दो पुराने दोस्त
“बीस हजार प्रकाश-वर्ष के उस पार”
अंतरिक्ष की अनंत निस्तब्धता में एक विशाल अंतरिक्षयान अपनी गति को निरंतर कम कर रहा था। उसके चारों ओर तारों की रोशनी किसी विराट शून्य में बिखरे हुए असंख्य दीपों जैसी प्रतीत हो रही थी।
यान का नाम – अन्वेषक–७।
उसके भीतर बैठे वैज्ञानिक चरण की आँखें लगातार सामने लगे क्वांटम-स्कैनर पर टिकी थीं।
स्क्रीन पर असंख्य आँकड़े तीव्र गति से बदल रहे थे
स्पेस-टाइम कर्वेचर… क्वांटम फ्लक्चुएशन… डाइमेंशनल एनर्जी… ग्रैविटेशनल वेव्स…
चरण ने काँपते हाथों से नियंत्रण-पटल को छुआ।
चरण: “बस… अब कुछ ही क्षण और।”
उसकी बेचैनी किसी वैज्ञानिक प्रयोग की सफलता की नहीं थी।
वह किसी व्यक्ति से मिलने के लिए व्याकुल था।
एक ऐसे व्यक्ति से, जिससे वह अभी तक कभी मिला नहीं था… फिर भी जिसके बारे में उसे लगता था कि वह उसे जन्मों से जानता है।
उसकी अपनी गणनाओं के अनुसार, इस ब्रह्माण्ड से लगभग बीस हजार प्रकाश-वर्ष दूर एक समानांतर ब्रह्माण्ड अपने अस्तित्व के एक ऐसे चरण में पहुँच रहा था, जहाँ दोनों ब्रह्माण्डों के बीच स्थित डाइमेंशनल मेम्ब्रेन अत्यंत पतली हो गई थी।
यही वह क्षण था जिसका चरण को इंतजार था।
क्योंकि उसकी गणना कहती थी
यदि समानांतर ब्रह्माण्ड वास्तव में अस्तित्व में हैं, तो उस दूसरे ब्रह्माण्ड में उसके जैसा एक और मनुष्य भी होना चाहिए।
उसका दूसरा रूप।
उसका दूसरा जीवन।
और शायद…
उसका दूसरा पुराना दोस्त।
चरण ने आँखें बंद कर लीं।
उसे बार-बार एक ही प्रश्न परेशान कर रहा था—
“अगर वह सचमुच मेरे जैसा हुआ तो?”
उसने धीरे से कहा
चरण: “क्या वह भी मेरी तरह तारों को देखकर अकेला महसूस करता होगा? क्या उसे भी कभी यह लगता होगा कि इस विशाल ब्रह्माण्ड में कहीं कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिल्कुल उसकी तरह सोचता है?”
अचानक
चेतावनी!
अंतरिक्षयान की स्क्रीन लाल हो उठी।
“डाइमेंशनल बाउंड्री इंटीग्रिटी – ४ प्रतिशत।”
चरण की धड़कन तेज हो गई।
चरण: “तो समय आ गया…”
उसने क्वांटम-टनलिंग रिएक्टर सक्रिय कर दिया।
अंतरिक्ष में अचानक एक विचित्र कंपन उत्पन्न हुआ।
तारे कुछ क्षणों के लिए टेढ़े दिखाई देने लगे।
स्पेस-टाइम स्वयं जैसे मुड़ गया।
फिर एक विशाल वर्महोल आकार लेने लगा।
वह सामान्य वर्महोल जैसा नहीं था।
उसके भीतर अनगिनत चमकती हुई रेखाएँ थीं, मानो किसी ने अंतरिक्ष के कपड़े पर दूसरे ब्रह्माण्ड की खिड़की खोल दी हो।
चरण स्क्रीन पर झुक गया।
चरण: “दूसरी ओर कोई है?”
