!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण” !!
- कल्प भेंटवार्ता
- 09/08/2026
- लेख
- साक्षात्कार
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण” !!
सम्पर्क सूत्र – 9425814756
!! “मेरा परिचय” !!
नाम :- डॉ उषा अग्रवाल उपनाम जलकिरण
माता/पिता का नाम :- स्व श्री चिरौंजी अग्रवाल
श्री मती गोमती देवी अग्रवाल
जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :- छतरपुर
1.7.1958
पति/पत्नी का नाम :- श्री भारत भूषण अग्रवाल
शिक्षा :-एम ए पी एच डी
व्यावसाय :- सेवा निवृत प्राध्यापक
वर्तमान निवास :- छतरपुर
आपकी मेल आई डी :- ushaagrawal8887@gmail.com
आपकी कृतियाँ :- हमारे विषय से संबंधित तीन कृतियाँ
साहित्यक कृतियाँ-4
आपकी विशिष्ट कृतियाँ :- गज़ल हंसते जख्म
आपकी प्रकाशित कृतियाँ :- 3+4=7
पुरूस्कार एवं विशिष्ट स्थान :-
महादेवी वर्मा
!! “मेरी पसंद” !!
उत्सव :- सेवा अपने से सभी बड़ों की
भोजन :- शुद्ध शाकाहारी
रंग :-सफेद हल्के रंग
परिधान :-
स्थान एवं तीर्थ स्थान :- सबसे बड़ा घर
लेखक/लेखिका :-लेखिका
कवि/कवयित्री :-
उपन्यास/कहानी/पुस्तक :- कहानी पत्रिकाओं में
कविता/गीत/काव्य खंड :-
कविता/ गीत/ छंद काव्य
खेल :- दौड़,
फिल्में/धारावाहिक (यदि देखते हैं तो) :-हाँ
आपकी लिखी हुई आपकी सबसे प्रिय कृति :- हंसते जख्म जीवन संजीवनी
!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण” के उत्तर !!
प्रश्न १ –छतरपुर की संस्कारमयी धरती से आरंभ हुई आपकी जीवन-यात्रा शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र तक किस प्रकार पहुँची?
ऊषा जी :- मेरा पूरा जीवन छतरपुर में ही बीता बहुत सुव्यवस्थित तरीके से साहित्य मेरा स्वांत: सुखाय है समाज को रचनाएँ पसंद आती है में उनकी बहुत बहुत आभारी हूँ
मेरी सेवानिवृत्ति का समय नजदीक था मेरा बेटा कि उसके बाद आप क्या करेंगी माँ बस चल ही रहा था कि एक रात नींद नहीं आई और कलम उठा कर मन के भावों को पिरो दिया तब सभी कहने लगे कब से लिखते मैने कहा आज से ही और सबसे पहले पहली बार दिल्ली कवि शैल भदावरी जी के कवि सम्मेलन में सरिकत की थी।
प्रश्न २ –आपने उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। एक शिक्षक और साहित्यकार के रूप में आपके अनुभवों ने आपके व्यक्तित्व को किस प्रकार समृद्ध किया?
ऊषा जी :– प्राध्यापक बन कर परिवार और छात्रों के साथ रही जिनसे आदर सम्मान मिला और साहित्यकार बन के आप के बीच में हूँ।
प्रश्न ३ –छतरपुर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध नगर है। पर्यटन की दृष्टि से आप अपने शहर छतरपुर को किस प्रकार चित्रित करना चाहेंगी और वहाँ की कौन-सी विशेषताएँ लोगों को आकर्षित करती हैं?
ऊषा जी :- छतरपुर स्वयं जहाँ महाराजा छत्रसाल जैसे प्रतापी राजा हुए जिनके हृदय में मानवता संवेदनाएं अमिट थीं जितना लिखा जाए उतना कम है
उसके बाद धुबेला खजुराहो जटाशंकर धाम बाबा बागेश्वर धाम सभी आकर्षण का केन्द्र है।
प्रश्न ४ –आपका उपनाम “जलकिरण” बहुत सुंदर और अर्थपूर्ण है। इस नाम के पीछे कौन-सी भावना और प्रेरणा जुड़ी हुई है?
ऊषा जी :- किसी मेरे मित्र को मेरा व्यक्तित्व वैसा लगा और अब तो एक पटल साहित्य है जिसने इस पर छंद सृजित करके पूरी तरह से जलकिरण नाम की सार्थकता प्रदान कर दी है।
प्रश्न ५ –आपने शैक्षिक विषयों पर आधारित कृतियों के साथ-साथ साहित्यिक क्षेत्र में भी सृजन किया है। साहित्य की ओर आपका झुकाव किस प्रकार विकसित हुआ?
