!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती सराेज सिंह “सूरज” !!
- कल्प भेंटवार्ता
- 01/08/2026
- लेख
- साक्षात्कार
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती सराेज सिंह “सूरज” !!
!! “मेरा परिचय” !!
नाम :- सरोज सिंह ‘सूरज’
माता/पिता का नाम :- श्रीमती कमला सिंह / श्री मधुसूदन सिंह चौहान
जन्म स्थान एवं जन्म तिथि :- सीधी मध्यप्रदेश / 18 नवंबर
पति/पत्नी का नाम :- डॉ. पुष्पराज सिंह परिहार
बच्चों के नाम :- अपूर्वा, अपराजिता, यशोवर्धन
शिक्षा :- एम ए, एम एड, संगीत प्रभाकर
व्यावसाय :- शिक्षा
वर्तमान निवास :- नागौद, जिला सतना, मध्यप्रदेश
आपकी मेल आई डी :-
sarojsinghparihar33@gmail.com
आपकी कृतियाँ :-
गीत, ग़ज़ल, छन्द,छन्द मुक्त, कहानी ( सभी विधाएँ)
आपकी विशिष्ट कृतियाँ :- उड़ान साहित्यिक समूह और मेरे तीनों बच्चे ही मेरी दृष्टि में सर्वश्रेष्ठ कृति हैं 😊
आपकी प्रकाशित कृतियाँ :-
सूरज के गाँव में ( काव्य संग्रह) 2- आइने से रूबरू ( ग़ज़ल संग्रह)
पुरूस्कार एवं विशिष्ट स्थान :-
सम्मान
नागरिक अधिकार आयोग द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए
-अलाउद्दीन खान संगीत विद्यालय सतना द्वारा सांस्कृतिक कार्यों के लिए
-उड़ान गुरु कुल द्वारा द्रोणाचार्य सम्मान
-शब्द शिल्पी समूह सतना द्धारा उमाकांत निगम सहज सम्मान
सृजन संस्था नागौद द्वारा सृजन शिल्पी सम्मान
कपिलश फाउंडेशन लखनऊ द्वारा साहित्य सेवा हेतु
सरगम साहित्यिक संस्था सतना द्वारा तुलसी सम्मान
सिद्धभूमि अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय द्वारा सिद्धभूमि सम्मान।
नागौद नगर परिषद द्वारा
नागौद नगर गौरव सम्मान।
!! “मेरी पसंद” !!
उत्सव :- सभी
भोजन :- ताजा एवं पौष्टिक कोई भी खाद्य पदार्थ
रंग :- लाल/ गुलाबी
परिधान :- साड़ी
स्थान एवं तीर्थ स्थान :- चित्रकूट
लेखक/लेखिका :- निराला प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद
कवि/कवयित्री :- महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, सुमित्रानंदन पंत, दिनकर
उपन्यास/कहानी/पुस्तक :- गोदान, गबन, कोहबर की शर्त
कहानी- उसने कहा था, पुरस्कार, पंचपरमेश्वर
कविता/गीत/काव्य खंड :-
सूची लंबी है
खेल :- हॉकी खोखो कबड्डी
फिल्में/धारावाहिक (यदि देखते हैं तो) :- Kbhi मेहता का उल्टा चश्मा
आपकी लिखी हुई आपकी सबसे प्रिय
कृति :- गीत- एक दीपक जल रहा है, समुद्रमंथन शिव स्तुति, पिंजरे की मैना ।
ग़ज़ल- कश्ती हूँ, दान- पानी
कहानी- दूर्वा, वफ़ा
!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : श्रीमती सराेज सिंह “सूरज”
के उत्तर !!
प्रश्न १ –सीधी (मध्यप्रदेश) की संस्कारमयी धरती से आरंभ हुई आपकी जीवन-यात्रा साहित्य-सृजन की ओर किस प्रकार अग्रसर हुई?
सरोज जी :- साहित्य में रुचि बचपन से ही थी, हिन्दी विषय सर्वाधिक प्रिय विषय था छात्र जीवन में, और घर में दादाभाई ने बचपन से ही श्रेष्ठ पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया और उपलब्ध भी करवाईं, धीरे धीरे कब लिखना भी प्रारंभ कर दिया एहसास नहीं हुआ।
प्रश्न २ – शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहते हुए आपने साहित्य-साधना के लिए समय और ऊर्जा का संतुलन किस प्रकार स्थापित किया?