कुछ क्षण तक केवल शोर सुनाई दिया।
फिर—
“क्या तुम चरण हो?”
चरण के शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई।
उसने उत्तर दिया
चरण: “हाँ… लेकिन तुम कौन हो?”
कुछ क्षण मौन रहा।
फिर स्क्रीन पर एक चेहरा उभरा।
चरण का चेहरा।
वही आँखें।
वही माथा।
वही मुस्कान।
लेकिन उसके वस्त्र, अंतरिक्षयान और वैज्ञानिक उपकरण पूरी तरह अलग थे।
अजनबी: “मैं शरण हूँ।”
चरण की आँखें फैल गईं।
चरण: “शरण…?”
शरण: “हाँ।”
चरण: “क्या हम…?”
शरण: “एक ही जैविक मूल के दो संभावित जीवन हैं।”
दोनों कुछ क्षण मौन रहे।
फिर शरण मुस्कराया।
शरण: “लगता है, आखिरकार हमें अपना दूसरा संस्करण मिल ही गया।”
चरण की आँखों में चमक आ गई।
चरण: “नहीं शरण… मुझे लगता है, मुझे मेरा पुराना दोस्त मिल गया।”
“दो ब्रह्माण्ड, एक दोस्ती”
दोनों अंतरिक्षयान डाइमेंशनल पोर्टल के दोनों ओर स्थिर थे।
क्वांटम संचार प्रणाली के माध्यम से दोनों मित्र एक-दूसरे को स्पष्ट देख पा रहे थे।
लेकिन उनके बीच केवल विज्ञान की जिज्ञासा नहीं थी।
एक विचित्र आत्मीयता थी।
मानो वर्षों से बिछड़े दो मित्र अचानक फिर आमने-सामने आ गए हों।
शरण ने चरण को ध्यान से देखा।
शरण: “तुम्हें देखकर कुछ अजीब-सा लग रहा है।”
चरण: “मुझे भी।”
शरण: “ऐसा लगता है जैसे तुम्हें पहले कहीं देखा है।”
चरण हँस पड़ा।
चरण: “शायद इसलिए कि तुमने मुझे कभी देखा ही नहीं… और फिर भी मैं तुम्हारा ही दूसरा रूप हूँ।”
शरण कुछ क्षण सोचता रहा।
शरण: “क्या तुम्हारे बचपन में भी तुम्हारा कोई ऐसा दोस्त था, जिसके साथ तुम घंटों तारों को देखा करते थे?”
चरण अचानक शांत हो गया।
चरण: “हाँ।”
शरण: “नाम?”
चरण: “अद्भुत… तुम्हारे जीवन में भी?”
शरण मुस्कराया।
शरण: “हाँ। मेरे दोस्त का नाम भी वही था।”
चरण ने विस्मय से पूछा—
चरण: “फिर वह कहाँ है?”
शरण की मुस्कान फीकी पड़ गई।
शरण: “मेरे बचपन के बाद वह शहर छोड़कर चला गया। फिर कभी नहीं मिला।”
चरण की आँखों में नमी उतर आई।
चरण: “मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था।”
दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
उन्हें लगा जैसे समानांतर ब्रह्माण्डों ने केवल उनके चेहरे नहीं दोहराए थे…
उनकी अधूरी स्मृतियाँ भी दोहरा दी थीं।
कुछ देर बाद चरण ने पूछा
चरण: “अच्छा, मुझे अपनी दुनियां के बारे कुछ बताई।”
शरण: “ठीक है। मेरी दुनिया तुम्हारी दुनिया से लगभग तीन शताब्दियाँ आगे है।”
चरण उत्सुक हो उठा।
चरण: “तीन सौ वर्ष आगे… तो जीन एडिटिंग कहाँ तक पहुँच चुकी है?”
