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!! “कल्प भेंटवार्ता” – श्रीमती एकता सिंह जी के साथ !!

“मौत से ठन गई” मेरे लिए विशेष है क्यूँकि २०२४ में मैंने परिवार से दो लोगो को एक साथ खोया। उसके बाद मौत का खेल समझ आ गया। मौत दोस्त लगने लगी। तब से मैंने जिंदगी को एसे जीना शुरू किया है जैसे हर पल, हर दिन आख़िरी दिन है मैंने इस पर एक कविता लिखी है।
✍🏻 एकता सिंह

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : माँ का आँचल” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/फरवरी/२०२६/स” !! 📜
🪔 विषय :- !! “माँ का आँचल” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक १६/०२/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २०/०२/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📹 विधा :- !! “लघुकथा” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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!! “कल्प भेंटवार्ता” – श्री अरुण शाँडिल्य जी के साथ !!

अपने संस्कृति,संस्कार में रहते हुए ईश्वराधना के साथ अपने जीवन-चर्या में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएं ताकि इतिहास उनका साक्ष्य बनकर प्रतिनिधित्व करे।
✍🏻 अरुण शाँडिल्य

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : आधुनिक प्रेम का विकृत स्वरुप” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/फरवरी/२०२६/ब” !! 📜
🪔 विषय :- !! “आधुनिक प्रेम” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक ०९/०२/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १३/०२/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📹 विधा :- !! “व्यंग्य” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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!! “कल्प भेंटवार्ता” – श्रीमती कीर्ति त्यागी जी के साथ  !!

आज का स्त्री लेखन डरता नहीं, सवाल करता है और अपनी आवाज़ को बुलंद करता है। यह केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की चेतना भी पैदा करता है। मुझे लगता है कि इस नई धारा में स्त्रियाँ अपने संघर्ष, संवेदना और आत्मसम्मान को बेबाकी से व्यक्त कर रही हैं। यह बदलाव प्रेरक और बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यही साहित्य समाज और मन दोनों को मजबूत बनाता है।

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : स्वरचित काव्य रचना विशेष” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/फरवरी/२०२६/अ” !! 📜
🪔 विषय :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
 ⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक ०२/०२/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक ०६/०२/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📹 विधा :- !! “काव्य” !! 📹
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

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  !! “कल्प भेंटवार्ता – श्रीमती मेघा अग्रवाल जी व मिहू अग्रवाल के साथ” !!

जब आपको संस्कृति से प्यार हो तो वह सभी के प्रति मन में सम्मान की भावना जगाताहै व आपको मानवीय मूल्य का आंकलन नहीं करना पड़ता आपको मानवीय मूल्य पता होते हैं
✍🏻 मेघा अग्रवाल

परिवार की वजह से और खुद को भी बहोत हौसला देना पडता हर चीज मे संतुलन बनाए रखना होता है पढ़ाई बहोत जरुरी है तो समय पर होमवर्क करना चाहे मुझे रात को जाग कर करना पडे करती हू
✍🏻 मिहू अग्रवाल

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