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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती साधना मिश्रा “लखनवी” !!

हम यदि लेखक हैं यदि लेखन कार्य करते हैं तो हम जो भी लिखे वह समाज व देश के हित में लिखे ।
एकाग्रता लक्ष्य और समर्पण की भावना सर्वोपरि हो। और जितना लिखे उससे कही ज्यादा उत्कृष्ट पठन,-पाठन, मनन-चिंतन करें।

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📹 “!! कल्प भेंटवार्ता :- श्री सुरेंद्र कुमार अरोड़ा जी !!” 📝

📹 “!! कल्प लाइव भेंटवार्ता में वरिष्ठ चिंतक एवं सामाजिक साहित्यकार श्री सुरेंद्र कुमार अरोड़ा जी !!” 📝

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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री भास्कर सिंह माणिक” !!

कल्पकथा परिवार ने कम समय में बहुत लंबी यात्रा की है। कल्पकथा परिवार ने कलमकारों को जोड़ने का जो संकल्प उठाया था उसे साकार करते हुए तीन वर्ष पूर्ण किए हैं और आगे भी करेगा। मुझे अनवरत कल्पकथा परिवार ने अपना प्यार, स्नेह और सान्निध्य दिया है और आगे भी देता रहेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री राज किशोर वाजपेयी “अभय” जी” !!

वाजपेयी जी :- लोक-चेतना संवर्धन और साहित्य-सेवा का प्रकल्प है कल्प-कथा।
सफल तीन वर्षो की साधना हेतु मैं इसके संचालकों को हार्दिक बधाईयां देता हूं और हार्दिक अभिनन्दन भी करता हूं।

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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री चन्द्रप्रकाश गुप्त “चन्द्र” ज़ी” !!

कल्पकथा के माध्यम से निरंतर साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय सकारात्मक साधना का पुनीत कार्य किया जा रहा है जो मेरे विचार से समाज और साहित्य के लिए अनुकरणीय है आपकी सतत साधना साहित्य को नव नूतन आयाम प्रदान कर साहित्य को गौरवान्वित कर रही है।
मेरी अनंत हार्दिक मंगल कामनाएं हैः।

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🦚 !! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती नवनीता चौरसिया” !! 🦚

कोई भी अनुभवी विद्वान जब हमें हमारी त्रुटियां बताता है तो इससे हमारे लेखन में सुधार ही होगा।
यदि हमें सिर्फ प्रशंसा-प्रशंसा ही मिलेगी तो हममें अभिमान आ सकता है या हमें सिर्फ नकारात्मक समीक्षा ही मिली तो हमारा मन निराशा से भर जाएगा। रचना में उत्कृष्ट चलाने के लिए निष्पक्ष समीक्षा बहुत आवश्यक है।
कबीर दास जी ने भी कहा है- निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी बिन साबुना, निर्मल हुआ सुबाय।

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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री सुन्दरलाल जोशी “सूरज” जी” !!

जब मैं चित्तौड़गढ़ घूमने गया तो हल्दीघाटी गया। संग्रहालय देखा और मन हुआ कि कुछ पंक्तियां महाराणा प्रताप पर लिखूँ।

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!! “व्यक्तित्व परिचय – मुस्कान केशरी” !!

नए कवियों से हम अधिक प्रभावित होते हुँ क्योंकि मेरा मानना है कि नए नए पौधे पर अगर ध्यान दिया जाए तो वो मजबूत वृक्ष बन जाता है और ध्यान नहीं दिया जाए तो वो खत्म हो जाएगे।

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!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री सूर्येन्दु कुमार मिश्र “सूर्य” जी” !!

जी मैं इस मामले में मध्यमार्गी हूं। मुझे लगता है कि भाव पक्ष के साथ कला पक्ष का संतुलन भी जरूरी है तभी कविता में आनंद आता है। फिर भी भाव पक्ष ज्यादा महत्वपूर्ण है, अगर भावनाएं पैदा और प्रेषित नहीं होगी तो कविता ही बिखर जाएगी।

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