!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : वीर बाल दिवस विशेष” !!
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Kalpkatha
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22/12/2025
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लेख
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प्रतियोगिता
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२५/द” !! 📜
🥁 विषय :- !! “नन्हें वीर” !! 🥁
⏰ समयावधि :- दिनाँक २२/१२/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २६/१२/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣
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!! “कल्प भेंटवार्ता : एक संध्या साहित्यकार के साथ : श्री भारत भूषण वर्मा” !!
मेरा मानना है कि प्रत्येक साहित्यकार को अपना प्राचीन साहित्य एवं उसका इतिहास अवश्य पढ़ाना चाहिए ताकि श्रेष्ठ लेखन के प्रति अग्रसर हुआ जा सके। दिशाहीन होकर लिखने का कोई महत्व नहीं है, हमेशा ऐसा लिखे जो समाज को सही दिशा देने के साथ-साथ स्वस्थ मनोरंजन भी कर सके।
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“साप्ताहिक कल्प संवादकुंज – राष्ट्रीय किसान दिवस विशेष”
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Kalp Samwad Kunj
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17/12/2025
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किसान दिवस
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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : सर्दियों में धूप के महत्त्व पर विशेष” !!
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Kalpkatha
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15/12/2025
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प्रतियोगिता
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🌝 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२५/स” !! 🌝
🌥️ विषय :- !! “गुनगुनी धूप – हास्य /व्यंग्य” !! 🌥️
⏰ समयावधि :- दिनाँक १५/१२/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १९/१२/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
😀 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 😀
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣
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कल्प भेंटवार्ता – एक संध्या साहित्यकार डॉ वेद प्रकाश भट्ट जी के साथ
यदि कोई लेखक ए.आई. से अपनी रचना लिखवा रहा है, तो वह उसकी मौलिक कृति नहीं कहलाई जा सकती;
और यदि कोई लेखक पूर्ण शुद्धता के साथ स्वयं लिख रहा है, तो भी ए.आई. के युग में यह आशंका बनी रहती है कि पाठक उसे उसके ‘अपने श्रम’ की उपज मानेंगे भी या नहीं।
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“कल्प संवादकुंज – विजय दिवस – शौर्य का तेज”
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Kalp Samwad Kunj
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10/12/2025
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विजय दिवस
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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : विचारों की उर्वर उड़ान विशेष” !!
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Kalpkatha
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08/12/2025
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प्रतियोगिता
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/दिसम्बर/२०२५/ब” !! 📜
💭 विषय :- !! “कल्पना” !! 💭
⏰ समयावधि :- दिनाँक ०८/१२/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १२/१२/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत” !! 📣
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प्रबुद्ध साहित्यकार डॉ. वनीता चोपड़ा जी सहायक प्राध्यापक राजकीय महाविद्यालय करनाल
आज के लेखक अपने लेखन में नई शैली का प्रयोग कर रहे हैं। जैसे जैसे समय में परिवर्तन आता है लेखक की शैली में भी परिवर्तन आता है लेखक को पाठकों की पसंद का भी ख्याल रखना पड़ता है । वह परंपरा को भी अनदेखा नहीं कर सकता। हम आधुनिक युग में जी रहे हैं लेखक के लिए ये बेहद जरूरी है उसको आधुनिकता और परंपरा में सामंजस्य बना कर ही चलना पड़ता है।
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“कल्प संवादकुंज – वात्सल्य रस सम्राट – संत कवि सूरदास”
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Kalp Samwad Kunj
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06/12/2025
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संत कवि सूरदास
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पर्यावरण को स्वच्छ सुन्दर रखो
पर्यावरण स्वच्छता,
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