सरोज जी :- जिस विषय में रुचि हो उस के लिए समय निकालना नहीं पड़ता उसके लिए ऊर्जा और समय दोनों ही स्वयं होते हैं।
निराला जी डलमऊ घाट के बुर्ज पर लिखते थे, बांधो न नाव इस ठांव गीत वही लिखा था निराला जी ने
रांगेय राघव मच्छरदानी के भीतर औंधे लेटकर लिखते थे।
हमने भी गृहकार्य करते हुए रसोइघर में बैठ कर रचनाएँ की हैं।
प्रश्न ३ –आपने गीत, ग़ज़ल, छंद, छंदमुक्त कविता और कहानी जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया है। इनमें से कौन-सी विधा आपके अंतर्मन के सबसे अधिक निकट है और क्यों?
सरोज जी :- कौन विधा अंतर्मन के निकट है यह कहना मुश्किल है, क्योंकि लेखन का विषय ही यह निर्धारित करता है कि उसे किस विधा में लिखना उपयुक्त होगा।
प्रश्न ४ –आपकी काव्य कृति “सूरज के गाँव में” और ग़ज़ल संग्रह “आईने से रूबरू” की रचना-यात्रा के पीछे कौन-सी भावभूमि और प्रेरणा रही?
सरोज जी :- सूरज के गाँव में एक काव्य संग्रह है जिसमें काव्य की अनेक विधाओं का संकलन है, एक मित्र जो कि पोएसिस एन जी ओ के संस्थापक हैं ( मैं भी पोएसिस की सदस्य हूँ) उनके द्वारा प्रेरित करने पर इसे छपवाने की इच्छा हुई।
आइने से रूबरू ऐसा ग़ज़ल संग्रह है जिसमें समग्र ग़ज़ल व्याकरण के साथ पचास से अधिक बह्रों पर ग़जलें हैंं, इसकी प्रेरणा उड़ान में ग़ज़ल की कक्षा लेने के दौरान हुई।
प्रश्न ५ –आपके उपनाम “सूरज” में प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता का भाव निहित है। क्या आपकी लेखनी भी इसी प्रकाश और आशा के भाव को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करती है?
सरोज जी :- यद्यपि सूरज नाम हमारा बचपन से ही निकनेम है,जो हमारी माँ ने दिया था उसे ही हमने उपनाम बना लिया लेकिन,
जी हाँ हमारी लेखनी भी हमारे नाम की तरज्ञ प्रकाश ऊर्जा और आशा के भाव को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास तो अवश्य करती है।
प्रश्न ६ –आपकी दृष्टि में साहित्य केवल भावों की अभिव्यक्ति है या समाज के प्रति एक उत्तरदायित्व भी?
सरोज जी :– निश्चित ही साहित्य समाज के प्रति एक उत्तरदायित्व है, केवल भावों की अभिव्यक्ति नहीं है, साहित्य समाज को गढ़ने का भी कार्य करता है।
प्रश्न ७ –निराला, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा और दिनकर जैसे महान साहित्यकारों से आपने अपनी लेखनी के लिए क्या प्रेरणा ग्रहण की है?
सरोज जी :- प्रकृति से प्रेम और सौंदर्यबोध, परिष्कृत साहित्यिक भाषा, करुणा और राष्ट्र प्रेम इन्हीं महान लेखकों की रचनाएँ पढ़ कर ही विकसित हुए हैं। जो हमारी लेखनी में उतरे हैं हम उन लेखकों की बराबरी तो नहीं कर सकते लेकिन उनका प्रभाव अवश्य है।
प्रश्न ८ –संगीत प्रभाकर की शिक्षा ने आपकी कविता और गीतों में लय, माधुर्य एवं भावों की अभिव्यक्ति को किस प्रकार प्रभावित किया?
सरोज जी :- संगीत प्रभाकर की शिक्षा ने लय और ताल के साथ स्वर साधना सिखाई और रागों की पहचान भी।
प्रश्न ९ –आपकी प्रिय रचनाओं में “एक दीपक जल रहा है”, “समुद्रमंथन शिव स्तुति” और “पिंजरे की मैना” जैसी रचनाएँ शामिल हैं। इन रचनाओं से जुड़ी आपकी विशेष अनुभूति क्या है?
