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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : स्वरचित काव्य रचना विशेष” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/फरवरी/२०२६/अ” !! 📜
🪔 विषय :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक ०२/०२/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक ०६/०२/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📹 विधा :- !! “काव्य” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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  !! “कल्प भेंटवार्ता – श्रीमती मेघा अग्रवाल जी व मिहू अग्रवाल के साथ” !!

जब आपको संस्कृति से प्यार हो तो वह सभी के प्रति मन में सम्मान की भावना जगाताहै व आपको मानवीय मूल्य का आंकलन नहीं करना पड़ता आपको मानवीय मूल्य पता होते हैं
✍🏻 मेघा अग्रवाल

परिवार की वजह से और खुद को भी बहोत हौसला देना पडता हर चीज मे संतुलन बनाए रखना होता है पढ़ाई बहोत जरुरी है तो समय पर होमवर्क करना चाहे मुझे रात को जाग कर करना पडे करती हू
✍🏻 मिहू अग्रवाल

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : कल्पकथा साहित्य संस्था स्थापना माह विशेष स्वालोचना सृजन आमंत्रण” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जनवरी/२०२६/द” !! 📜
🪔 विषय :- !! “स्वालोचना” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- दिनाँक २६/०१/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक ३०/०१/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
📹 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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!! कल्प भेंटवार्ता  : व्यक्तित्व परिचय : डाॅ. श्रीमती जया शर्मा प्रियंवदा जी  व निशीगंधा मुद्गल के साथ !!

हिंदी और संस्कृत दोनों ही बहुत विस्तृत और जटिल भाषा और विषय हैं, इन दोनों भाषाओं की जटिलता से भरी गांठों को खोलना सहज नहीं है।
✍🏻 जया शर्मा प्रियंवदा

संगीत और चित्रकला मुझे अपनी माँ से विरासत में मिली है। बचपन से ही मेरा पढाई के साथ साथ बाकी और एक्विटीज करने का भी बहुत शौक था। जिसमें से पेंटिंग करना मुझे सबसे अच्छा लगता था।
✍🏻 निशीगंधा मुद्गल

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : कल्पकथा साहित्य संस्था स्थापना माह विशेष काव्य विस्तार सृजन आमंत्रण” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जनवरी/२०२६/स” !! 📜
🪔 विषय :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- दिनाँक १९/०१/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २३/०१/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
📹 विधा :- !! “रचना विस्तार काव्य” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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!! स्थापना माह विशेषांक : कल्प भेंटवार्ता : एक संध्या साहित्यकार के साथ : श्री मंगल कुमार जैन व पाखी जैन के साथ !!

मेरे गांँव के काम मुझको,
दुनिया में रोशन करने है।
पैदल चलकर मुझको जाना,
बारिश धूप सहन करने है।।
मार्ग अपना खुद को गढ़ना है।
मुझको जीवन में पढ़ना है।।1।।

इसके अलावा, पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होना एक तरह का सम्मान भी होता है। इससे लगता है कि मैं एक सच्ची लेखिका हूँ और मेरी रचनाएँ लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : कल्पकथा साहित्य संस्था स्थापना माह विशेष युगल काव्य सृजन आमंत्रण” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जनवरी/२०२६/ब” !! 📜
🪔 विषय :- !! “स्वैच्छिक – युगल सृजन” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- दिनाँक १२/०१/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १६/०१/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
📹 विधा :- !! “काव्य” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣
⚜️ विषय विशेष: – किसी भी स्वचयनित विषय पर दो रचनाकारों द्वारा कम से कम बारह पंक्तियों एवं अधिकतम सोलह पंक्तियों की काव्य रचना ⚜️

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कल्प भेंटवार्ता : स्थापना माह विशेषांक : श्री रमेश चन्द्रा गौतम व लावण्या गौतम

वाग्दायिनी, और शस्यश्यामला वसुंधरा का तारतम्य। भगवान् विष्णु की जनकल्याणकारी बाल, युवा लीलाएं, स्नेह का प्राकट्य, षड् रिपुओं से विमुख होकर षड्रस सेवन, भाव कला की अप्रतिम सन्निकर्षता इत्यादि गुण मानव मात्र को सहर्ष अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं।

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : कल्पकथा साहित्य संस्था स्थापना माह विशेष वीडियो आमंत्रण” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जनवरी/२०२६/अ” !! 📜
🪔 विषय :- !! “कल्पकथा साहित्य संस्था” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- दिनाँक ०५/०१/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक ०९/०१/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
📹 विधा :- !! “काव्य रचना वीडियो” !! 📹
 📢 स्वर भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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!! स्थापना माह विशेष : कल्प भेंटवार्ता : एक संध्या पीढ़ीगत साहित्यकारों के साथ !!

हमारे पारंपरिक, वैचारिक और साँस्कृतिक मूल्यों को देखते हुए भारतीय संस्कृति अत्यंत महत्वपूर्ण, महान और आत्मसात करने वाली है इसकी अवहेलना और अज्ञान बहुत दुख पूर्ण है आजकल की पीढ़ी को अपने मूल्यों, संस्कारों में विश्वास जागृत कर उनका सम्मान करना चाहिए न कि पाश्चात्य संस्कृति की आड़ में अपने मूल्यों को भूलना |

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