
📝!! “व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती शोभा प्रसाद” !!📝
- कल्प भेंटवार्ता
- 18/07/2024
- लेख
- साक्षात्कार
- 1 Comment
नाम :- शोभा प्रसाद वर्मा
माता/पिता का नाम :- स्मृतिशेष शांति वर्मा
स्मृतिशेष -के . पी . वर्मा
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नाम :- शोभा प्रसाद वर्मा
माता/पिता का नाम :- स्मृतिशेष शांति वर्मा
स्मृतिशेष -के . पी . वर्मा

बारी है पाठकों से प्रश्नों की। तो बताइये, आपको हमारी वरिष्ठ लेखिका से मिलकर कैसा लगा? साथ ही आप यदि अपनी पसंद की किसी विशेष लेखक या लेखिका को पढना व सुनना चाहते हैं तो हमें नीचे दिये गये कमेन्ट बॉक्स में सूचित करें।
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बन कर लहू जो दौड़ता है शिराओं में,
मुझे जीवन का वह रंग लाल पसंद है।
चांद और सूरज पाते शरण जहां पे,
ऊंचाई पर नीले रंग का विस्तार पसंद है।
धैर्य, क्षमा, ममता जिस आंचल में,
धरती का वह हरित परिधान पसंद है।
हिम श्रंगों के उच्च पटल के रजत कणों पे,
रवि रश्मियों का स्वर्णिम भुजपाश पसंद है।
सतरंगी पुष्पों की बगिया पे इतराती,
तितली के पंखों का बहुरंगी वितान पसंद हैं।
पंछियों की रागिनी के कलरव गान में,
गुनगुन करते भंवरों का रंग श्याम पसंद है।
विचरण करते मृग समूह के बालदल के,
नव किसलय से अधर रक्ताभ पसंद हैं।
साजन के प्रणय निवेदन, मनुहार मे,
सजनी का रक्तिम हार-सिंगार पसंद है।
निर्बाध बहती पतित पावनी जल धारा में ,
श्वेताभ जीवन का रंग उल्लास पसंद है।
सक्षम बने भाव आप तक पहुंचाने मे,
कलम की स्याही, श्वेत पत्रांक पसंद है।
कंचना मिश्रा
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प्रिय पाठकों, आपके लिए हमारा संदेश नहीं बल्कि कर बद्ध प्रार्थना है। देखिए, दिमाग और मन आपका अपना है। अतः उसमें कचरा मत भरिये। कुछ ऐसा पढ़िये जो आपके विचारों को शुद्धता, मन को शीतलता, दिमाग में शान्ति और प्राणों को सकारात्मक ऊर्जा से भर दे।
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साहित्य के प्रति रुझान बाल्यावस्था से ही रहा, क्योंकि मेरे पिता एक बहुत ही विद्वान साहित्यकार हैं। अनुवांशिक रूप से उनका यह गुण मुझ में भी आया।
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आज आप मिले डॉ उषा पाण्डेय “शुभांगी” जी से। इनकी विशेषता है कि ये कम शब्दों में अधिक बात कहती हैं। इनकी जीवन यात्रा बिहार के छपरा जिले से आरम्भ होकर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता तक जाती है। इनकी साहित्यिक यात्रा गृहणी से लुम्बिनी नेपाल तक सक्षम नारी पुरूस्कार तक रहा। इन्हें ग्लोबल फेम अवार्ड भी मिल चुका है।
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यदि आप के इस प्रश्न को सहजता से समझें तो मैं बताना चाहूंगा कि आज विज्ञान का युग है, विज्ञान ने चाकू का अविष्कार कर दिया है जिससे फल,साक सब्जी के साथ साथ किसी का गला भी काटा जा सकता है परन्तु फल साक सब्जी काटना है या गला मानव को साहित्य ही सिखाता है। यूं कहें कि साहित्य ही मानवता और इंसानियत का पाठ पढ़ाता है
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नाम :- अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी
माता/पिता का नाम :- माता जी का नाम श्रीमती स्वर्गीय लक्ष्मी बाई चतुर्वेदी एवं पिताजी का नाम स्वर्गीय श्री लक्ष्मी निधि चतुर्वेदी
जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :- जन्म स्थान ग्राम निमचौनी जिला निवाड़ी मध्य प्रदेश 472442
जन्म तिथि 12 मार्च सन 1965

नाम :- राजनारायण गुप्त “कैमी”
माता/पिता का नाम :-श्री राधेश्याम गुप्त
जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :- कैमारसूलपुर, नारायणपुर मीरजापुर उत्तर प्रदेश
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सृजन सदैव सात्विक व रीति-नीति युक्त होना चाहिए।तभी वह देशानुकूल होगा।
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