
“कल्प संवादकुंज – भक्ति अध्यात्म विशेष”
- Kalp Samwad Kunj
- 18/03/2026
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भक्ति
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भक्ति
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/मार्च/२०२६/स” !! 📜
🪔 विषय :- !! “मेरी ऐतिहासिक स्थल यात्रा” !! 🪔
⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक १६/०३/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २०/०३/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “यात्रा वृतांत” !! 📚
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

हमारा मानना है कि सामान्यतः साहित्य, समाज को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। मार्गदर्शक की भूमिका में तो कोई कोई प्रबुद्ध लेखक अपने नवोन्मेषी विचारों से हो जाता है और ऐसे लेखक का लेखन साहित्य होना आवश्यक नहीं है।
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ललितादित्य मुक्तापीड़
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/मार्च/२०२६/ब” !! 📜
🪔 विषय :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक ०९/०३/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १३/०३/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “काव्य” !! 📚
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

युद्ध
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/मार्च/२०२६/अ” !! 📜
🖌️ विषय :- !! “होली – रंगों का त्यौहार” !! 🖌️
⚜️ विषय विशेष :- आनंद, उमंग, सद्भाव, समता, और सामाजिक सौहार्द पर्व होली पर आधारित आपकी स्वरचित काव्य रचनाएँ।*⚜️
⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक ०२/०३/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक ०६/०२/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “काव्य” !! 📚
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

काव्य के क्षेत्र में एक क्रांति अवश्य आई है। करोना काल उसका साक्षी है। नारी शक्ति ने अपनी लेखनी के द्वारा एक पहचान बनाई है। स्त्री विमर्श से नारी अभिव्यक्ति के सशक्तिकरण का एक युग शुरु हुआ है। पर इसके साथ साथ स्वाभाविक नारीत्व और संस्कार के स्तर का क्षय भी हुआ है। जिसको संभालना हम नारियों की ही जिम्मेदारी है। हमें सशक्त होना है ना कि पुरुष का प्रतिद्वन्दी।
✍🏻 सीमा शर्मा “मंजरी”

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/फरवरी/२०२६/द” !! 📜
🪔 विषय :- !! “शौर्य दिवस : बालाकोट एयर स्ट्राइक” !! 🪔
⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक २३/०२/२०२६ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २७/०२/२०२६ रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 📚
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣

“मौत से ठन गई” मेरे लिए विशेष है क्यूँकि २०२४ में मैंने परिवार से दो लोगो को एक साथ खोया। उसके बाद मौत का खेल समझ आ गया। मौत दोस्त लगने लगी। तब से मैंने जिंदगी को एसे जीना शुरू किया है जैसे हर पल, हर दिन आख़िरी दिन है मैंने इस पर एक कविता लिखी है।
✍🏻 एकता सिंह