शरण ने अपनी स्क्रीन पर कुछ आँकड़े प्रदर्शित किए।
शरण: “तुम्हारे समय में CRISPR जैसी तकनीक जीनोम के विशिष्ट हिस्सों में परिवर्तन करती है। हमारे यहाँ क्वांटम-गाइडेड जीन एडिटिंग विकसित हो चुकी है।”
चरण: “क्वांटम-गाइडेड?”
शरण: “हाँ। अब केवल DNA के एक अनुक्रम को बदलना पर्याप्त नहीं माना जाता। हमारी प्रणालियाँ कोशिका के एपिजेनेटिक नेटवर्क, जीन अभिव्यक्ति और प्रोटीन संश्लेषण के परस्पर संबंधों का रीयल-टाइम अनुकरण करती हैं।”
चरण ध्यान से सुन रहा था।
शरण: “सबसे बड़ी उपलब्धि है नैनो-रिपेयर वेक्टर।”
चरण: “वे क्या करते हैं?”
शरण: “सूक्ष्म जैव-नैनो मशीनें शरीर के भीतर घूमती हैं। वे क्षतिग्रस्त DNA की पहचान करती हैं, त्रुटिपूर्ण प्रोटीनों को निष्क्रिय करती हैं और कोशिकीय स्तर पर मरम्मत की प्रक्रिया प्रारंभ कर देती हैं।”
चरण: “अर्थात आनुवंशिक रोगों का स्थायी उपचार?”
शरण: “अधिकांश का। और केवल रोग ही नहीं ऊतक पुनर्जनन, अंगों की मरम्मत और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।”
चरण आश्चर्य से बोला
चरण: “तो तुम्हारी दुनिया में मनुष्य लगभग अमर हो गया?”
शरण ने सिर हिलाया।
शरण: “नहीं। यही हमारी सबसे बड़ी भूल थी हमने समझ लिया था कि शरीर को नियंत्रित कर लेना जीवन को नियंत्रित कर लेना है।”
चरण: “और उसकी कीमत?”
शरण कुछ क्षण चुप रहा।
शरण: “भावनाएँ।”
चरण ने भौंहें सिकोड़ लीं।
शरण: “हमारे पास न्यूरल इंटरफेस, स्मृति-संशोधन, कृत्रिम अंग, जैव-नैनो चिकित्सा और जीनोमिक पुनर्रचना है। लेकिन लोग दुःख से बचने लगे हैं।”
चरण: “और दुःख से बचकर?”
शरण: “लोग प्रेम की गहराई भी भूलने लगे हैं।”
चरण ने धीमे स्वर में कहा
चरण: “मेरी दुनिया में विज्ञान तुम्हारी दुनिया जितना विकसित नहीं है। बीमारियाँ हैं, युद्ध हैं, गरीबी है… लेकिन मनुष्य अभी भी अपनी कमजोरियों के साथ जीना सीख रहा है।”
शरण मुस्कराया।
शरण: “यानी तुम्हारे पास कम तकनीक है, लेकिन अधिक मनुष्य हैं।”
चरण भी मुस्करा दिया।
चरण: “और तुम्हारे पास अधिक तकनीक है… लेकिन शायद मनुष्य कम।”
दोनों कुछ क्षण मौन रहे।
फिर शरण ने पूछा
शरण: “चरण, क्या तुम्हें लगता है कि हमारी दुनियाओं में से कोई एक बेहतर है?”
चरण ने सिर हिलाया।
चरण: “नहीं। शायद दोनों अधूरी हैं।”
शरण: “तो फिर?”
चरण ने उसकी आँखों में देखा।
चरण: “शायद हमें एक-दूसरे की दुनिया से कुछ सीखना चाहिए।”
शरण की आँखों में चमक आ गई।
शरण: “तुम मेरी दुनिया में आओगे?”
चरण ने पूछा
चरण: “और तुम मेरी दुनिया में?”
शरण ने हाथ आगे बढ़ाया।
शरण: “मंजूर?”
