पण माना जाता है। अतः साहित्यकार का धर्म है कि वह सामाजिक विसंगतियों व कुरीतियों पर अपने लेखन के माध्यम से दूर करने का प्रयास करे। लेखन में वह शक्ति है, जिससे समाज की दशा व दिशा दोनों बदली जा सकती हैं।

 

 

 

प्रश्न ११. स्वतंत्रता-पूर्व, स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात तथा अमृत महोत्सव के वर्तमान काल इन तीनों कालखंडों में हिंदी साहित्य के विकास का आप किस प्रकार तुलनात्मक मूल्यांकन करती हैं? वर्तमान हिंदी साहित्य की सबसे बड़ी आवश्यकता क्या है?

 

मुक्ता जी :- स्वतंत्रता-पूर्व के साहित्य का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनमानस के भीतर राष्ट्रीय चेतना का जागरण करना व सामाजिक कुरीतियों व विसंगतियों पर प्रहार करना था। ऐसे साथ-साथ प्रकृति प्रेम भी मुख्य विषय था। 

स्वतंत्रता के पश्चात का अधिकांश साहित्य विभाजन के दंश विकास के सुझावों सामाजिक समरसता व भविष्य की नवीन संभावनाओं पर आधारित था।

इस काल में नई कहानी नई कविता का भी उदय हुआ। 

वर्तमान समय का साहित्य पर्यावरण विमर्श दलित विमर्श स्त्री विमर्श व डिजिटल टेक्नोलॉजी के मानव जीवन पर होने वाले प्रभाव पर आधारित है।

वर्तमान साहित्य की सबसे बड़ी आवश्यकता समकालीन जीवन के यथार्थ तकनीकी बदलावों और युवा पीढ़ी की संवेदनाओं से जुडना है। 

 

 

 

प्रश्न १२. हजारी प्रसाद द्विवेदी, मुंशी प्रेमचंद, शिवानी तथा सूर, तुलसी, प्रसाद, निराला और दिनकर जैसे महान साहित्यकारों की लेखनी से आपने क्या सीखा? इनमें कौन-से गुण आपको सर्वाधिक प्रेरित करते हैं?

 

मुक्ता जी :- उपरोक्त सभी रचनाकारों की जो बात मुझे सबसे अच्छी लगती है, वह है उन की स्वाभाविकता और सहजता।

और तुलसीदास जी की मैं बहुत बड़ी फैन हूँ इतना महान ग्रंथ उनकी चौपाइयों की हर पंक्ति का एक अलग ही गूढ़ अर्थ निकलता है। एक एक पंक्ति स्वयं में महाकाव्य है।

और हजारी प्रसाद द्विवेदी जी व शिवानी की रचनाओं का जो फ्लो है मुझे वह मंत्रमुग्ध कर देता है।

और निराला जी की रचना राम की शक्ति पूजा मेरी फेवरिट रचना है।

 

 

  

प्रश्न १३. यदि आपको अपने किसी प्रिय साहित्यकार से प्रत्यक्ष मिलने का अवसर मिले, तो आप किससे मिलना चाहेंगी और उनसे क्या जानना चाहेंगी?

 

मुक्ता जी :- मैं मिलना चाहूँगी रामधारी दिनकर जी से और शिवानी जी से।

 रामधारी दिनकर सच में ओज के दिनकर हैं और शिवानी जी की कोई भी कहानी या उपन्यास पढना आरंभ कीजिए आपको कोई और कितना की काम हो आप अब समाप्त किए बिना छोड़ ही नहीं सकते। 

मैं यही जादू सीखना चाहूँगी।

 

 

 

प्रश्न १४. बचपन की कोई ऐसी मधुर और रोचक स्मृति, जिसे याद करके आज भी आपके चेहरे पर सहज मुस्कान आ जाती हो, हमारे दर्शकों के साथ साझा कीजिए।

 

मुक्ता जी :- ये घटना मेरे मामा जी के घर की है

मैं और मेरे मामाजी की बेटी एक साथ ही रहते थे खेलना कूदना पढ़ना सोना सब साथ-साथ। 

एक दिन हम दोनो आम के बाग में गए । हम दोनों ही उस समय बहुत छोटे थे 10 वर्ष के आसपास रहे होंगे। आम के बाग के पास ही एक हरी मिर्च का खेत था। हम दोनो उन्हें तोड़कर खाने लगे। मिर्ची बहुत छोटी-छोटी थीं बिल्कुल भी तीखी नहीं थीं । पर एक मिर्च बड़ी तीखी निकल आई आँसू निकलने को हो गए। मेरी बहन ने पूछा तो मैने कहा बहुत मीठी है और उसके माँगने पर बहुत अनमने ढंग से देने का प्रदर्शन किया। मैने जैसे ही उसको मिर्च दी उसने वो एक बार में ही चबा डाली और फिर जो उसकी हालत हुई मुझे अब भी सोचकर हँसी आ जाती है।

 

 

 

प्रश्न १५. अंत में, यदि आपको अपने सम्पूर्ण जीवन को किसी एक कविता, गीत या ग़ज़ल के शीर्षक में व्यक्त करना हो तो वह क्या होगा और क्यों? साथ ही, नवोदित रचनाकारों, पाठकों तथा समाज के लिए आपका प्रेरक संदेश क्या होगा?

 

मुक्ता जी :- मेरे विचार से सम्पूर्ण जीवन को किसी एक रचना में व्यक्त करना बहुत मुश्किल है, परंतु कुछ गीत व ग़ज़ल मेरे मन के बहुत निकट हैं।

नवोदित रचनाकारों से मेरा कहना है कि लिखने के साथ साथ पढ़ने व सुनने का अभ्यास भी आवश्यक है धैर्य रखें सफलता एक दिन में नहीं मिलती।

समाज के लिए मेरा संदेश है कि पर्यावरण का ध्यान रखें। अपने आसपास स्वच्छता रखें नागरिक कर्तव्यों का पालन करें व देश प्रेम को सर्वोपरि रखें। 

धन्यवाद 🙏🙏

 

 

✍🏻 वार्ता : श्रीमती मुक्ता शर्मा 

 

 

 

कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं मेरठ की अभूतपूर्व कवयित्री श्रीमती मुक्ता शर्मा जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇

 

https://www.youtube.com/live/NEQ5ECnDyEE?si=Y5nGhkd1B_vX0hU4

 

 

इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी। 

 

मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये। 

राधे राधे 🙏 🪷 🙏 

 

✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️ 

 

✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन 

 

🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी 

 

कल्प भेंटवार्ता

One Reply to “!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मुक्ता शर्मा” !!”

  • पवनेश

    राधे राधे, श्रीमती मुक्ता शर्मा जी के साथ कल्प भेंटवार्ता कार्यक्रम बहुत आनंददायक रहा। सादर 🙏

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