
होली है भई होली है
- पवनेश
- 26/03/2024
- मुक्तक
- होली है भई होली है
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होली है भई होली है बुरा न मानो होली है।
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होली है भई होली है बुरा न मानो होली है।
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कवित्त बन बहती रही, छंद नदी रसधार में ।
भाव रस से पगी हुई हिय स्पन्दन संसार में।।

Exam Exam! Exam! Exam!कभी पापा चिल्लाते;कभी माँ।जैेेसे वह कोई बच्चा नहीं,है कोई खिलौनाया कि परीक्षा का सामान। हाँ, परीक्षा लो,सफल होंगे;इसमें कोई शक नहीं है।मगर…,जब ज़िंदगी परीक्षा लेगी;इतना पूछना था –क्या कलम मेरे हाथ में रहेगी ? Favorite
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श्री अन्न।
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जय हो माता शबरी।
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0आदमी कैसे मरता है ? बड़ी मासूमियत सेवह…,बड़े मासूम सवाल करता है। मुझसे कहता है…पापा…!आदमी कैसे मरता है ? थोड़ा विस्मय से हँसकर,मैं…,उससे कहता हूँ…, आदमी के… ‘भीतर का आदमी’ मरने से,आदमी मरता है। Favorite
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दासबोध, मनोबोध, पंचीकरण, बाग प्रकरण, मानपंचक आत्माराम, के सृजन स्वास थे। वह समर्थ गुरू रामदास थे। वह समर्थ स्वामी रामदास थे। भक्तिमार्गी सिद्ध संत, राजनीति युद्ध – संधि, अद्वैत वेदांत, के सुख प्रभास थे। आरतियां स्त्रोतम, प्रेम भक्ति ओज नमन, स्फूट अभंग ओवी छंद, के हृदय प्रकाश थे। वह समर्थ गुरू रामदास थे। वह समर्थ स्वामी रामदास थे। दासबोध, मनोबोध …
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“आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य का जीवन रीति नीति के दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठ आदर्श है।”
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समाज का अनकहा सच
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जय श्री राम
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