!! “व्यक्तित्व परिचय – श्रीमती भावना भारद्वाज” !!
एक साहित्यकार की रचनाएं उसकी भावनाओं का प्रतिबिंब होती हैं। रचनाओं के माध्यम से वह अपनी निहित भावनाओं को प्रकट करता है। मेरी रचनाएं देश के विकास में जो बाधाएं उत्पन्न करते हैं,देश में भ्रष्टाचारफैलाते हैं या देश की छवि को खराब करते हैं उनके विरोध में बहुत सी रचनाएं लिखी हैं जो हम साहित्यकारों का कर्तव्य भी है।
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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती नीलम झा “नील” जी” !!
मैं इस मंच के माध्यम से अपने पाठकों को दर्शकों को और सभी लेखकों को यही कहना चाहूंगी कि समाज या देश की उन्नति हमारी भी जिम्मेदारी बनती है। हम जिस भी क्षेत्र से जुड़े हैं और जितना भी हम सक्षम हैं, उसके आधार पर हमें प्रयत्नशील रहना चाहिए अपने राष्ट्र, अपने समाज के उत्थान के लिए ।
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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती सुशीला चनानी” !!
मै बहुत पैरेलल व कलात्मक बांग्ला व हिन्दी फिल्में देखती थी पर अब वो सिलसिला समय और उर्जा के अभाव में समाप्त प्रायः है।
यही बात संगीत अभ्यास पर भी लागू होती है।
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!! “व्यक्तित्व परिचय : डॉ ओमकार साहू “मृदुल” जी” !!
नैसर्गिकता से परिपूर्ण प्रकृति की गोद में स्थित। एक ओर जिसे माता कुदरगढ़ी का आशीर्वाद प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर काले सोने अर्थात कोयले की खदानें ऊर्जा के भंडार बढ़ाते है।
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🌷!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती संध्या बक्शी जी” !! 🌷 🌷
गद्य लिखने के लिए पर्वत जैसा धैर्य चाहिये। जो मुझमें नहीं है। कुछ समयाभाव भी रहता है। बालक छोटा है तो उसको पढ़ाने का दायित्व भी है।
कविता मुझे बहुत प्रिय है। मेरे लिए कविता और जादू में अधिक अंतर नहीं है।
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🌷!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री गजेन्द्र हरिहारनो “दीप” जी” !! 🌷
प्रश्न 18. लेखन के अतिरिक्त ऐसा कौन सा कार्य है, जो आप को विशेष प्रिय है?
गजेंद्र जी :- बिना किसी मान -सम्मान पाने के लोभ से दूर रहते हुए यथा संभव समाज सेवा करना मुझे आत्मिक सुख प्रदान करता है।
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व्यक्तित्व परिचय श्रीमती शिवा सिंघल जी
अपनी रचनाओं को कभी किसी को कम नहीं समझते। कई बार होता है कि हमारी रचना अच्छी होती है फिर भी कमेंट नहीं मिलाते हैं। कई बार लोग या तो रचना पढ़तेही नहीं हैं। या फिर नाम के आधार से टिक करते हैं ।
आज नहीं तो कल हमारी रचना को प्राथमिकता अवश्य मिलेगी यही सोचकर लिखते रहेंगे और आगे बढ़ते रहे।
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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमान राजीव रावत” !!
रावत जी :- किसी मंच की सार्थकता तभी है, जब वह अपने सिद्धांतों के साथ समझौता न कर के एक प्रेरणा बन कर समाज और देश और व्यक्ति के बीच एक कड़ी बन कर रहे और कल्पकथा से यही आशा है कि विभिन्न आयोजनों द्वारा नये नये लेखकों को उनके विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता दे और प्रोत्साहन दे। आप के कार्यक्रमों की सराहना भी करता हूं।
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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव जी” !!
प्रश्न 20. लेखन के अतिरिक्त ऐसा कौन सा कार्य है, जो आप को विशेष प्रिय है?
पूर्णिमा जी :- मुझे ड्राइंग और स्केचिंग करने, संगीत सुनने के अतिरिक्त गार्डेनिंग में अभिरुचि है।
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🌷!! व्यक्तित्व परिचय :डॉ सुशीला जोशी “विद्योत्तमा” जी” !! 🌷
आलोचना के लिए किसी रचना के भीतर उतरना पड़ता है ताकी उसकी हर बारीकी को जाना जायl लेकिन आज इतना समय किसी की रचना पर खर्च कौन करता हैl आधुक युग से पहले जितने भी लेखक या कवि प्रसिद्ध हुए उनमें आलोचक ही बैठें थेl आज आलोचना भी किसी न किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित हैl इसलिए अपने आलोचक स्वयं बनेl
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