ऊषा जी :- साहित्य के प्रति झुकाव बचपन से था बचपन में अपने पिताजी के साथ कवि सम्मेलन सुनने जाया करती थी और ये रुचि अंतस में थी बस कलम उठाने में देर लगी
विषय से जुड़ी पुस्तकें पहले लिखीं बाद में साहित्य के क्षेत्र में आ गई।
प्रश्न ६ –आपकी चर्चित कृति “हँसते ज़ख्म” एक विशेष पहचान रखती है। इस कृति की रचना के पीछे कौन-से भाव और अनुभव जुड़े रहे?
ऊषा जी :- गज़ल मुझे लिखना बहृ में नहीं आती था जब किसी ने कहा कि आप नहीं लिख सकती है तो मैने बहुत मेहनत की उसके लिए गुरु ढ़ूॅंढा और भाई जैसा गुरु मुझे मिल गया जिसने मुझे सिखाया इसलिए यह कृति मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न ७ –आपकी दृष्टि में साहित्य जीवन के दर्द और संघर्षों को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ आशा का संचार किस प्रकार करता है?
ऊषा जी :- साहित्य आपके अंतस की मनोदशा को भावों से लेखनी में उतार देती है जिससे बहुत सुकून मिलता है।
प्रश्न ८ –आपने कविता, गीत और छंद जैसी विधाओं में लेखन किया है। इनमें से कौन-सी विधा आपके हृदय के सबसे अधिक निकट है और क्यों?
ऊषा जी :- छंद मुक्त कविता वह भाव को पूरी तरह से कहने में सक्षम होती है।
प्रश्न ९ –एक प्राध्यापक के रूप में आपने अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। क्या शिक्षा और साहित्य दोनों का उद्देश्य आपको मानव निर्माण से जुड़ा हुआ दिखाई देता है?
ऊषा जी :- विद्यार्थीयों का मार्गदर्शन करना संस्कार और अच्छे साहित्य को पढ़ने के लिए पुस्तक से ज्ञान अर्जित करो तभी आप एक अच्छे मानव बन सकते हो। ये उद्देश्य हमारा रहा है।
प्रश्न १० –आपको महादेवी वर्मा सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये सम्मान आपकी साहित्यिक यात्रा को किस प्रकार प्रेरणा प्रदान करते हैं?
उत्तर-महादेवी वर्मा ,कोविड सम्मान सबसे प्रेरणास्रोत हमारे लिए है इंसान को इंसानियत और मानवता को सदैव ध्यान में रखना चाहिए।
प्रश्न ११ –आपके अनुसार आज के समय में साहित्यकार की समाज के प्रति क्या भूमिका होनी चाहिए?
ऊषा जी :- ये तो अपनी अपनी सोच है मै अपनी बात करती हूँ लेखन ऐसा हो जो समाज को दिशा दे सके।
प्रश्न १२ –आपकी रचनाओं में जीवन के अनुभव और मानवीय संवेदनाएँ दिखाई देती हैं। क्या आपके निजी अनुभव आपकी लेखनी को दिशा देते हैं?
ऊषा जी :- जीवन के अनुभव और मेरा विषय था समाजशास्त्र जिससे समाज और परिवार की समस्याओं ने ध्यान केंद्रित किया।
प्रश्न १३ –वर्तमान समय में हिन्दी साहित्य के सामने आपको कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ और संभावनाएँ दिखाई देती हैं?
ऊषा जी :- आप सभी देख रहे हैं कि कविताओं के माध्यम से किन किन शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है जहाँ न तो संवेदनाएं है और न ही कोई मूल्य तो ये सबसे बड़ी चुनौती है।
प्रश्न १४ –आपकी दृष्टि में एक श्रेष्ठ रचनाकार की पहचान क्या है—संवेदना, कल्पना, अध्ययन या जीवनानुभव?
ऊषा जी :- एक श्रेष्ठ रचनाकार में जब संवेदनाएं होगी तभी वह कल्पना की उड़ान भर सकहै जीवन के अनुभव तो बहुत जरूरी है।
प्रश्न १५ –अंत में, नवोदित साहित्यकारों और हमारे श्रोताओं के लिए आपका प्रेरणादायी संदेश क्या होगा?
ऊषा जी :- जो बात आपके मन को अच्छी न लगे और लिखने या पढ़ने के लिए कहा जाये कभी अपनी आत्मा से समझौता मत करो
✍🏻 वार्ता : श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण”
कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं छतरपुर, मप्र की कवयित्री श्रीमती ऊषा अग्रवाल “जलकिरण” जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇
https://www.youtube.com/live/pn5EyEMcyw8?si=DBdQXeyXHz-McrDs
इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये।
राधे राधे 🙏 🪷 🙏
✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️
✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी
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