
जय ज्वाला देवी मईया
- पवनेश
- 15/04/2024
- काव्य
- जय ज्वाला माई की
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जय ज्वाला माई
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जय ज्वाला माई
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शीर्षक: खानाबदोश ( बंजारे ) खाने का ना होश है,जिंदगी खानाबदोश है ।चिथड़ों से ढकते है लाज को,चुप रहकर कहते है अपनी बात को । टुकड़ों पर पलते है बच्चे,चलते है, रास्ते तो है, मगर कच्चे ।अजब जिंदगी का ये मोड़ है,इसे चलाता तो कोई और है । कारवां गमों से रहा है भर,खाली हाथ मुझे रहा है कर ।आज …
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आदमी अंदर-अंदर दु:खी है,औरों के सामने है खुश। अंदर से है टूटा- टूटा,अपनों के लिए है खुश। (खुशी) हंसती है अपने आने पर,वो रोता है उसे पाने पर । वो सोता तो है ,(सोने )को ,पर जागता है उसे पाने को । वो दिखना कोई चाहता है,पर अंदर से देखें तो,वो दिखता है कोई और । कौन सुनता है उसकी …
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शीर्षक: यहां कौन तेरा है ? हम आएं है किस जहां से,किस जहां में हमारा गमन होगा।किन रिश्तों को छोड़ आए पीछे,किन नातों का आगमन होगा। जीवन के रहते रिश्ते-नाते निभाते ,मृत्यु उपरांत किसी नए सफर को निकल जाते ।किस जन्म में कौन था अपना, कौन पराया, भूल चुके है अब सारे वादे, सारे रिश्ते-नाते । सफ़र जीवन-मरण के हर …
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पौने का होना ( पूरे से कुछ कम ) जीवन में जो कुछ मिला,पौना ही रह गया,दी सांस अगर , जीना था, सौ वर्ष मगर,पौना ही रह गया, सोचा था खेलेंगे मन भर,मां ने जो लगाई आवाज़खेल अधूरा ही रह गया,पढ़ पढ़ कर काटी रात सभीआया निष्कर्ष तोपौना ही रह गया, पाया तो रिश्तों में कुछ न ,लोगों को खोना …
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शीर्षक: सप्तशती सारांश जो प्रतापी था, वह स्वजन से हारा गया,स्व प्रजा का बोझ ना, अब उससे धारा गया ।रण से हारा, लौट रहा था नगर को,मन से हारा, बल से ना वह मारा गया । नाम सुरथ था, न्याय में ना उसका कोई पार था,अपनी प्रजा, अपनी पत्नी, अपने पुत्रों से उसे प्यार था ।आज रण में हारकर, सबके …
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शीर्षक: मंत्र (कविता) ——————————– चयन करना कितना मुश्किल है, जब सामने वाला हो अपना, और चुनना है उनमें से जो दिए गए हो विकल्प उनके द्वारा, पहले मन सोचता है , अपना मत रखूँ , फिर मन कहता है पहले देखूं , उनके दिल में है क्या ? कही मेरे एक के चुनने पर, उसे अच्छा न लगे, और अगर …
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शीर्षक: यकीं है तुम मुझसे प्यार नहीं करते आज मैं ये यकीन से कह सकती हूं । कि….तुम मुझसे प्यार नहीं करते, जब रोते देखते हो,आंसू पोंछकर,फिर हंस देती हूं कुछ सोचकर, कभी बनते नहीं कारण हँसने का ,और तुम मेरे साथ कभी रोते भी नही,सोते हो साथ मेरे, पर साथ मेरे कभी होते नहीं, सुबह से लेकर रात तक,जीवन …
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जय अम्बे जगदम्बे मैया हम शरणागति तुम्हारी हैं।
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आ गए चुनाव।
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