
🥁🎉 “कल्प संवादकुंज = !! बलिदान के दीप – चार साहिबजादे !!” 🎉🥁
- पवनेश
- 29/12/2024
- लेख
- प्रतियोगिता
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बलिदान के दीप -चार साहिबजादे
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बलिदान के दीप -चार साहिबजादे
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जब मैं चित्तौड़गढ़ घूमने गया तो हल्दीघाटी गया। संग्रहालय देखा और मन हुआ कि कुछ पंक्तियां महाराणा प्रताप पर लिखूँ।
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चार साहिबजादे
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२४/द” !! 📜
📚 विषय :- !! “जाते हुए लम्हें” !! 📚
⏰ समयावधि :- दिनाँक २४/१२/२०२४ प्रातः ०८.०० बजे से २८/१२/२०२४ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣
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नए कवियों से हम अधिक प्रभावित होते हुँ क्योंकि मेरा मानना है कि नए नए पौधे पर अगर ध्यान दिया जाए तो वो मजबूत वृक्ष बन जाता है और ध्यान नहीं दिया जाए तो वो खत्म हो जाएगे।
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कल्प संवादकुंज
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उपभोक्ता हित जागरूकता और कानून
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विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२४/स” !! 📜
📚 विषय :- !! “किसान और खेत” !! 📚
⏰ समयावधि :- दिनाँक १६/१२/२०२४ प्रातः ८.०० बजे से २०/१२/२०२४ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य, कहानी, लेख ” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣
जी मैं इस मामले में मध्यमार्गी हूं। मुझे लगता है कि भाव पक्ष के साथ कला पक्ष का संतुलन भी जरूरी है तभी कविता में आनंद आता है। फिर भी भाव पक्ष ज्यादा महत्वपूर्ण है, अगर भावनाएं पैदा और प्रेषित नहीं होगी तो कविता ही बिखर जाएगी।
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विजय दिवस १६ दिसंबर
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