Dark

Auto

Light

Dark

Auto

Light

पिता का प्रेम, पसीना और हम…

पिताजी बड़े दिल वाले थे यानि बड़ी से बड़ी गलती पर भी कुछ देर गुस्सा दिखाने के बाद माफ कर देते । वे अपनी तकलीफ तो बताते ही नहीं थे बल्कि हमारी हर जरूरत और तकलीफ को बहुत ही गम्भीरता से लेते थे । वे स्वयं अनुशासित रह हम सभी भाई बहनों को भी अनुशासन में रहना सीखा गये जिसके सुखद परिणाम का हम सभी भाई बहन आज आनन्द उठा रहे हैं ।

Continue Reading

हर मुस्कान का आधार, हमारा परिवार

संयुक्त परिवार का हिस्सा बनें क्योंकि जब परिवार में एकजुटता रहेगी तभी एक मजबूत समाज निर्माण हो पायेगा जो आज के समय की आवश्यकता है।

Continue Reading

शास्त्रीजी की जिन्दगी से हमें बहुत कुछ सीखने मिलता है

माला ग्रहण पश्चात बड़े ही धीमी आवाज में शास्त्री जी ने कुलदीप नैयर से पूछा कि ये महिला कौन है।यह सुन कुलदीपजी ने शास्त्री जी की तरफ हैरानी से देखा। फिर बोले कि ये महिला मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी हैं। शास्त्री जी फिर भी न समझ पाये कि ये महिला आखिर में कौन है।

अन्त में शास्त्रीजी ने वहाँ उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुये सार्वजनिक तौर पर अपनी स्पष्टवादिता आदत अनुसार मीनाकुमारीजी की ओर मुखातिब हो माफी माँगते हुये बोल दिया कि माफ़ करियेगा मीना कुमारी जी मैं आपको नहीं जानता। मैनें आपका नाम पहली बार सुना है। शास्त्री जी की यह बात सुन कर मीना जी के चेहरे पर शर्मिंदगी का भाव आ गया था।

Continue Reading

प्रकाशनार्थ : नारी समानता दर्जा की अधिकारी

आजकल हम सभी क्षेत्र में नारियों की भूमिका देख रहे हैं। और ये सब जगह अच्छी व्यवस्थापक भी साबित हो रही हैं अर्थात अपने दायित्व को हर क्षेत्र में कुशलतापूर्वक निभा रही हैं। लेकिन इतने बड़े देश में नारियों व पुरुषों के अनुपात में असमानता स्पष्ट दिख रही है।अतः नारियों को अपने अस्तित्व को स्थापित करने के लिये अपने अन्याय के खिलाफ संगठित हो कर खड़ा होना होगा। जबतक नारियां स्वयं अपने अन्याय के खिलाफ खड़ी नहीं होंगी व्यवस्था इसी तरह चालू रहेगी।

Continue Reading

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः

याद रखें हमारी सफलता के पीछे हमारे शिक्षक का हाथ होता है। हमारे माता-पिता की तरह ही हमारे शिक्षक के पास भी ढ़ेर सारी व्यक्तिगत समस्याएँ होती हैं लेकिन फिर भी वह इन सब को दरकिनार कर रोज स्कूल और कॉलेज आते हैं तथा अपनी जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वाह करते हैं।इसका ज्वलंत उदाहरण यही है कि बीते सालों में वैश्विक महामारी कोरोना काल में भी सभी शिक्षक अपने-अपने निजी आवास से ही आज की उन्नत प्रोद्दोगिकी के सहारे अपने शिष्यों का मार्गदर्शन कर रहे थे।

Continue Reading

नारी एक-दायित्व अनेक,पर ठोस सशक्तिकरण बाकी…

आज के परिप्रेक्ष्य में महिलाओं के सशक्तिकरण का सवाल बहुत मायने रखता है क्योंकि जब महिलायें सशक्त होंगी तभी वे अपने घर के साथ साथ समाज को भी सशक्त बना पायेंगी

Continue Reading

प्रकाशनार्थ : अमृत तुल्य आयुर्वेदिक औषधी सितोपलादि चूर्ण

चरक संहिता में उल्लेखित सितोपलादि चूर्ण पर विस्तार से विवरण देने के पहले महर्षि चरक, जो  “चरक संहिता” के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक थे,के बारे में संक्षिप्त जानकारी यहाँ साँझा करना उचित रहेगा। वैसे तो महर्षि चरक द्वारा अनेक औषधियों को प्रतिपादित किया गया है और सभी की सभी काफी गुणकारी हैं लेकिन सितोपलादि चूर्ण एक ऐसी औषधि है जिसे अमृत तुल्य माना गया है।   अब सबसे पहले …

Continue Reading

प्रकाशनार्थ : राष्ट्रीय ध्वज

प्रकाशनार्थ : राष्ट्रीय ध्वज     स्वतन्त्रता दिवस के पहले प्रधानाचार्यजी के निर्देशानुसार कक्षा में मास्टर जी ने स्वतन्त्रता दिवस से सम्बन्धित एक अत्यन्त सरल सवाल पूछा –   ‘बच्चों, बताओ तो भारत के राष्ट्रीय ध्वज में कितने रंग हैं  ?’   ‘तीन ।’ सारे बच्चों के स्वर कक्षा में एक साथ गूँजा। लेकिन होनहार बच्चों में से एक बच्चा अपना हाथ उठाये शान्त बैठा मास्टर जी की  ओर …

Continue Reading