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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती रेखा नेमा “रचिका” !!

!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती रेखा नेमा “रचिका” !! 

 

 

 !! “मेरा परिचय” !! 

 

नाम :- श्री मति रेखा नेमा “रचिका”

 

पिता का नाम :- श्री रामचरण जी नेमा (रिटायर्ड डिस्टिक ऑडिटर पंचायत विभाग)

माता का नाम- श्री मति कमला नेमा जी

 

 

जन्म स्थान :- नरसिंहपुर मध्यप्रदेश 

 

पति का नाम :- श्री अनूप नेमा जी

 

बच्चों के नाम :- मयूर नेमा/ आदित्य 

        

 

शिक्षा :- B. Com.

     M B A

 

व्यवसाय :- विल्डिंग मटेरियल थोक एवं फुटकर विक्रेता, एवं थोक गल्ला व्यापारी

 

वर्तमान निवास :- जिला- सिवनी आदेगाँव

 

ई-मेल :- Nema rekha@ gmail. Com

 

 

 

 !! मेरी साहित्यिक यात्रा !! 

 

साहित्यिक यात्रा :- सन् 2020 से अनवरत 

 

आगामी कृति :- छंद गीत माला

 

 

 !! सामाजिक सरोकार !! 

 

ामाजिक पहल के माध्यम से कार्य करने का प्रयास।

 

 

 

 !! मेरी पसंद !! 

 

उत्सव :- सामाजिक, धार्मिक 

 

भोजन :- स्वादिष्ट मीठा भी चटपटा भी।

 

रंग :- पीला ,गुलाबी

 

परिधान :- साड़ी, सलवार शूट

 

लेखक/लेखिका :- कवियत्रि

 

खेल :- बचपन में खेलते थे केरम , पिट्टू

 

धारावाहिक :- पारिवारिक जीवन पर आधारित 

 

फिल्में :- सामाजिक,पारिवारिक 

 

संगीत :- धीमा मधुर संगीत 

 

 

🌸 !! मेरे व्यक्तित्व की झलक !! 🌸

 

जीवन का मूल मंत्र :- कर भला तो हो भला

 

प्रिय व्यक्तित्व :- शांत, गंभीर, समझदार हँसमुख 

 

जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि :- साहित्यिक यात्रा में बढ़ोत्तरी अनेक छंद में लिखना एवं सभी छंदों में गीत लिखना एवं सभी छंदों गीतिका सृजन करना.

 

जीवन से मिली सीख :-धैर्य रखना, समय आने पर मन चाहे काम हो जाएंगे।

 

सामाजिक कार्य :- परिस्थिति अनुसार दूसरों की मदद करना

 

भविष्य के स्वप्न एवं संकल्प :- पति एवं बेटा हर क्षेत्र में कामयाब हों सफल हों।

 

 

!! साहित्यिक परिचय !! 

 

पूर्णिका कार- श्रीमति रेखा नेमा

जन्मतिथि- 3/3/1972

स्थान-नरसिंहपुर 

पिता- श्री रामचरण जी नेमा

माता-श्रीमति कमला जी नेमा 

पति-श्री अनूप जी नेमा

शैक्षणिक योग्यता- स्नातकोत्तर (M.A.) 

विषय-हिंदी साहित्य 

  डाॅ.हरि सिंह गौर महिला महाविद्यालय होशंगाबाद .

रुचि-पठन-पाठन एवं लेखन.

