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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : मेष संक्रांति सौर नव वर्ष विशेष” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/अप्रैल/२०२६/ब” !! 📜
🪔 विषय :- !! “सौर नव वर्ष : संस्कृतियों का संगम” !! 🪔
⚜️ विषय विशेष :- सौर नव वर्ष/मेष संक्रांति पर देश के विभिन्न अंचलों में मनाए जा रहे विविध सांस्कृतिक उत्सवों बैसाखी, बिखौटी (बिखु), जुडशीतल, पोईला वैशाख (नौबोंबर्षों), बोहाग बिहू, पना संक्रांति, (महा विषुव संक्रांति), पुथंडु (वर्ष पिरप्पु), विषु, बिसु, साजिबू चेराओबा, आदि पर आपके सम्मानित विचार। ⚜️ 
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक १३/०४/२०२६, सोमवार प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १८/०४/२०२६, शुक्रवार रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 📚
📖 शब्द सीमा : !! अधिकतम एक सहस्त्र शब्द/सोलह पंक्तियां !! 🗒️ 
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत (देवनागरी लिपि)” !! 📣

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!! “कल्प भेंटवार्ता : “व्यक्तित्व परिचय : डॉ. ईशा भारद्वाज” !! 

तकनीक और सोशल मीडिया ने हिन्दी साहित्य को एक नया मंच दिया है। इससे लेखकों को अपनी रचनाएँ व्यापक स्तर पर साझा करने का अवसर मिला है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी एक नया आयाम जोड़ रही है, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ ही साहित्य की आत्मा हैं।
✍🏻 डाॅ. ईशा भारद्वाज

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : भाई बहन दिवस विशेष पत्राचार” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/अप्रैल/२०२६/अ” !! 📜
🪔 विषय :- !! “पाती सहोदर के नाम ” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक ०६/०४/२०२६ ,सोमवार प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २७/०३/२०२६, शुक्रवार रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “पत्र लेखन” !! 📚
📖 शब्द सीमा : !! अधिकतम एक सहस्त्र शब्द !! 🗒️ 
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत (देवनागरी लिपि)” !! 📣

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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय :  ज्योतिषाचार्य पं. श्री जितेंद्र शास्त्री !!

ज्योतिष के क्षेत्र में भी मेरी शुरुआत जिज्ञासा से हुई, जो धीरे-धीरे साधना में परिवर्तित हो गई। मैंने अनुभव किया कि ज्योतिष केवल गणना या भविष्य बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ हमारे पास आते हैं। यहाँ मैंने स्पष्टता, उत्तरदायित्व और नैतिक दृष्टिकोण का महत्व समझा।
✍🏻 पं. श्री जितेन्द्र शास्त्री

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!! कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : एक संध्या साहित्यकार श्री सूर्यपाल नामदेव “चंचल” जी के साथ !!

सृष्टि का उद्गम ही नारी अस्तित्व पर आधारित है। नारीहीन समाज की परिकल्पना आधारहीन है। दूसरा पक्ष यह भी है कि इसी समाज में नारी शोषण समानांतर विद्यमान है। मानव समाज पाषाण युग से आधुनिक युग को प्राप्त कर चुका है। प्रचंड विकासशील युग में आज भी नारी पूर्णतः स्वतंत्रता को प्राप्त करने में सहज नहीं जान पड़ती।
✍🏻 श्री सूर्यपाल नामदेव “चंचल”

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : जय माँ आदिशक्ति” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/मार्च/२०२६/द” !! 📜
🪔 विषय :- !! “माँ दुर्गा के विविध रूप” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक २३/०३/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २७/०३/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 📚
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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!! “कल्प भेंटवार्ता” – आदरणीय अमित पंडा जी के साथ !!

ऐसे समय में कलम की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कलम को “छन्नी” बनना होगा—जो अच्छाइयों को ग्रहण करे और बुराइयों को छानकर अलग कर दे। यदि हम ऐसा कर पाए, तो हमारा समाज आधुनिक भी रहेगा और सुसंस्कृत भी।
✍🏻 अमित पंडा “अमिट रोशनाई”

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