
!! “कविता” !!
- Radha Shri Sharma
- 21/03/2024
- कवित्त
- मुक्तक
- 1 Comment
कवित्त बन बहती रही, छंद नदी रसधार में ।
भाव रस से पगी हुई हिय स्पन्दन संसार में।।
Dark
Auto
Light
Dark
Auto
Light

कवित्त बन बहती रही, छंद नदी रसधार में ।
भाव रस से पगी हुई हिय स्पन्दन संसार में।।

Exam Exam! Exam! Exam!कभी पापा चिल्लाते;कभी माँ।जैेेसे वह कोई बच्चा नहीं,है कोई खिलौनाया कि परीक्षा का सामान। हाँ, परीक्षा लो,सफल होंगे;इसमें कोई शक नहीं है।मगर…,जब ज़िंदगी परीक्षा लेगी;इतना पूछना था –क्या कलम मेरे हाथ में रहेगी ? Favorite
Continue Reading
श्री अन्न।
Continue Reading
जय हो माता शबरी।
Continue Reading
0आदमी कैसे मरता है ? बड़ी मासूमियत सेवह…,बड़े मासूम सवाल करता है। मुझसे कहता है…पापा…!आदमी कैसे मरता है ? थोड़ा विस्मय से हँसकर,मैं…,उससे कहता हूँ…, आदमी के… ‘भीतर का आदमी’ मरने से,आदमी मरता है। Favorite
Continue Reading
दासबोध, मनोबोध, पंचीकरण, बाग प्रकरण, मानपंचक आत्माराम, के सृजन स्वास थे। वह समर्थ गुरू रामदास थे। वह समर्थ स्वामी रामदास थे। भक्तिमार्गी सिद्ध संत, राजनीति युद्ध – संधि, अद्वैत वेदांत, के सुख प्रभास थे। आरतियां स्त्रोतम, प्रेम भक्ति ओज नमन, स्फूट अभंग ओवी छंद, के हृदय प्रकाश थे। वह समर्थ गुरू रामदास थे। वह समर्थ स्वामी रामदास थे। दासबोध, मनोबोध …
Continue Reading
“आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य का जीवन रीति नीति के दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठ आदर्श है।”
Continue Reading
समाज का अनकहा सच
Continue Reading
जय श्री राम
Continue Reading
जय श्री राम
Continue Reading