छंद विधा में लेखन-

छंद-दोहा, चौपाई, चौपई,रोला,कुंडलियाँ,सरसी छंद, सार छंद, गीतिका छंद, हरिगीतिका छंद, विधाता छंद,मरहटा छंद, त्रिभंगी छंद, आल्हा छंद, चंचरीक/हरिप्रिया छंद, दाक्षायणी (सममात्रिक दण्डक ), ताटक छंद, 

*गीत*-सभी छंदों में गीत, रमा छंद, प्रदीप छन्द, 

सवैया, राधेश्यामी छन्द,

वार्णिक छंद- मनहरण घनाक्षरी,डमरू घनाक्षरी , सूर घनाक्षरी,सजल, गीतिका सृजन सभी छंद आधारित लय पर,

प्रकाशित साझा संकलन- सुखन-वरी राब्ता,लघुकथाएं , सुरभित कलियाँ, अभिनव काव्यांजलि,पूर्णिका साझा संकलन *भावनाओं के रंग*

वर्तिका लघुकथाएं साझा संग्रह, वर्तिकायन साझा गीत संकलन, सुरभित कलियाँ साझा काव्य संकलन, इत्यादि

प्रतियोगिता सम्मान प्राप्त- पत्र-प्रथम, द्वितीय स्थान प्राप्त। 

श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान पत्र प्राप्त, श्रेष्ठ समीक्षक रत्न सम्मान पत्र प्राप्त 

ऑनलाइन 

काव्य गोष्ठी सम्मान पत्र अनेक अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य संस्था द्वारा प्राप्त। 

 ऑफलाइन कवि सम्मेलन सम्मान पत्र प्राप्त

संस्थाएं-

अंतरराष्ट्रीय आभा साहित्य पूर्णिका मंच

मोबाइल नंबर- 8770549202

पता-

श्री अनूप नेमा

बुधवारी चौक आदेगाँव 

तहसील-लखनादौन

जिला – सिवनी मध्यप्रदेश

 

 

✍🏻 कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन

 

 

 

 

!! कल्प भेंटवार्ता के प्रश्न : श्रीमती रेखा अनूप नेमा ‘रचिका’ जी के उत्तर !! 

 

 

 

प्रश्न ०१. रचिका जी! सबसे पहले हमारे दर्शक आपसे जानना चाहते हैं कि आपकी साहित्यिक यात्रा कब और किसकी प्रेरणा से कैसे शुरू हुई?

 

रेखा जी :- 2020 में फेसबुक पर नेमा दर्पण ग्रुप में एक प्रतियोगिता चित्र आधारित सृजन करना था, मैंने पहली बार किया था और उसमें मेरा प्रथम स्थान आया तब से और लिखने लगी, इसके बाद एक बार मेरी सखी सहेली जैसी मेरी जेठानी हम लोग घूमने जाते थे तब उन्होंनें बताया मैं अनेक मंच से जुड़ी हूँ जहाँ पर कभी शब्द, कभी पंक्ति दी जाती है उस पर लिखना होता है, आज चाँद शब्द मिला था लेकिन समय नहीं मैं नहीं लिख पाई, थोड़ी देर पश्चात जब मैं आई और मैंने 15 मिनिट बाद ही चाँद पर लिख भेजा जब उन्होंने पढ़ा बोली आप तो बहुत अच्छा लिखती हैं मैं पटल से आपको जोड़ दे रही हूँ , और तब से आज तक यह कलम अनवरत चल रही है, उसके अनेक पटल से अन्य कवियों ने अपने-अपने पटल से जोड़ लिया। 

 

 

 

प्रश्न ०२. गृहस्थ जीवन और साहित्य-साधना के बीच संतुलन स्थापित करने में आपके जीवनसाथी एवं परिवार का कितना सहयोग मिलता है?

 

रेखा जी :- मेरे जीवन साथी मेरा पूरा साथ देते हैं जब कहीं कार्यक्रम में जाने की बात होती है साथ चलते हैं, और प्रतिदिन के लेखन में स्वयं घर गृहस्थी और लेखन संतुलन बनाकर चलती हूँ।

 

 

 

प्रश्न ०३. व्यवसाय और साहित्य, दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए आपका जीवन-मंत्र ‘कर भला तो हो भला’ आपको किस प्रकार प्रेरित करता है?