सरोज जी :- एक दीपक जल रहा है, राधा के विरह उनकी अंतहीन प्रतीक्षा पर लिखा गया एक मार्मिक गीत है, जब कृष्ण मथुरा छोड़ कर सदैव के लिए चले गए तब राधा ने जीवनभर उनकी प्रतीक्षा की, उनका दु:ख अंतर्मन को सालता है।
समुद्र मंथन से १४ रत्न निकले जिन्हें देव दानव सभी लेना चाहते थे, लेकिन विषपान केवल शिव ने किया यह साधारण बात नहीं थी, इसलिए समुद्रमंथन रचना जो पंचचामर छंद में है, शिव की स्तुति है।
और पिजरे की मैना समृद्ध और प्रतिष्ठित परिवारों की उन बहुओं को समर्पित है जिनकी प्रतिभा और सपने परिवार की प्रतिष्ठा की बलि चढ़ जाते हैं।
प्रश्न १० –एक माँ और एक रचनाकार के रूप में आपके जीवन के अनुभवों ने आपकी लेखनी को किस प्रकार समृद्ध किया है?
सरोज जी :- एक माँ और रचनाकार होने के साथ- साथ मैं एक समाजसेवी भी हूँ और शिक्षक भी और प्रकृति प्रेमी भी अत: जीवन के हर क्षेत्र में विभिन्न अनुभव हुए जिन्होंने लेखनी को प्रभावित किया है।
प्रश्न ११ –चित्रकूट जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थानों से आपका विशेष लगाव है। क्या यात्राएँ और आध्यात्मिक अनुभव आपकी रचनात्मकता को प्रभावित करते हैं?
सरोज जी :- जी हाँ, निश्चित ही यात्राओं के आध्यात्मिक अनुभव लेखनी को बहुत प्रभावित करते हैं।
प्रश्न १२ –आपकी कहानी लेखन यात्रा में “दूर्वा” और “वफ़ा” जैसी रचनाएँ विशेष हैं। कहानी लिखते समय आप किन मानवीय भावनाओं को केंद्र में रखती हैं?
सरोज जी :– कहानी लिखते समय मन के अंतर्द्वन्द मोह और प्रबल इच्छाओं के साथ ही साथ दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प जैसी मानवीय भावनाएँ केन्द्र में रहती हैं।
प्रश्न १३ –वर्तमान समय में हिन्दी साहित्य के समक्ष आपको कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ और संभावनाएँ दिखाई देती हैं?
सरोज जी :- वर्तमान समय में हिन्दी साहित्य के समक्ष सब से बड़ी चुनौती तो भाषा की शुद्धता है। आज बोलचाल में भी और लेखन में शब्दों और भाषा के जो बिगड़े हुए स्वरूप देखने को मिलते हैं वह बहुत कष्टदायक हैं,
जैसे ढ और ढ़ में अंतर न होना सम्हल को संभल लिखना आदि, आज सब से बड़ी चुन्नौती भाषा की शुद्धता है, साथ ही भाषा में शिष्टता और माधुर्य की कमी भी सब से बड़ी चुन्नौती है।
फिर भी युवा वर्ग एक वर्ग ऐसा भी है बहुत उत्कृष्ट लेखन कर रहा है अत: हिन्दी भाषा में श्रेष्ठ साहित्य होता रहेगा यह संभावना भी है।
प्रश्न १४ –आपकी दृष्टि में एक श्रेष्ठ साहित्यकार की पहचान क्या है—कल्पना, संवेदना, साधना या जीवनानुभव?
सरोज जी :- एक श्रेष्ठ साहित्यकार के लिए कल्पना, संवेदना साधना और जीवनानुभव चारों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, कल्पना और जीवनानुभव का सम्मिश्रण होती है रचना, और संवेदनहीन व्यक्ति रचनाकार नहीं हो सकता।
प्रश्न १५ –अंत में, नवोदित रचनाकारों एवं हमारे श्रोताओं के लिए आपका प्रेरणास्पद संदेश क्या होगा?
सरोज जी :- नवोदित रचनाकारों के लिए संदेश है, कि पढ़िये खूब पढिये, आप जितना श्रेष्ठ साहित्य पढ़ेंगे आपकी लेखनी भी उतनी ही धारदार होगी।
श्रोताओं के लिए संदेश है कि जब कोई रचनाकार आपके समक्ष होता है तो वो अपने हृदय के भाव आपको समर्पित कर रहा होता है अतः उस समय अन्य बातों से या बातचीत से ध्यान हटाकर यदि आप रचनाकार को सुनेंगे तो आपका उपकार होगा।
✍🏻 वार्ता : श्रीमती सराेज सिंह “सूरज”
कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय प्रबुद्ध साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं नागौद, मप्र की कवयित्री श्रीमती सरोज सिंह “सूरज” जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇
https://www.youtube.com/live/pn5EyEMcyw8?si=DBdQXeyXHz-McrDs
इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी। मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये।
राधे राधे 🙏 🪷 🙏
✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️
✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन
🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी
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