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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : वंदे मातरम्” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/अगस्त/२०२५/ब” !! 📜
📚 विषय :- !! “वन्दे मातरम्” !! 📚
⏰ समयावधि :- दिनाँक ११/०८/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १५/०८/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣

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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : रक्षाबंधन” !!

📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/अगस्त/२०२५/अ” !! 📜
📚 विषय :- !! “रक्षाबंधन” !! 📚
 ⏰ समयावधि :- दिनाँक ०४/०८/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक ०८/०८/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “काव्य” !! 🪔
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣

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कल्प भेंटवार्ता_20250730_003434_0001

!! “व्यक्तित्व परिचय : श्री सुधीर शर्मा “अधीर” जी ” !!

साहित्यकार को समाज का आँख, नाक और कान ही नहीं, चेतना भी बनना चाहिए। साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उस पर जमी जड़ता की धूल को साफ करने का भी एक साधन है।

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प्रकाशनार्थ : अमृत तुल्य आयुर्वेदिक औषधी सितोपलादि चूर्ण

चरक संहिता में उल्लेखित सितोपलादि चूर्ण पर विस्तार से विवरण देने के पहले महर्षि चरक, जो  “चरक संहिता” के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक थे,के बारे में संक्षिप्त जानकारी यहाँ साँझा करना उचित रहेगा। वैसे तो महर्षि चरक द्वारा अनेक औषधियों को प्रतिपादित किया गया है और सभी की सभी काफी गुणकारी हैं लेकिन सितोपलादि चूर्ण एक ऐसी औषधि है जिसे अमृत तुल्य माना गया है।   अब सबसे पहले …

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ॐ श्री गोपीनाथायः शरणं ममः_20250728_144124_0000

!! “कल्पकथा प्रतियोगिता आमंत्रण : सावन मनभावन” !!  

📜 विशिष्ट प्रतियोगिता क्रमांक :– !! “कल्प/जुलाई/२०२५/क” !! 📜
📚 विषय :- !! “सावन मनभावन” !! 📚
 ⏰ समयावधि :- दिनाँक २८/०७/२०२५ प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २९/०७/२०२५ रात्रि १०.०० बजे तक ⏰
🪔 विधा :- !! “स्वैच्छिक” !! 🪔
 📢 भाषा :- !! “हिन्दी, संस्कृत” !! 📣

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“कल्प भेंटवार्ता” – श्री अमित कुमार जी, मैकेनिक्सबर्ग पेंसिल्वेनिया, के साथ

विश्व हिंदी को साहित्यिक गरिमा प्रदान करने हेतु यदि मौलिक सिद्धांतों की बात की जाए तो ,
१. साहित्य विभाजन न करता हो। देश, धर्म, जाति या और भी कोई प्रकार का विभाजन , उससे ऊपर होकर लिखा जाए।
२. नए विश्व में नई समस्याएं हैं जिसमें रिश्तों की समीकरण बदली है, मनोवैज्ञानिक रूप से अलग तरह की उलझने बढ़ी है जो सब देशों, समुदायों में समान है।
इस सबके बीच मनुष्य को मूल प्रेरणा देने वाला साहित्य हमेशा जरूरी रहेगा।
३. साहित्य में विविधता हो, जो देश काल का ध्यान रखते हुए रखी जाए।

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महर्षि चरक - आयुर्वेदिक उपचार विज्ञान के शाश्वत स्तंभ

महर्षि चरक – आयुर्वेदिक उपचार विज्ञान के शाश्वत स्तंभ

भारतीय चिकित्सा परंपरा का आधारभूत स्तंभ “आयुर्वेद” न केवल शारीरिक उपचार की प्रणाली है, बल्कि यह जीवन को दीर्घायु, स्वस्थ और संतुलित बनाने का शास्त्र भी है। इस प्राचीन विज्ञान के सूत्रधारों में महर्षि चरक का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान को औषधि, आहार, दिनचर्या, मनोविज्ञान और नीतिशास्त्र के साथ जोड़कर इसे समग्र जीवन-दर्शन का रूप प्रदान किया।

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राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर मेरे विचार

राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर मेरे विचार

राष्ट्र का ध्वज उसकी पहचान, गरिमा और आत्मा का प्रतीक होता है। भारत का तिरंगा न केवल हमारे स्वाधीनता संग्राम की गवाही देता है, बल्कि आज भी हर नागरिक को एकता, विविधता और बलिदान की याद दिलाता है।

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