 

रेखा जी :- व्यवसाय और साहित्य ही नहीं सभी क्षेत्र में यही बात लागू होती है कि जैसा करोगे वैसा पाओगे।

 

 

 

प्रश्न ०४. आदरणीया, प्रत्येक व्यक्ति के बचपन की कुछ ऐसी नादानियाँ होती है जो उसे हमेशा याद रहती है, हम आपकी बचपन की ऐसी नादान शरारत जानना चाहते हैं जो आज भी जब आपको याद आती है तो आप मुस्कुरा उठती हैं। 

 

रेखा जी :- बचपन में मैंने एक तरबूज का बीज निगल लिया था तो बहुत रोई कि मेरे पेट पेड़ ऊग जाएगा क्यों कि हमने सुन रखा था, सबके समझाने पर भी नहीं मानी और रोती रही वही सोचकर आज हँसी आ जाती है।

 

 

 

प्रश्न ०५. दोहा, चौपाई, रोला, हरिगीतिका और राधेश्यामी सहित अनेक छंदों में आपकी रुचि कैसे विकसित हुई?

 

रेखा जी :– मैंने हिंन्दी साहित्य से एम. ए. किया है दोहा, रोला चौपाई ये सब तो पाठ्यक्रम में था इनमें मेरी रुचि अधिक थी, जब साहित्यिक क्षेत्र में ऑनलाइन बिलासा छंद महालय से जुड़ी तो लिखती गई इस तरह यह यात्रा चलती ही गई।

 

 

 

प्रश्न ०६. विविध छंदों में गीत एवं गीतिकाएँ रचते समय आप भावों की सहजता और छंदों की शुद्धता में सामंजस्य कैसे स्थापित करती हैं?

 

रेखा जी :– विविध छंद गीत गीतिकाएँ लिखते समय विषय और मापनी देखते ही अपने भाव उमड़ते जाते हैं कलम चलती जाती है।

 

 

 

प्रश्न ०७. आपके साझा काव्य-संकलनों के अनुभव और आगामी कृति छंद गीत माला से पाठकों को क्या विशेष अपेक्षाएँ रखनी चाहिए?

 

रेखा जी :- साझा संकलन में तो गीत, दोहा, चौपाई छंद , पूर्णिमा, सभी कुछ प्रकाशित हुआ है,

मेरी आने वाली कृति *छंद गीत माला* जिसमें अनेक छंदों पर सिर्फ गीत ही लिखे पाएँगे जिसमें सभी छंद पढ़ने और सीखने को मिलेंगे।

 

 

 

प्रश्न ०८. रेखा जी, आप प्राकृतिक सौंदर्य, वन्य जीव, ऐतिहासिक स्थलों, एवं मध्य प्रदेश के *लखनादौन* के नाम से प्रसिद्ध सिवनी से है, हम आपके अँचल को आपके शब्दों में जानना चाहते हैं?

 

रेखा जी :- सिवनी जिले के लेन-देन के पास आदेगाँव में मेरा निज निवास है, यहाँ बहुत बड़ा किला जिसमें भगवान कालभैरव का मंदिर हैं जिसमें भगवान गणेश जी, बटुक देव, शिव जी के उनका पूरा परिवार है, किले के नीचे *श्यामलता* का पेड़ सुना है केवल दो स्थान पर ही है एक काशी में दूसरा आदेगाँव में वहीं बहुत पुराना सिद्ध हनुमान मंदिर है वहीं बहुत बड़ा तालाब है जो बहुत ही रमणीय है वहीं पार्क हैं खेल का बहुत बड़ा मैदान है हमारे यहाँ का वातावरण बहुत ही सौहार्दपूर्ण है।

 

 

 

प्रश्न ०९. वर्ष २०२० से अनवरत जारी आपकी साहित्यिक यात्रा का सबसे प्रेरणादायी अनुभव कौन-सा रहा है?

 

रेखा जी :- बिलासा छंद महालय से जुड़कर सभी छंद ज्ञान ही नहीं पारंगत भी हुए एवं लेखनी सहज ही उत्कृष्ट हो गई।

 

 

 

प्रश्न १०. ऑनलाइन काव्यगोष्ठियों और डिजिटल साहित्यिक मंचों ने हिंदी साहित्य तथा नवोदित रचनाकारों को किस प्रकार नए अवसर प्रदान किए हैं?