चरण ने उसका हाथ थाम लिया।
चरण: “मंजूर।”
“शरीरों की अदला-बदली”
दोनों ने अपने निर्णय को वैज्ञानिक प्रक्रिया में बदल दिया।
यह साधारण स्थानांतरण नहीं था।
उन्हें न्यूरल-मैपिंग, जीनोमिक सिंक्रोनाइज़ेशन, क्वांटम-एंटैंगलमेंट लिंक और कांशसनेस ट्रांसफर प्रोटोकॉल को एक साथ सक्रिय करना था।
दोनों अंतरिक्षयानों में अलग-अलग बायो-क्वांटम चैंबर तैयार किए गए।
चरण ने अंतिम बार पूछा
चरण: “अगर चेतना-स्थानांतरण असफल हुआ तो?”
शरण: “तो हम दो समानांतर ब्रह्माण्डों में दो अधूरी कहानियाँ बनकर रह जाएँगे।”
चरण हँस पड़ा।
चरण: “तुम अब भी मजाक करते हो?”
शरण: “दोस्त मिला है। इतनी आसानी से गंभीर कैसे हो जाऊँ?”
दोनों चैंबर में प्रवेश कर गए।
क्वांटम रिएक्टर सक्रिय हुआ।
१० प्रतिशत… २५ प्रतिशत… ५० प्रतिशत… ८० प्रतिशत…
अचानक पूरे क्षेत्र में तीव्र गुरुत्वीय कंपन हुआ।
दोनों ब्रह्माण्डों के बीच स्थित वर्महोल कुछ क्षणों के लिए फैल गया।
फिर
प्रकाश का एक विराट विस्फोट हुआ।
समय जैसे रुक गया।
दोनों की चेतनाएँ क्वांटम-एंटैंगलमेंट के माध्यम से एक-दूसरे के जैविक तंत्र से जुड़ गईं।
कुछ क्षण बाद…
चरण ने आँखें खोलीं।
उसने अपने हाथों को देखा।
यह उसका शरीर नहीं था।
सामने शरण खड़ा था अब चरण के शरीर में।
दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कराए।
शरण: “तो… अब तुम मैं हो।”
चरण: “और तुम मैं।”
शरण: “अजीब अनुभव है।”
चरण: “लेकिन दोस्ती वही है।”
दोनों अपने-अपने अंतरिक्षयानों की ओर बढ़ने लगे।
अचानक चरण रुक गया।
चरण: “शरण!”
शरण ने पीछे मुड़कर देखा।
चरण: “हम फिर मिलेंगे?”
शरण मुस्कराया।
शरण: “किसी एक ब्रह्माण्ड में नहीं।”
उसने आकाश की ओर देखा।
शरण: “किसी भी ब्रह्माण्ड में।”
चरण ने हाथ उठाया।
चरण: “वादा?”
शरण: “वादा।”
दोनों अपने-अपने यानों में सवार हो गए।
एक यान आधुनिक, अत्याधुनिक ब्रह्माण्ड की ओर बढ़ गया।
दूसरा उस दुनिया की ओर, जहाँ विज्ञान अभी अपनी यात्रा के मध्य में था।
दोनों की दिशाएँ अलग थीं।
ब्रह्माण्ड अलग थे।
शरीर अलग थे।
जीवन अलग होने जा रहा था।
लेकिन उनके बीच एक संबंध ऐसा था जिसे न स्पेस-टाइम, न क्वांटम मैकेनिक्स, न बीस हजार प्रकाश-वर्ष की दूरी समाप्त कर सकती थी
मित्रता।
और अनंत अंतरिक्ष में दूर जाते हुए दोनों अंतरिक्षयानों के क्वांटम संचार उपकरणों से एक अंतिम संदेश प्रसारित हुआ
“दो पुराने दोस्त हैं हम…
ब्रह्माण्ड बदल सकते हैं,
लेकिन दोस्ती नहीं।”
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