
“शब्दशास्त्री बहुभाषाविद आचार्य रघुवीर जयंती विशेष”
- Kalp Samwad Kunj
- 24/12/2025
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आचार्य रघुवीर
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आचार्य रघुवीर
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२५/द” !! 📜
🥁 विषय :- !! “नन्हें वीर” !! 🥁
⏰ समयावधि :- दिनाँक २२/१२/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २६/१२/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

मेरा मानना है कि प्रत्येक साहित्यकार को अपना प्राचीन साहित्य एवं उसका इतिहास अवश्य पढ़ाना चाहिए ताकि श्रेष्ठ लेखन के प्रति अग्रसर हुआ जा सके। दिशाहीन होकर लिखने का कोई महत्व नहीं है, हमेशा ऐसा लिखे जो समाज को सही दिशा देने के साथ-साथ स्वस्थ मनोरंजन भी कर सके।
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किसान दिवस
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🌝 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२५/स” !! 🌝
🌥️ विषय :- !! “गुनगुनी धूप – हास्य /व्यंग्य” !! 🌥️
⏰ समयावधि :- दिनाँक १५/१२/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १९/१२/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
😀 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 😀
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

यदि कोई लेखक ए.आई. से अपनी रचना लिखवा रहा है, तो वह उसकी मौलिक कृति नहीं कहलाई जा सकती;
और यदि कोई लेखक पूर्ण शुद्धता के साथ स्वयं लिख रहा है, तो भी ए.आई. के युग में यह आशंका बनी रहती है कि पाठक उसे उसके ‘अपने श्रम’ की उपज मानेंगे भी या नहीं।

विजय दिवस
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२५/ब” !! 📜
💭 विषय :- !! “कल्पना” !! 💭
⏰ समयावधि :- दिनाँक ०८/१२/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १२/१२/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

आज के लेखक अपने लेखन में नई शैली का प्रयोग कर रहे हैं। जैसे जैसे समय में परिवर्तन आता है लेखक की शैली में भी परिवर्तन आता है लेखक को पाठकों की पसंद का भी ख्याल रखना पड़ता है । वह परंपरा को भी अनदेखा नहीं कर सकता। हम आधुनिक युग में जी रहे हैं लेखक के लिए ये बेहद जरूरी है उसको आधुनिकता और परंपरा में सामंजस्य बना कर ही चलना पड़ता है।
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संत कवि सूरदास
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