 

रेखा जी :– नवोदित कवियों ने सभी योजना जानी समझी, प्रस्तुतीकरण का भी ज्ञान प्राप्त हुआ। 

 

 

 

प्रश्न ११. पारंपरिक छंद-साहित्य के संरक्षण और युवा पीढ़ी में उसके प्रति रुचि जागृत करने के लिए साहित्यकारों को क्या प्रयास करने चाहिए?

 

रेखा जी :– इसके शुरुआत हमें अपने बच्चों से ही करनी चाहिए और यदि 11वी-12वी के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो बहुत ही प्रभावी होगा।

 

 

 

प्रश्न १२. रचिका जी, आधुनिक युग में सोशल मीडिया और ए आई ने जीवन के हर क्षेत्र में व्यापक प्रभाव डाला है, आप हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में इसके प्रभावों को किस रूप में देखती है?

 

रेखा जी :– बुराइयों को उजागर करके उनसे मुक्त होने के उपाय बताएँ जैसे- नामुमकिन, दहेज प्रथा, भ्रष्टाचार, जात-पात का भेद, जैसा कि कबीर, प्रेमचंद और अन्य कवियों ने किया।

 

 

 

प्रश्न १३. सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के संरक्षण में साहित्यकार की क्या भूमिका होनी चाहिए?

 

रेखा जी :– अच्छाई यह है कि शब्द के अर्थ ,पर्यायवाची शब्द अपनी मात्रा के अनुसार सही बैठ सकें।

और खराबी यह कि जो बोलो लिखकर दे देता है तो फिर अपने मनोभावों से लिखने और नकल करने वालों में भेद करना कठिन होगा।

 

 

 

प्रश्न १४. आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में साहित्य की मौलिकता, भाषा की गरिमा एवं साहित्यिक मूल्यों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?

 

रेखा जी :– वर्तनी सुधारने, शब्दों के अर्थ के लिए सही है, दूसरों की नकल से बचें।

 

 

 

प्रश्न १५. पारिवारिक दायित्वों के बीच साहित्य-साधना करने वाली महिला रचनाकार के रूप में आज हमारे दर्शकों, समकालीन लेखकों एवं नवोदित साहित्यकारों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

 

रेखा जी :- महिलाओं को साहित्य साधना के लिए पारिवारिक दायित्व का निर्वहन को प्राथमिकता दें साथ ही साहित्य को भी समय देते हुए लगन और परिश्रम तन-मन से करें तभी आप सफलतापूर्वक आगे बढ़ते जाएँगे।

 

 

✍🏻 वार्ता : श्रीमती रेखा नेमा “रचिका”

 

 

 

कल्प भेंटवार्ता में व्यक्तित्व परिचय के अंतर्गत आपका परिचय वरिष्ठ साहित्यकार से कराने का विशेष प्रयास करते हुए आज हम बात कर रहे हैं सिवनी , मप्र की विदुषी कवयित्री श्रीमती रेखा नेमा “रचिका” जी से। इन्हें विस्तार से सुनने व देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएं 👇

 

 

https://www.youtube.com/live/uqpvCa9Fel4?si=LosIuEaueN22efT7

 

 

इनसे बातें करना व मिलना आपको कैसा लगा? आप हमें कमेन्ट में बता सकते हैं। आपकी विशिष्ट प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी। 

 

मिलते हैं अगले सप्ताह एक और प्रबुद्ध साहित्यकार के साथ। तब तक के लिए हमें आज्ञा दीजिये। 

राधे राधे 🙏 🪷 🙏 

 

✍🏻 लिखते रहिये 📖 पढ़ते रहिये और 🚶 बढ़ते रहिये ✴️ 

 

✍🏻 प्रश्नकर्ता : कल्प भेंटवार्ता प्रबंधन 

 

🦚 आयोजक : कल्पकथा प्रमुख श्री राधागोपीनाथ जी 

 

कल्प भेंटवार्ता

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